Category: संपादकीय

गुनान गोठ : पाठक बन के जिए म मजा हे




एक जमाना रहिस जब मैं छत्तीसगढ़ी के साहित्यकार मन ल ऊंखर रचना ले जानव। फेर धीरे-धीरे साहित्यकार मन से व्यक्तिगत परिचय होत गीस। महूँ कचरा-घुरुवा लिख के ऊंखर तीर बइठे बर बीपीएल कारड बनवा लेंव। समाज म अलग दिखे के सउंख एक नसा आय, लेखन एकर बर सहज-सरल जुगाड़ आय। घर के मुहाटी भिथिया म दू रूपया चाउंर वाला नाम लिखाये के का रौब-दाब होथे, एला झुग्गी-झोपडी मुहल्ला म रहे ले महसूसे जा सकत हे। जइसन समाज तइसन उहाँ के अलग मनखे, मने विशिष्ठ व्यक्ति।

खैर, अलग दिखे बर, बन तो गयेंव साहित्यकार, कहाये लगेंव तमंचा.. फेर वोकर गुण-तत्व नई आ पाईस। समाज के मनखे, अपन गुण-तत्व कइसे बदलय? जइसे-तइसे संघर गयेंव, साहित्यिक जुरियाव म तको जाये लगेंव। पहिली लगय के मही भर मनखे आंव बाकी मन बौद्धिक आयं मने साहित्यकार। सुने रेहेंव के बौद्धिक मन, मनखे जइसे बहस-निंदा, खुसुर-फुसुर, जलनकुकड़ई नई करयं, वोला महसूस करथें अउ समाज के आघू अपन लेखनी के दरपन टांगथे। फेर धीरे-धीरे समझ म आ गए के जम्मो झन मनखेच आयं। अब मैं बीच म फदक गए हँव, न मनखे बन पावत हँव न साहित्यकार।

बड़ दिन बाद गम पायेंव, सुधि पाठक के साहित्यकार आन अउ साहित्यकार के साहित्यकार आन होथे। पाठक बन के जिए म मजा हे। आहितकार-साहितकार बने रहे म बाय हे।

© तमंचा रायपुरी



छत्‍तीसगढ़ी, छत्‍तीसगढ़ी चिल्‍लाने वाले भी छत्‍तीसगढ़ी पढ़ना नहीं चाहते

logoफेसबुक में छत्तीसगढ़ी, छत्तीसगढ़िया और छत्तीसगढ़ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर हम आत्ममुग्ध हुए जा रहे हैं। इन शब्दों के सहारे हम अपनी छद्म अस्मिता से खिलवाड़ कर रहे हैं और अपनी पीठ खुद थपथपा रहे हैं। मुखपोथी में सक्रिय छत्तीसगढ़ी भाषा के योद्धा नंदकिशोर शुक्ल जी लगातार जिस बात को दोहराते रहे हैं यदि उनकी बातों को ध्यान में नहीं रखा गया तो यह निश्चित है कि हमारी फेसबुकाइ हुसियारी धरी रह जायेगी और आपके देखते-देखते ही छत्‍तीसगढ़ी नंदा जायेगी। उनका स्पष्ट कहना है कि छत्तीसगढ़ी भाषा को प्राथमिक पाठ्यक्रम में भी लागू किया जाए तभी छत्तीसगढ़ी भाषा बच पाएगी। फेसबुक में हो हल्ला करना मोदियापा है, चरदिनिया है, हम अति उत्साह से छत्तीसगढ़ी को खत्म करने पर उतारू है। विगत दिनों मुझे सुकवि बुधराम यादव जी का फोन आया था, मैंनें उन्‍हें बताया कि आपकी रचना ‘गांव कहां सोरियावत हे‘ के टेक्‍स्‍ट से ज्‍यादा वाईस पोस्‍ट पर ज्‍यादा क्लिक आ रहे हैं। तब उन्होंने बिना आश्‍चर्य के कहा कि धीरे-धीरे छत्तीसगढ़ी पढ़ने वालों की कमी होते जा रही है, लोगों को लगता है कि छत्तीसगढ़ी कठिन भाषा है, वे भले छत्तीसगढ़ी में बोल-चाल कर ले किंतु छत्तीसगढ़ी पढ़ने की उनकी प्रवृत्ति समाप्त होते जा रही है। उन्‍होंनें सकुचाते हुए कहा कि यह कह सकते हैं कि यह प्रवृत्ति विकसित ही नहीं हुई है। वाह, हम बड़े उत्साह के साथ छत्तीसगढ़ी छत्तीसगढ़ी चिल्लाते हैं किन्‍तु हम छत्तीसगढ़ी पढ़ ही नहीं पाते।

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मोर डांड तो छोटे तभे होही संगी, जब आप बड़का डांड खींचहू

