छत्तीसगढ़ी नवगीत : पछतावत हन

ओ मन आगू-आगू होगे हमन तो पछवावत हन हाँस-हाँस के ओ मन खावय हमन तो पछतावत हन। इही  सोंच मा हमन ह बिरझू अब्बड़ जुगत लखायेन काँटा-खूँटी ल चतवार के हम रद्दा नवा बनायेन। भूख ल हमन मितान बनाके रतिहा ल हम Read More

बिन बरसे झन जाबे बादर

हमर देस के सान तिरंगा, आगे संगी बरखा रानी, बिन बरसे झन जाबे बादर, जेठ महीना म, गीत खुसी के गाबे पंछी, मोर पतंग, झरना गाए गीत, जम्मो संग करौ मितानी, खोरवा बेंदरा, रहिगे ओकर कहानी, बुढवा हाथी, चलो बनाबो, एक चिरई, Read More

घानी मुनी घोर दे : रविशंकर शुक्ल

घानी मुनी घोर दे पानी .. दमोर हे हमर भारत देसल भइया, दही दूध मां बोर दे गली गांव घाटी घाटी महर महर महके माटी चल रे संगी खेत डंहर, नागर बइला जोर दे दुगुना तिगुना उपजय धान बाढ़े खेत अउर खलिहान Read More

बंदौ भारत माता तुमला : कांग्रेस आल्हा

खरोरा निवासी पुरुषोत्तम लाल ह छत्तीसगढ़ी म प्रचार साहित्य जादा लिखे हे। सन 1930 म आप मन ह कांग्रेस के प्रचार बर, ‘कांग्रेस आल्हा’ नाम केे पुस्तक लिखेे रहेव। ये मां कांग्रेस के सिद्धांत अऊ गांधी जी के रचनात्मक कार्यक्रम के सरल Read More

उरमाल म मयारू तोर मुंह ल पोंछव उरमाल म

उरमाल म मयारू (गजामूंग) तोर मुंह ल पोंछव उरमाल म, उरमाल म ग बईहा तोर मुंह ल पोछवं उरमाल म। अमली फरे कोका-कोका जामुन फरे करिया ओ चल दूनो झन संगे जाबो तरिया। उरमाल म … आम गाँव जामगांव तेंदू के बठेना Read More

बखरी के तुमा नार बरोबर मन झूमरे

बखरी के तुमा नार बरोबर मन झूमरेे, डोंगरी के पाके चार ले जा लान दे बे । मया के बोली भरोसा भारी रे कहूँ दगा देबे राजा लगा लेहूँ फाँसी । बखरी के तुमा नार … हम तैं आगू जमाना पाछू रे Read More

कोइली के गुरतुरबोली मैना के मीठी बोली जीवरा ल बान मारे रेे

कोइली के गुरतुरबोली मैना के मीठी बोली जीवरा ल बान मारे रेे … गिरे ल पानी चूहे ल ओइरछा, तोर मया म मयारू मारथे मूरछा । जीवरा ल बान मारे रै … गोंदा के फूल बूंभर कांटा रे तोर सुख-दुख म हे Read More

ददरिया : तिरछी नजरिया भंवा के मारे

ये भंवा के मारे रे मोर रसिया तिरछी नजरिया भंवा के मारे । सिरपुर मंदिर म भरे ल मेला तोला फोर के खबवाहूँ नरियर भेला । ये भवा के मारे … । आये ल सावन छाये ल बादर, तोर सुरता के लगायेंव Read More

गीत : चौरा म गोंदा रसिया, मोर बारी म पताल हे

चौरा म गोंदा रसिया मोर बारी म पताल हे चौरा म गोंदा । लाली-गुलाली छींचत अइबे राजा मोर मैं रहिथंंव छेंव पारा म पूछत अइबे । चौरा म गोंदा … परछी दुवारी म ठाढेच रहिहंव राजा मोर मन महल म दियना बारेच Read More

ददरिया : लागे रहिथे दिवाना, तोर बर मोर मया लागे रहिथे

लागे रहिथे दिवाना, तोर बर मोर मया लागे रहिथे । लागे रहिथे दिवानी तोर बर मोर मया लागे रहिथे । दाँते बत्तीसी नयन कजला या तोर मया के मारे होगेंव पगला । ये दिना … लागे रहिये … गहूँ पिसान के बनाये Read More