चेरिया का रानी बन जाहय

आदरणीय सुकवि बुधराम यादव संपादक “गुरतुर गोठ”, वरिष्ठ साहित्कार बिलासपुर छत्तीसगढ़ के प्रकाशनाधीन छत्तीसगढ़ कबिता संग्रह ” मोर गाँव कहाँ सोरियावत हंव “ ले एक-एक ठन कबिता रूपी फूल चुन के “सरलग” हम आपमन के सेवा म परसतुत करत हन. गत अंक Read More

मोर गाँव

बने रहै मोर बनी भूती ह, बनै रहै मोर गाँव,बने रहै मोर खपरा छानही,बर पीपर के छाँव। बड़े बिहनिहा बासत कुकरा, आथे मोला जगाये,करके मुखारी चटनी बासी,खाये के सुरता देवाये।चाहे टिकोरे घाम रहै या बरसत पानी असाढ़,चाहे कपावै पू ा मांघ, महिना Read More

मधुमास

मन धरती के झुमरत हे आज रे  चंदा चंदैनी के मड़वा छवाय  बांधे मउर खड़े मधुमास रे  मन धरती के झुमरत हे आज रे कुहकत हे कोइली हर डारा-डारा म  नेवता देवत हावै पारा-पारा म  नहावै धरती चंदैनी धारा म  धीरे धीरे Read More

तोर दुआरी

सुरता के दियना, बारेच रहिबे,रस्ता जोहत तैं ढाढेंच रहिबे।रइही घपटे अंधियारी के रात,निरखत आहूं तभो तोर दुआरी। मैं बनके हिमगिरी,तैं पर्वत रानी,मौसम मंसूरी बिताबो जिनगानी।कुलकत करबो अतंस के हम बात,निरखत आहूं तभो तोर दुआरी। मैं करिया लोहा कसमुरचावत हावौं,तैं पारस आके तोर Read More

बिहान होगे रे

बैरी-बैरी मन मितान होगे रे हमर देश म बिहान होगे रे तीन रंग के धजा तिरंगा धरे हे भारत मइया केसरिया हर त्याग सिखोथे सादासत्य बोलइया हरियर खेत के निसान होगे रे। हमर देश म बिहान होगे रे बीच म चरखा गांधी Read More

छत्तीसगढ़िया

छत्तीसगढ के रहइया,कहिथें छत्तीसगढ़िया, मोर नीक मीठ बोली, जनम के मैं सिधवा। छत्तीसगढ के रहइया,कहिथें छत्तीसगढ़िया।  कोर कपट ह का चीज ये,नइ जानौ संगी, चाहे मिलै धोखाबाज, चाहे लंद फंदी। गंगा कस पबरित हे, मन ह मोर भइया, पीठ पीछू गारी देवैं,या Read More

गुरतुर गोठ (गीत) सुकवि बुधराम यादव

तोला राज मकुट पहिराबो ओ मोर छत्तीसगढ़ के भाषा तोला महरानी कहवाबो ओ मोर छत्तीसगढ़ के भाषा तोर आखर में अलख जगाथे भिलई आनी बानी देस बिदेस में तोला पियाथे घाट-घाट के पानी तोर सेवा बर कई झन ऐसन धरे हवंय बनबासाओ Read More