ST1111संगवारी हो, आपमन जानत हवव के हमर भाषा के व्याकरण हिन्दी भाषा के व्याकरण ले आघू लिखा गए रहिस। ये बात ह सिद्ध करथे के हमर भाषा अउ ओखर साहित्य तइहा ले मान पावत हे अउ समृद्ध हे। अब तो हमर भाषा राज भाषा बन गए हे अउ अब हमर राज काज के काम छत्तीसगढ़ी भाषा म घलव होही। आप मन ये उदीम करव के अब ले सरकारी चिठ्ठी-पतरी छत्तीसगढ़ी भाषा म लिखव। ये उदीम ले सरकार के कारिंदा मन चिठ्ठी के जवाब देहे खातिर छत्तीसगढ़ी भाषा ल पढ़हिं-समझहीं तो। ये काम बर सरकार के मुह मत निहाराव, सरकार ल जउन करना हे करही, आप स्वयं बाना उचवव।

आप सब इंटरनेट बउरइया आव, आप मन अपन भाषा ल इहि माध्यम म बढ़ावा दव। पेपर-पुस्तक छपवाई म बड़ पैसा लागथे फेर ये माध्यम म आप अपन बात अउ बिचार बिना पइसा के लिख के देस-बिदेस म फइला सकत हव। हमर गीत-संगीत अउ नाच ल, आडियो-वीडियो रूप म ये माध्यम म डार के जादा ले जादा लोगन तक हमर महान संस्कृति के धजा फहरावव। सोसल मीडिया ह अभी के जमाना म अभिव्‍यक्ति के बड़का चौपाल आए, ऐमा आप अपन भाषा म अपन अभिव्यक्ति दव अउ अपन प्रदेस के संस्कृति के बारे म गोठ-बात करके, संगी मन के मन म अपन प्रदेस बर मया अउ गरब के भाव बढ़ावव। ये ठीहा मन म आप छत्तीसगढ़ी बोले-लिखे बर जोजियाये के बल्दा अपन भाषा के अतका उपयोग करव के आघू वाला ल आपके गोठ ल समझे बर छत्तीसगढ़ी के शब्द ल सीखे ल पर जाय।

इही भाव ल लेके गुरतुर गोठ के हमर ये उदीम, इंटरनेट (मेकराजाला) म छत्तीसगढ़ी भाखा के साहित्य ल आघू लाये के हे। हम ये वेब साईट म 2008 ले छत्तीसगढ़ी के रचनाकार मन के रचना सरलग डारत आवत हावन। हम चाहत हावन के हमर भाखा के जादा ले जादा साहित्य इंटरनेट म आवय। ये खातिर हम जमो संगी मन संग गिलोली करथन के, आप अपन ब्लॉग या बेवसाईट बना के अपन अउ अपन संगी साथी मन के रचना घलव ला डारव। हम सब जुरमिल के उदीम करबोन त हमर साहित्य सहजे म इंटरनेट के माध्यम ले हमला पढ़े-गुने ल मिल जाही।

मोर एके ठन अउ गिलौली हावय के ये बेवसाईट या कोनो ब्लॉग म एक पईत छपे रचना ला घेरी बेरी इंटरनेट म छापे के बजाए नवा रचना ल इंटरनेट म डारव। येखर ले हमर भाखा के साहित्य इंटरनेट म घलव बने पोठ होही अउ पाठक मन ल घलव बने रकम-रकम के बिसय पढ़े ल मिलही। ये बेवसाईट के रचना ल कापी करके कहू आप अपन ब्लॉग या बेव साईट म डारहू त पाठक ल नवा का मिलही। आप अपन दाई भाखा छत्तीसगढ़ी बर सिरतोन म मया करथव त नवा रचना अपन बेव साईट या ब्लॉग म डारव। ये साईट के कोनो रचना ल आप कहूं अपन ब्लॉग या बेवसाईट म डारना चाहत हव त बने होही के हमर साईट के पूरा रचना डारे के बजाए, हमर साईट म छपे रचना के लिंक ल अपन म लगा लव। येखर ले पाठक ल आपके वेब साईट या ब्लॉग के रचना के संगें संग हमरो साईट के रचना पढ़े ल मिलही।

आप अपन दाई भाखा छत्तीसगढ़ी बर अपन असल मया देखाव, अउ इंटरनेट म हमर भाखा के भंडार ल भर दव। मोर डांड तो छोटे तभे होही संगी, जब आप बड़का डांड खींचहू। मोर मिहनत ले बनाए ये साईट के रचना मन ल अपन साईट म छापे के बजाए आप छत्तीसगढ़ी के ई पेपर (भास्कर, पत्रिका, हरिभूमि) अउ आरकाईव म चल देहे देशबंधु मड़ई के रचना मन ल अपन साईट म जघा देहू तभो छत्तीसगढ़ी बर बड़का काम हो जाही।

