मतदान : चौपई छंद (जयकारी छंद)

देश करत हावय अह्वान। बहुत जरूरी हे मतदान। मतदाता बनही हुँशियार। लोक स्वप्न होही साकार। लोकतंत्र के जीव परान। मतदाता मत अउ मतदान। मत दे बर झन छूटँय लोग। कहिथे निर्वाचन आयोग। उम्मर हो गय अठरा साल। मतदाता बन करव कमाल। वोटिंग Read More

बेटी : रोला छन्द

बेटी हावय मोर, जगत मा अब्बड़ प्यारी। करथे बूता काम, सबो के हवय दुलारी। कहिथे मोला रोज, पुलिस बन सेवा करहूँ। मिटही अत्याचार, देश बर मँय हा लड़हूँ। अबला झन तैं जान, भुजा मा ताकत हावय, बैरी कोनों आज, भाग के नइ Read More

दोहा गजल (पर्यावरण)

रुख राई झन काटहू, रुख धरती सिंगार। पर हितवा ये दानियाँ, देथें खुशी अपार।~1 हरहिंछा हरियर *अमित*, हिरदे होय हुलास। बिन हरियाली फोकला, धरती बंद बजार।~2 रुखुवा फुरहुर जुड़ हवा, तन मन भरय उजास। फुलुवा फर हर बीज हा, सेहत भरे हजार।~3 Read More

राखी

छन्न पकैया छन्न पकैया,पक्का हम अपनाबो। नइ लेवन अब चीनी राखी,देशी राखी लाबो।1 छन्न पकैया छन्न पकैया,बहिनी आँसों आबे। हमर देश के रेशम डोरी,सुग्घर तैं पहिराबे।2 छन्न पकैया छन्न पकैया, सावन आय महीना। हमर देश के राखी ले के,पहिरव ताने सीना। छन्न Read More

सार छंद

हरियर लुगरा पहिर ओढ़ के, आये हवै हरेली। खुशी छाय हे सबो मुड़ा मा, बढ़े मया बरपेली। रिचरिच रिचरिच बाजे गेंड़ी, फुगड़ी खो खो माते। खुडुवा खेले फेंके नरियर, होय मया के बाते। भिरभिर भिरभिर भागत हावय, बैंहा जोर सहेली। हरियर लुगरा Read More

छंद : मदिरा सवैया

1–हे गणराज करौं बिनती ,सुन कष्ट हरो प्रभु दीनन के । रोग कलेश घिरे जग में,भय दूर करो सबके मन के । हाँथ पसारय द्वार खड़े भरदे घर ला प्रभु निर्धन के । तोर मिले बरदान तहाँ दुखिया चलथे सुखिया बनके। 2–राम Read More

आल्हा छंद : झाँसी के रानी

बरस अठारा में रानी ने, भरिस हुंकार सीना तान। भागय बैरी ऐती तेती, नई बाचय ग ककरो प्राण। गदर मचादिस संतावन में, भाला बरछी तीर कमान। झाँसी नई देवव बोलीस, कसदिच गोरा उपर लगाम। राव पेशवा तात्या टोपे, सकलाईस जब एके कोत। Read More

कस्तूरी – छत्तीसगढ़ के हरियर चाँउर

छत्तीसगढ़ के हरियर चाँउर, होथे सबले बढ़िया एखर बारे मा नइ जाने, सब्बो छत्तीसगढ़िया ।। दुरुग अउर धमतरी जिला मा, एखर खेती होथे फेर अभी कमती किसान मन, एखर बीजा बोथे।। सन् इकहत्तर मा खोजिन अउ नाम रखिन कस्तूरी छत्तीसगढ़ महतारी के Read More

मानसून मा : कुकुभ छंद

फिर माटी के सोंधी खुशबू,फिर झिंगुरा के मिठ बानी। मानसून मा रद रद रद रद,बादर बरसाही पानी। छेना लकड़ी चाउँर आटा,चउमासा बर जतनाही। छाता खुमरी टायच पनही,रैन कोट सुरता आही। नवा आसरा धरे किसानन,जाग बिहनहा हरषाहीं। बीज-भात ला जाँच परख के,नाँगर बइला Read More

गर्मी छुट्टी (रोला छंद)

बन्द हवे इस्कूल,जुरे सब लइका मन जी। बाढ़य कतको घाम,तभो घूमै बनबन जी। मजा उड़ावै घूम,खार बखरी अउ बारी। खेले खाये खूब,पटे सबके बड़ तारी। किंजरे धरके खाँध,सबो साथी अउ संगी। लगे जेठ बइसाख,मजा लेवय सतरंगी। पासा कभू ढुलाय,कभू राजा अउ रानी। Read More