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शेषनाथ शर्मा ‘शील’ के बरवै छंद
भासा, सहज, सरस, पद, नानक छंद जइसे गुर के पागे सक्कर कंद सुसकत आवत होइही भइया... -
बृजलाल प्रसाद शुक्ल के सवैया
अब अंक छत्तीस ल लागे कलंक हे, कैसे छोड़ाये म ये छुटही। मुख मोरे हावे पीठ... -
पारंपरिक राउत-नाच दोहा
गौरी के गनपति भये, अंजनी के हनुमान रे। कालिका के भैरव भये, कौसिल्या के लछमन राम...