हमर भाषा ल आघू बढ़ाये खातिर सरकार ल घलव अपन डहर ले उदीम करना चाही। सरकारी योजना मन के जानकारी अउ सरकारी कागज-पत्तर ल छत्तीसगढ़ी म छपवाना चाही अउ छत्तीसगढ़ी के प्रयोग सरकारी कार्यालय मन म चालू कराना चाही। मंत्री-अधिकारी मन ल घलव छत्तीसगढ़ी भाषा म गोठियाना चाही, अपन सियान मन ल अइसन करत देख के जनता के मन म अपन भाषा बर हीन भावना ह दूर होही। अभी अतकेच, आवव भर दन इंटरनेट म हमर भाषा के खजाना ल।
जय छत्तीसगढ़, जय छत्ती‍सगढ़ी।

संजीव तिवारी
संपादक: गुरतुर गोठ डॉट कॉम

संपादकीय: टमड़ ले पहिली अपनेच कान

ST1111पाछू पंद्रही ले छत्तीसगढ़ म अफवाह फइले हवय के गांव गांव म लईका चोर मन के दल के दल आये हें। ये अफवाह व्हाट्स एप के सहारा ले जादा फइलिस। नवा नवा मनखे मन टचस्क्रीन मोबाईल लीन अउ वोमा इंटरनेट पेक भरवईन, तहां ले वोमा व्हाट्स एप चलईन, अइसे लागे लगथे के जमा बिस्व के गियान अउ सूचना हमर हाथ म आ गे। कोन सूचना सहीं ये अउ कोन सूचना गलत आए तेखर निरवार करे के पहिली लोगन म ये होड़ सुरू हो जथे के ये सूचना ल जल्दी ले जल्दी मैं ह लोगन तक पहुंचावव। इही ह बात ल बिगाड़थे, अपन आप ल जादा गियानी अउ सुजानुक जताए के फेर म लईका चोर उतरे के खबर ल लोगन पहिली एक दूसर ल भेजिन। धीरे धीरे ये खबर चारो मुड़ा बगर गए।

सरकार अउ पुलिस के दावा हे के अभी तक एको लइका चोरी होए के जानकारी नइ हे, भलुक लईका चोर के ये अफवाह के कारन लोगन निरदोस मनखे ल धर—धर के मारत हें। एक मुह ले दूसर मुह, तिल के ताड़ होवत ये अफवाह अतका बाढ़ गए हे के अब पुलिस ल पम्पलेट बांटे ल परत हे अउ गांव—गांव जा के लोगन ल समझाए ल परत हे कि ये अफवाह ल झन मानव। फेर कुछ अबूझ मनखे मन अभी तक ले ये नहीं त ओ अफवाह उड़ाए के अपन टेस व्हाट्स एप म मारत दिखत हें। अभी दू दिन पहिली रइपुर के एक बड़का अउ भरोसा के पतरिका के व्हाट्स एप गुरूप म एक उजबक मनखे उड़ीसा म बनत बांध म 1000 पूजवन देहे बर छत्तीसगढ़ म मनखे धरईया आए हे कहि के अफवाह फईलाये के सुरूवात करे गइस। हमर संगी मन तुरते एखर बिरोध करिन अउ ये अफवाह ल उही जघा खतम करिन।

आज के नवा जुग म यहा तरा के अंघ बिसवास ल हवा देके समाज म डर फइलाये के काम कोन करत हे ये समझ म नइ आवत हे। ये काम छत्तीसगढ़ के अनदेखना मन के आए, उमन नइ चाहें के हमन सुखी रहन। उमन जानथें के हमन सिधवा आन, भोला आन, जल्दी काखरो कहना म आ जाथन। त संगी हो आप जमो अपन अपन दायित्व ल समझव, अफवाह फइला के हमर अहित करईया ल आवव बता दन के हम सिधवा भले हन फेर मूरूख नइ हन। हम काखरो कंउवा कान ल लेगे कहे म कंउवा के पाछू नइ दंउडन, हम पहिली अपन कान ल टमड़थन।

सुनके कंउवा लेगे कान,
कंउवा के पाछू भाग झन सियान
दुसर के भभइय म झन आ,
टमड़ ले पहिली अपनेच कान.

