बृजलाल प्रसाद सुक्‍ल के जनम 1.7.1919 मुंगेली जिला बिलासपुर म होय रहिस उनला काव्‍य सास्‍त्र के अच्‍छा अध्‍ययन रहिस अउ उन छंद लिखे म पारंगत रहिन। डॉ.विनय कुमार पाठक उन ला छत्‍तीसगढी़ लोकजीवन के सचेतक हास्‍य व्‍यंग्‍य के सर्जक करूण भाव के जनक प्रकृति के चितेरे छत्‍तीसगढ़ संस्‍कृति के वाहक कवि के रूप में बड़ सम्‍मान दे हवय। सवैया छंद म उन किसन कन्‍हैया नामक खंड काव्‍य लिखे हंवय। ऐहीच छंद म उन सप्‍तसती अउ अमरूसतक जइसन ”सबरी सत्‍कार” नामक गीति काव्‍य के रचना करें हें। बेटी के बिदा म लोक तत्‍व के सुन्‍दर झांकी मिलथे। डॉ.विनय कुमार के ही सब्‍दन म छत्‍तीसगढी़ खंड काव्‍य ल समरिद्ध करके सुक्‍ल जी ह काव्‍य ल नया रूप दे हंवय चंदा उगे अकास (1967) उंकर गीत संग्रह जेकर परकासन प्रयास प्रकासन ले दुबारा होय रहीस।