भाषान्‍तर : बुलबुल अउ गुलाब (मूल रचना – आस्कर वाइल्ड. अनुवाद – कुबेर )

छत्‍तीसगढ़ी साहित्‍य म अनुवाद के परम्‍परा ‘कामेडी आफ इरर’ के छत्‍तीसगढ़ी अनुवाद ले चालू होए हावय तउन हा धीरे बांधे आज तक ले चलत हावय. छत्‍तीसगढ़ी म अनुवाद साहित्‍य उपर काम कमें होए हावय तेखर सेती अनुवाद रचना मन के कमी हावय. Read More

उर्दू शेर के अनुवाद

x x x चर्चा फलानिन के अउ हमर बखान ओ मेरले बईरी लहुट गे,काली जेन संगवारी रिहिस..ओकर गारी ला हम हंसी ठट्ठा जानेनका बताबे जेन जुन्ना चिन्हारी रिहिस..मया के लहसे दुःख पीरा कैसे बतातेन तेमाकुचराए अंगरी माँ लहू केतुरतुर धारीरिहिसहम कहाँ के Read More

हीरानंद सच्चिदानंद वात्सायन अज्ञेय के तीन कविता

सांपसांप! तोला सऊर अभी ले नई आईससहर म बसे के तौर नई आईसपूछत हंव एक ठन बात-जवाब देबे?त कइसे सीखे डसे बर-जहर कहां पाये? पुलजोन मन पुल बनाहींवो मन सिरतौन पाछू रहिं जाहींनहक डारही सेनारावन ह मरही जीत जाही राम हजोन मन Read More

अनुवाद : तीसर सर्ग : सरद ऋतु

कालिदास कृत ऋतुसंहारम् के छत्तीसगढ़ी अनुवाद- अओ मयारुककांसी फूल केओन्हा पहिरे,फूले कमल कसहाँसत सुघ्घर मुंहरनमदमातेहंसा के बोली असछमकत पैजनियां वालीपाके धान के पिंवरी लेसुघ्घर येकसरी देंह केमोहनी रूपनवा बहुरिया कससीत रितु ह आगे। सीतरितुआय ले कांसी फूल ले धरतीचंदा अंजोर म रतिहाहंसा मन Read More

अनुवाद : बारह आने

(मोरेश्वर तपस्वी ”अथक” द्वारा लिखित ”बारह आने” का अनुदित अंश) वो ह मोर हाथ ल धरलिस अउ एक ठन छोटकन पुड़िया दे के मोर मुठा ल बंद कर दिस अउ कहिस- बाबू जी, आज मोर मंसा ह पूरा होगे। मैं तुम्हीं ल Read More

मिट्ठू मदरसा : रविन्द्रनाथ टैगोर के कहिनी के छत्तीसगढ़ी अनुवाद

एक ठिक मिट्ठू राहय। पटभोकवा, गावय मं बने राहय। फेर बेद नई पढ़य। डांहकय, कूदय, उड़ियाय, फेर कायदा-कानहून का होथे, नई जानय। राजा कथे ‘अइसने मिट्ठू का काम के’ कोनो फायदा तो नी हे, घाटा जरूर हे। जंगल के जमें फर मन Read More