जय छत्तीसगढ़, जय छत्तीसगढ़ी!
संजीव तिवारी
संपादक: गुरतुर गोठ डॉट कॉम

संपादकीय : करिया तसमा म आंखी के उतियईल अउ उल्टा लटके के डर ले मुक्ति

ST1111करिया तस्मा पहिर के प्रधानमंत्री के सुवागत करई के किस्सा चार दिन मीडिया म छाईस। अपन डहर ले बुद्धिजीवी मन ओखर उपर अपन प्रतिक्रया घलो दीन। कोनो करिया तस्मा के संग खड़े रहिन त कोनों सरकार के कांसड़ा तिरई ल बने कहिन। छत्तीसगढ़ म तस्मा खपई ल, टेस मारे के उदीम कहे जाथे, काबर के छत्तीसगढ़ बर ये सहरी संस्कृ‍ति के लक्छन आए। फेर गांव अब सहर लहुटत हवय, अइसन समें म अब गावों म तस्मा खापे मनखे के दरसन होवत हे। ते पाके अब जमो तस्मा वाले मन के मन कुलकुलावत हे, सबो ल लउहे तसमा खापे के मन लागत हे। करिया तसमा ह ये बात बर बड़ सहयोग करथे के, आप जेला मन हे तेला देखव, टकटकी लगाके देखव, कोनो ल अजम नई होवय। येहू होथे के चारो मुड़ा के जनता समझथें के तसमा वाले मोहिच ल देखते हे। तेखरे सेती साहेब सहुबा मन करिया तसमा पहिरथें ताकि भरम बने रहय। सियान मन कथें के आंखी-आंखी म घलव गोठ होथे, त अइसन म काखरो आंखी के सामना नइ करना हे तभो तसमा खाप ले जाथे। कखरो आंखी आ जाथे, काखरो ओज परताप ल आंखी सहे नइ पाय, जियानथे तभो तसमा ल खापे जाथे। तसमा के अड़बड़ गुन हे का का ल बतावंव, तसमा वाले साहेब तसमा खाप के किस्सा बन गे। बने होईस, मोर हिसाब ले सरकार ल तसमा के बिरोध करे के बजाए जमो साहेब मन बर तसमा ल जरूरी कर देना चाही नई तो समें बेसमय इमन सरकार ल आंखी देखाहीं। अउ सरकार ल तस्‍मा खापे बर पर जाही।
ये हप्ता सरकार अपन मंत्रीमंडल के विस्ताेर करें हावय। जमो समाज ल संग लेवत प्रदेश के मुख्य मंत्री डॉ.रमन सिंह ह छत्ती‍सगढ़ के असल सियान होए के अपन रूप ल देखा देहे हे। नवा मुख्तियारी म हमर संस्कृंति के सियान नवागढ़ मारो के दयाल दास बघेल जी हो गए हवंय। अब कईयेन झन साहेब सुहिबा मन के चलत उपरसस्सु थोरकुन थंमें हवय। सुने हावन के, पाछू हप्ता तक मंत्री महोदय के घर के काड़ म डोरीच-डोरी बंधाए रहय, डोरी मन साहेब बने मनखे ल उल्टा लटके के अगोरा करत रहंय। अउ मनखे मन डेरावत रहंय के कब उंखर गोड़ बंधा जाही, वोमन लटक जाहीं। अब सब हरहिंछा हो गए होहीं, नवां मंत्री जी के संग चले बर, साहेब के संगें संग परे डरे मनखे मन के घलव उदीम अब चालू हो जाही। उंखर लहर म कतकोन सपटा मन फुलहीं फरहीं अउ हरियांहीं। मंत्री जी के हिरदे म छलकत गंगा म नवा-जुन्ना खांटी पापी, धरमी सबे मन घलव तरहीं। सबे के हित होवय, फेर नवां मंत्री ले आस हे के उमन, बाबा घासीदास के सत के प्रतीक गिरोदपुरी के जैत खाम के सुध अब धरहीं अउ उही ल सुम्मेत के सरग निसेनी बनाहीं।

-संजीव तिवारी
संपादक : गुरतुर गोठ डॉट कॉम

संपादकीय : का तैं मोला मोहनी डार दिये

Sanjeevaसंगी हो देखते देखत हमर साहित्य के भण्डार बाढ़त जावत हे। हमर सियान अउ हमर भाखा के परेमी गुनीक मन छत्तीसगढ़ी भाखा ल संविधान के आठवीं अनुसूची म लाए खातिर अपन-अपन डहर ले उदीम म लगे हन। सांसा ले आसा हवय, आज नहीं त काली हमर गोहार ल संसद ह सुनही अउ हमर भाखा संविधान के आठवीं अनुसुची म दरज होही।

छत्तीसगढ़ी पद्य साहित्य म छंद बंधना म कसे रचना बीच के समे म कमती हो गए रहिसे। ये कमी ल जन कवि कोदूराम दलित जी के बेटा अरूण कुमार निगम अउ युवा भाई रमेश कुमार सिंह चौहान जइसे मन पूरा करत हें।छत्तीसगढ़ी पद्य म उंखर योगदान आघू के समें म एक मील के पथरा बनही। भाई रमेश ह हिन्दी के छंद अनुसारसन म कसे सुघ्घर गीत लिखत हंवय, बेरा बेरा म उंखर छंद हम इंहा प्रस्तुत करथन। ये हप्ता हम उंखर रोला छंद के गीत ‘कहां मनखे गंवागे’ देवत हन। अभी के जमाना म नंदावत मानवता ल देख के कवि अदभुत कल्पना करे हवंय। प्रतीक अउ बिम्ब के सहारे कवि मनखे ल जंगल झाड़ी म खोजत हे तभो मनखे नइ मिलते हे।

