छत्तीसगढ़ी गज़ल

अब नगरिहा गाये नहीं, काबर ददरिया। संगी ला बलाये नहीं, काबर ददरिया। बेरा-कुबेरा खेत-खार म गुंजत राहय, हमला अब लुभाये नहीं, काबर ददरिया। मन के पीरा, गीत बना के जेमा गावन, अंतस मा समाये नहीं, काबर ददरिया। कुहकत राहय ओ कोयली कस Read More

बलदाऊ राम साहू के छत्‍तीसगढ़ी गज़ल

1 झन कर हिसाब तैं, कौनो के पियार के । मया के लेन-देन नो हे बइपार के । मन के मंदिरवा मा लगे हे मूरत ह, कर ले इबादत, राख तैं सँवार के । मन के बात ला, मन मा तैं राख Read More

गजल

जम्मो नवा पुराना हावै। बात हमला दुहराना हावै । लूट सको तो लुट लौ भैया, सरकारी खजाना हावै । झूठ-लबारी कहि के सबला सत्ता तो हथियाना हावै। कतको अकन बात हर उनकर लागे गजब बचकाना हावै। पेट पलइया मांग करे तब, रंग Read More

ग़ज़ल : उत्तर माढ़े हे सवाल के

हो गे चुनाव ये साल के। उत्तर माढ़े हे, सवाल के। बहुत चिकनाईस बात मा चिनहा ह दिखत हे, गाल के। आज हम कौन ल सँहरावन जम्मो हावै टेढ़ा चाल के। किस्सा सोसन के भूला के, रक्खौ लहू ला उबाल के। झन Read More

गजल

सुरुज नवा उगा के देखन, अँधियारी भगा के देखन। रोवत रहिथे कतको इहाँ, उनला हम हँसा के देखन। भीतर मा सुलगत हे आगी, आँसू ले बुझा के देखन। कब तक रहहि दुरिहा-दुरिहा, संग ओला लगा के देखन। दुनिया म कतको दुखिया हे, Read More

छत्तीसगढ़ी गज़ल

भाषण सबो देवइया हावै। सपना गजब देखइया हावै। कौन इहाँ जी सच ला कहही सब के सब भरमइया हावै। काकरो मुँह में थाहा नइ हे मर्यादा कौन निभइया हावै? देस के चिंता हावै कौन ल, गड़बड़ गीत गवइया हावै। सबरी कस रद्दा Read More

ग़ज़ल

हममन बस गोहरइया1 हावन2। उनकर पानी भरइया हावन।। देस के देवता-धामी मन के। पूजा हममन करइया हावन। उही मन समरथ, ग्यानी, पंडित। हम तो पाँव परइया हावन। राम-राज हर आही कहाँ ले पाछू-पाछू रेंगइया3 हावन। दुनिया हर आगु रेंगत हावै। उनकर पूछी Read More

छत्तीसगढ़ी ग़ज़ल

थोरकिन तँहू जोहार बबा। बाँटत हावै सरकार बबा। दीही कहिथें बोनस अड़बड़ हाँथ ल अब बने पसार बबा। घर-घर मा मोबाइल आगे चुनई के हरे दरकार बबा। झँगलू – मंगलू नेता बनके ठाढ़े हे तोर दुवार बबा। दुरिहा-दुरिहा राहे जउन मन लपटत Read More

गाँव रहिस सुग्घर, अब शहर होगे

बोली अउ भाखा हर जहर होगे, गाँव रहिस सुग्घर, अब शहर होगे। दिनो -दिन बाढ़त हे मंहगाई हर, मुश्किल अब्बड़ गुजर-बसर होगे। बैरी बनगे भाई के अब भाई हर, लागत हे, चुनई के गजब असर होगे। बलदाऊ राम साहू

गज़ल : किस्सा सुनाँव कइसे ?

ये पिरीत के किस्सा सुनाँव कइसे ? घाव बदन भर के ला लुकाँव कइसे ? देंवता कस जानेंव ओकर मया ला मँय हर , अब श्रद्धा म माथ ला झुकाँव कइसे ? पाँव धँसगे भुइँया म देखते देखत , बिन सहारा ऊपर Read More