पाछू कुछ हप्ता ले हमला वरिष्ठ साहित्यकार गजानन प्रसाद देवांगन के साहित्य सरलग मिलते हे अउ हम ओला बड़ आदर ले गुरतुर गोठ म छापत हावन, ये हप्ता उंखर कविता छत्तीसगढ़ी ल लगावत हवन जेमा मया पलपलाए हमर दाई भाखा के महिमा के सुघ्घर गुनगान हवय। ये हप्ता के पद्य म भाई महेन्द्र देवांगन ‘माटी’ के गीत भुंइया के भगवान, छत्तीसगढ़ के किसान अउ श्रीमती प्रिया देवांगन के कविता अक्षर दीप जलाबो संग हेमलाल साहू अउ विजेन्द्र कुमार वर्मा के रचना घलो गुरतुर गोठ के सोभा बढ़ावत हे। ये हप्ता छुरा के भाई हरिशंकर गजानन्द प्रसाद देवांगन ह 10 मई के बट सावित्री के उपास के अवसर म समाज के बिदरूपता अउ बिसंगति उपर चोट करत एक व्यंग्य कथा तको लगे हे, जेमा नारी ह अब के सत्यवान ल खोजत हे।

ये हप्ता हम आप मन बर पाछू हप्ता ले सरलग चलत भाई भुवन लाल कोसरिया के बाबा धासीदास जी के जीवन वृत्तांत के तीन कड़ी देवत हन. भाई भुवन लाल जी ह बहुत सुघ्घर अउ रोचक ढ़ग ले बाबा के जीवनी ल ये वृत्तांत मन म लिखे हवय। छत्तीसगढ़ी साहित्य के सोरियईया गुनी मन ल ये वृत्तांत ल पढ़ के ओखर उपर अपन विचार खच्चित देना चाही। जेखर ले नवा रचनाकार मन ल पंदोली मिलही अउ उंखर लेखनी ल सियान मन के राय ले सुधरही।

पाछू इतवार के दिन बड़का लोक कलाकार अउ प्रसिद्ध कबीर भजन गायक भाई नवलदास मानिकपुरी जी के संस्था मोर गवंई गांव ह एक आयोजन भिलाई म करिस। आयोजन के पहिली सत्र म ‘छत्तीसगढ़ी के पहिली कवि धनी धरमदास’ के व्यक्तित्व अउ कृतित्व उपर परिचर्चा रहिस जेमा सांस्कृतिक एवं साहित्यिक मंच मुजगहन के अध्यक्ष डूमन लाल ध्रुव, लोककला अउ साहित्यिक संस्था चिन्हारी के अध्यक्ष अउ हरिभूमि चौपाल के संपादक दीनदयाल साहू, वरिष्ठ साहित्यकार फुलचंद साहू जी मन अपन बिचार रखिन। कार्यक्रम म महू ल गोठियाये के अवसर मिलिस। धनी धरमदास के बारे म किताब पोथी ल टमडेंव अउ अपन कमती गियान के अधार म दू सबद मैं गोठियायेंव अउ सियान मन के ये बिसय म गोठ ल सुन के गठियायेंव। ये बिसय म येखर पाछू अउ सियान मन मेर मोर गोठ बात होईय त मोर भरम अउ बाढ़ गए। कोनो सियान गुनी मन कहिथें के धनी धरमदास के साहित्य म छत्तीसगढ़ी के पुट मिलथे, ओखर रचना ल छत्तीसगढ़ी के पहिली कविता माने जा सकथे। कोनो सियान गुनी मन कहिथें के धनी धरमदास छत्तीसगढ़ी के पहिली कवि नो हय, उंखर कविता म जउन छत्तीसगढ़ी सबद मिलथे तउन पाछू समें म जोड़ देहे गए हे।मने ये बिसे म गुनी मन एक मत नइ हें।

अइसन लिख के मैं हमर माई सियान मन के महत्व अउ ज्ञान ल कम आंकत नइ हंव। उंखर बगराए अंजोरे ले आज हमर भाखा के साहित्य के अखण्ड जोत परखर अंजोर करत हे। फेर मोर इहू कहना हे के छत्तीसगढ़ी साहित्य के तथ्य अउ मानक के संबंध म छत्तीसगढ़ के विश्वविद्यालयीन सोध अउ सियान मन के लेखनी ल अंतिम साक्छ अउ प्रमाण माने के बजाए उंखर खोज बीन जरूर करव।खोज बीन ले जइसे जइसे हमला तथ्य अउ जानकारी मिलही हम अपन बिचार घलव बदलबोन।लोगन ल कहन दे, अभी तो हम सीखत हन, येमा हम जकहा नइ हो जान। ये हमर ज्ञान अउ विवेक के विकास के सिढिया होही।संदर्भ किताब मन के सहारे ज्ञान बघारे के पहिली हमला अपन ज्ञान ल भूंजना चाही, अच्छा मद्धिम आंच म तभे साहित्य के गोंदा फूल के मोहनी असर करही।

संजीव तिवारी
संपादक

मेकराजाला म बाढ़य हमर भाखा के साहित्य : राजभाषा आयोग देवय पंदोली

Chhattisgarhiya1संगी हो हमर धान के खेत लहलहावत हावय अउ हमर मिहनत के फल अब हमर कोठार तहॉं ले कोठी म समाये के अगोरा देखत हावय. महामाई के सेवा हम पाछू नौ दिन ले हिरदे ले करेन, राम लीला म हमर लइका मन ला पाठ करत रहिता कुन देखेन अउ हिरदे म रामचरित मानस के सीख ला गठरी कस बांध लेहेन. आज दसेला तिहार म हम सब के मन म कलेचुप बईठे रावन ला बारे के पारी हे. आवव हम अपन खातिर, अपन परिवार अउ समाज के खातिर ये रावन के भूर्री बारन. हमर प्रदेश के खुशहाली बर अपन मिहनत गारन, अपन भीतर के मनखे ला जगा के हमर प्रदेश म होवइया चुनाव म सत के अमरित धार बोहवइया हमर माई मूड़ मन ला चुनन. जइसे हम अपन तिहार मन ला सब जुर मिल के मनाथन, तइसनेहे ये तिहार बर घलव चेत करन. देख सुन अउ समझ के अपन नेता चुनन.

संगी हो, पाछू चौमासा म हमर भाषा के उन्नती बर अड़बड़ उदीम होइस. राजभाषा आयोग ह बड़का बड़का कार्यक्रम करिस. पं.रविशंकर विश्वविद्यालय ह हमर भाषा म एम.ए. के पढ़ई चालू करिस अउ हमर लइका मन बड़ उछाह ले येमा भरती लीन. विश्वविद्यालय ह भाषा के मानकीकरन बर एक हप्ता ले गोठ बात घलो आयोजित करिस. ये सब के फल का मिलिस तउन समय म आघू आही, फेर अतका खच्चित हे कि ये सब उदीम ले हमर भाखा के गोठ घेरी बेरी समाचार म आइस तेखर ले हमर भाखा के संगें संग हमर मान घलव बाढ़िस. इही चौमासा म हमर ये गुरतुर गोठ के उदीम के बारे म घलव लोगन मन जानिस अउ हमर ये मेकराजाला के पतरिका ला झंकइया, पढ़इया बाढ़िस. हमर भाखा म सोध करइया, लेख लिखइया मन बर अब इंटरनेट म गुरतुर गोठ ह एक असल ठिकाना हो गे हे.

हम अब ये चाहत हन के गुरतुर गोठ म छत्तीसगढ़ी भाखा के महाविद्यालयीन पढ़ई अउ सोध के लइक रचना मन के संग्रह होवय. जेखर ले हमर भाखा उप्पर काम करइया हमर आघू के पीढ़ी ला पंदोली मिलय. ये खातिर आप सब मेरन ले हमर गिलौली हे के अपन कम से कम एक ठन माइ रचना ला गुरतुर गोठ म परकासित करे के अनुमति देवत भेजव. हम अपन सीमित संसाधन के संग आपके रचना ला येमा सामिल जरूर करबोन. हमर मेरन अभी सब ले बड़े समस्या रचना मन के स्कैन अउ टाईपिंग के हावय ये काम म हमला एक पाना के अंदाजन पांच रूपिया लागथे. आप मन कहूॅं अपन रचना ला कम्प्यूटर टाईप नई तो स्कैन करा के हमला भेजहू त हमर से खर्चा अउ येखर उदीम बर दउंड भाग ह बांचही जेखर ले हम लउहे लउहे गुरतुर गोठ म छत्तीसगढ़ी भाखा के साहित्य ला आघू ला सकबोन.

मेकराजाला म हमर साहित्य ल सुलभ कराए म हमर राजभाषा आयोग घलव बड़ योगदान दे सकत हावय. हमला भान हावय के आयोग, सरकार के खींचे डांड के भीतरेच काम कर सकत हावय, ओखर हाथ बंधाए रहिथे फेर साहित्य ला इंटरनेट म लाए खातिर एक जब्बर काम उमन कर सकत हावयं. राजभाषा आयोग ह अभी साहित्यकार मन के किताब छापे बर दस हजार रूपिया के सहजोग करत हावय, आयोग ले हम बिनती करत हावन के ये सहजोग के संगें संग आयोग उन किताब मन के साफ्ट कापी पीडीएफ नई तो टेक्स्ट रूप म मांगय अउ ओला आयोग के वेब साईट म प्रकासित कर दय. येखर से मेकराजाला म हमर भाखा के साहित्य के भंडार धीरे धीरे बाढ़त जाही.

हमर जम्मो छत्तीसगढ़िया संगी मन ला दसेला अउ देवारी तिहार के गाड़ा गाड़ा बधई.

संजीव तिवारी
संपादक

रचना भेजईया मन बर गोठ

  • GGगुरतुर गोठ म प्रकाशन करे खातिर हर किसम के छत्तीसगढ़ी रचना मन के स्वागत हावय. अपन अउ अपन रचनाकार संगी मन के रचना मन ला हिन्दी के फ़ॉन्ट कृतिदेव, श्रीलिपि, चाणक्‍य, या कोनो आन फ़ॉन्ट म एमएस वर्ड फ़ाइल के रूप म, फोंट के नाव बतावत ई-मेल ले हमला भेज सकत हावव. रचना एके ठन फोंट म होवय, आने आने फोंट के घेरी बेरी उपयोग झन करव. पूरा पुस्तक कहूं स्कैन कर के भेजना चाहत होहव त पुस्तक ला ३०० ले कम रेजलूसन म लाइनवार पाना एके ठन फाइल म पीडीएफ बना के भेजव. अलग अलग पाना के अलग अलग फाइल बना के भेजे ले पुस्तक के एक पीडीएफ फाइल बनाए म हमला बड़ मेहनत लागथे. रचना मन ला ईमेल ले भेजई नइ हो पावत होवय त कोनो कम्प्यूटर दुकान म टाइप करवा के नइ तो स्कैन कराके ओखर सीडी हमला भेज सकत हावव, सीडी बनवाए के पहिली कम्प्यूटर दुकान वाले ला ये गोठ ला पढ़वा दव त बने बनही. कहूं आप इंहा देहे पाना ले जुन्ना फोंट ले यूनीकोड़ बदल सकव त अउ सुघ्घर बात होही.

    • संगी मन सुरता राखव: गुरतुर गोठ के ये प्रकाशन अवैतनिक अउ अव्यावसायिक करे जात हावय तेखर सेती रचना मन के प्रकाशन के पाछू कउनों मानदेय/रायल्टी देवइ संभव नइ हे. हमर उदीम ये हावय के छत्‍तीसगढ़ी भाषा के रचना मन इंटरनेट के माध्यम ले जन जन बर सुलभ हों जावय. हमर ये उदीम सिरिफ हमर भाषा बर हमर परेम आए, ये सिरतोन आए के ये कउनो बड़का बुता नो हय, ये काम ल तो आपके नौकर चाकर अउ नान्‍हें लोगन मन घलव कर सकत हांवय.

      • इंटरनेट नइ तो अपन ब्लॉग म पहिली ले प्रकाशित रचना मन ला दूबारा गुरतुर गोठ म प्रकाशित करे के कउनो अरथ नइ हे, तेखर सेती आपले गिलौली हावय के अइसन रचना मन ला झन भेजहू.

        • गुरतुर गोठ बर संगी मन के छत्तीसगढी रचना, आडियो, वीडियो के अगोरा हावय, आप अपन रचना के सीडी हमला भेज सकत हावव, सीडी ला आप हमला मेल घलव कर सकत हावव.

          बुधराम यादव, वरिष्ठ संपादक
          संजीव तिवारी, संपादक

          संपादकीय कार्यालय :
          सूर्योदय नगर, खण्डेलवाल कालोनी
          दुर्ग, छत्तीसगढ 491001.

        हिन्‍दी रचनाकार संगी मन, हमर छत्‍तीसगढि़या बड़े भाई रविशंकर श्रीवास्‍तव जी के उदीम रचनाकार म अपन हिन्‍दी रचना भेज सकत हावव.

मेकराजाला म चार बरिस के गुरतुर गोठ : दू आखर

आजे के दिन गांधी बबा के सुरता म सन् 2008 ले चालू हमर ये मेकराजाला के गुरतुर गोठ ह आज चार बरिस के होगे हावय. आप जम्मो संगी मन हमला अड़बड़ मया देहेव अउ आप मन के दुलार ले, हमन जइसे तईसे हमर भाषा के रचना मन ला इंहा सकेल के आप मन बर अउ आघू के दिनन बर, सकेल के राखे के उदीम करेन.

आज हमला खुसी हावय के हम बिना सरकारी पंदोली के पांच साल ले ये वेब साईट ला तुनत तानत, येमा रचना के भण्डार धीरे धीरे भरत रहेन. हमर अज्ञानता के कारन कई पईत ले हमर ये साईट म परलोखिया मन सेंध मारिन अउ हमर मेहनत ला गारद करिन. जेमा हमर रचनाकार संगी मन के चार पांच सैकड़ा रचना इंहा ले मेटर गए. तभो ले हम कलेचुप अपन काम करत रहेन. अपन पेट रोजी अउ परिवार के बोझा के संगें संग मेकराजाला म अलग अलग मेड़ो म काम करई म हमला सरलग मेहनत लागथे. मन कई पईत ले खिन्न हो जाथे के गुरतुरगोठ के ये उदीम के कोनो मतलब घलव हावय के नहीं, फेर एक्को संगी के मया कहूं मिलथे तहां ले फेर नारी म उछाह आ जाथे.

हिन्दी ब्लॉग के दुनिया म छत्तीसगढ़ी के परचम फहरावत हावय फेर हमरे प्रदेश म हमर भाषा के ब्लॉग अउ वेब पोर्टल के कोनों चिन्हारी करईया नई हे. हो सकत हावय के हमर ये उदीम आज अबिरथा माने जावत होही फेर हमला चिटिकन भरोसा हावय के आघू के समें म हमर भाषा बर ये लगाए लूकी ह मेकराजाला म बने परखर अंजोर बगराही. छत्तीसगढ़िया संगी मन हमर इही ठिकाना म सरलग अपन रचना भेजहीं नहीं त अपन भाषा के घलव ब्लॉग बनाहीं अउ धीरे धीरे मेकराजाला म हमर भाषा हा पोठ होत जाही. गुरतुर गोठ आप जम्मो छत्तीसगढ़िया संगी मन मेर गोहार लगावत हावय के हमर भाषा के कोठी ला भरव, फेसबुक अउ ब्लॉग म छत्तीसगढ़ी भाषा के जादा ले जादा प्रयोग करव.

गुरतुर गोठ बर आप सबके मया पिरीत पा के वरिष्ठ संपादक सुकवि बुधराम यादव संग मैं संजीव तिवारी आप जम्मों संगवारी ला धन्यवाद देवत हांवव. अइसनेहे असीस बनाए राखहू. जय छत्तीसगढ़ जय भारत.

दू आखर

मयारू संगी, हमर गुरतुर गोठ ह आज गांधी बबा अउ सास्‍त्री जी के जयंती के दिन अपन एक बरछ पूरा कर लीस. ये एक बरिस म हम अपन गुरतुर गोठ ला अपन मन म संजोये सपना असन तो पूरा नई कर पायेन. फेर संगी मन के सहजोग ले सरलग आघू बढत रहेन. आप मन हमर संग, हमर भाखा के संग इही बहाना जुडे रेहेव, हमर उत्‍साह ला बढावत रेहेव. येखर बर हम आप मन के हिरदे ले आभारी हांवन.
हमर ये प्रयास आप सब के सहयोग ले ही सफल हो पाही काबर कि विकास चाहे आदमी के होवय या समाज के, सब लोगन के आपस में जुर मिल के, सुंता ले, अपन अपन अनुभव अउ विचार ला एकदूसर ले बांटे ले ही धीरे धीरे संभव हो पाथे । हमर अकेला के सुन्‍दर ले सुन्‍दर सोंच, चिंतन कतको उंचा दरजा के काबर नई होवय, वो ह समाज के विकास बर रद्दा नइ गढ सकय ।

जईसे-तईसे हम एक बरिस ले आप मन के हिरदे म बसे भाखा ला आप मन तीर लेजे के परयास करत रहेन. हमर सपना आज नहीं त काल जरूर पूरा होही. हमर आदरनीय वरिस्‍ठ संपादक सुकवि बुधराम यादव जी के संउपे बाना ला हम बने सहिन नई सम्‍हाल पायेन फेर हम बाना ला उतारेन घलव नहीं. आपमन भरोसा राखव हम धीरे-बांधे अपन काम करत रहिबोन, आपमन के असीस संग रहय.

महानदी ,इन्द्रावती , शिवनाथ , हसदो, मांड , केलो , सोंढूर, अरपा, पैरी के कछार के कलमकार, सरसती दाई के छत्तीसगढ़ बेटवा बेटी मन ले गाड़ा भर भरोस अउ कांवर भर आसरा हावय के अपन बिबिध बिधा के लेखा , कबिता ,गीत , गजल , कहनी , किस्सा, लोकगाथा, उपन्यास , नाटक , जमो ले “गुरतुर गोठ” के भंडार ला छलकत ले भरे के उद्दिम मा तन मन ले लागे रईंही . बिना ढेरियाये, बिना उबियाये अउ बिना दुरिहाये.

संगी समीर यादव जी, दीपक शर्मा जी, युवराज गजपाल जी, ललित शर्मा जी अपन व्‍यस्‍तता के बाद घलव गुरतुर गोठ ला अपन-अपन कोती ले जउन सहजोग देइन अउ देवत आवत हें, तउन मन ला. अउ हमर अइनहे कतको संगी जेमन हमर ये पतरा म आके हमर मेर गोठ बात करिन अउ हमर भाखा के रचना मन ला पढिन. अइसे जम्‍मो संगी मन ले मिले ये मया के हम हिरदे ले आभारी हावन.

मयारू संगी, आपमन के परेम असनेहे बने राहाय, हमर भाखा के सोर चारो कोस उडत रहय.
जय भारत, जय छत्‍तीसगढ.