भूमिका भोलापुर के कहानी : उपन्यास के सुवाद वाला कहानी संग्रह डॉ. जीवन यदु चाहे संस्कृत भासा होय के चाहे हिन्दी भासा होय – कविता के रचना पहिली होइस। पाछू कहिनी-लेख-नाटक लिखे गे हे। संस्कृत म त आने-आने गियान के पोथी मन ल घलो कविता म लिखे के परंपरा रहिस। बइद-गुनिया मन के ग्रंथ ल कविच मन ह उल्था करंय, हाथ-नारी देखांय, जड़ी-बुटी घला बतावंय। तउने सेती बइदराज मन ल जुन्ना जुग म कविराज घलो कहंय। छत्तीसगढ़ी भासा म कविता के लिखइ ह कहिनी ले पहिली होय हे। कविता के…
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गियान के जोत
पऊर साल मैं ह बालोद गे रहेंव। बालोद गेस त गंगा मइया के दरसन करना तो जरूरी हे। मैं ह ऊंहा दरसन करे बर आयेंव। मन खुस होगे एकदम खुल्ला जगह हे। बड़े जन अंगना देखके अइसे लगीस के थोरिक देर बइठ जाथंव। मैं ह अंगना के छांव म बइठ गेंव। थोरिक देर म तीन-चार झन माई लोगन अइन अऊ दरसन करके मोर तीर म बइठगे। ऊंखर बातचीत ले अइसे लगीस के वोमन लइकामन ल पढ़ाथें। मैं ह पूछ परेंव कहां पढ़ाथव। थोरक सांवर असन माई लोगन कहिस, मैं ह…
Read Moreरात कइसे बीतिस
एक झन जोगी बाबा ह घुमत फिरत एक शहर में पहुंचगे। रात होगे रहय अऊ जलकला के दिन रहय शहर के खरपाट ह चारो मुड़ा ले बंद होगे रहय। जोगी बाबा ल जाड़ लागीस। जाड़ में हाथ गोड़ ह कांपत रहय। गरम कपड़ा धरे नई रहय। सुते बइथे बर जगा खोजीस उही कर भट्ठी चुलहा रहय। जोगी बाबा ह ऊंहा जाके खुसरगे बने रुसुम-रुसुम लागीस। तहन नींद ह परगे। बिहनिया होइस तहन नींद ह खुलगे। बाजू में राजा के महल रहय। राजा के नींद खुलीस तहन राजा ह अपन संगी…
Read Moreलालच के फल
एक गांव म एक झन मरार डोकरा अउ मरारिन डोकरी रिहिस। दूनों झन बखरी म साग-भाजी बोय अउ बेंचे। मरार डोकरा ह रोज बखरी ल राखे बर जाय। इन्द्र के घोड़ा ह डोकरा के बखरी म रात के बारा बजे रोज आय अउ साग-भाजी ल चर देय। मरार डोकरा अपन डोकरी ल बताथे काकर गरवा ह आथे वो अउ बखरी ल चर के चल देथे। मेहर पार नइ पावौ, डोकरी कथे- डोकरा तैंहर आज दिनभर अउ रात भर बखरी म रबे। डोकरा हव काहत बखरी म चल देथे। रात के…
Read Moreजलदेवती मैय्या के वरदान
एक गांव म एक साहूकार रहय। साहूकार के सोला साल के सज्ञान बेटी रहय। साहूकार के पूरा परिवार धार्मिक रहय। साहूकार के दुवारी मं आय कोन्हो मंगनजोगी कभु दुच्छा हाथ नई जाय। भूखन ला भोजन देना, पियासे ला पानी पिलाना अउ भटके ला रस्ता बताना साहूकार के परिवार अपन धरम समझे। साहूकार के बेटी निसदिन अपन कुल देवता के पूजा पाठ करके दान पुण्य करे। कुछ दिन बाद लड़की के बिहाव दूसर राज के साहूकार के लड़का संग होगे। ससुरार जाय के पहिली लड़की ह मन लगाके कुल देवता के…
Read Moreसुक्खा तरिया म पानी
गांव म पहली पानी बिना अकाल परय। जेमा आदमी मन भूख के मारे मरयं। बिना भात-बासी के शरीर एकदम कमजोर हो जाय, जेकर ले आदमी तड़प-तड़प के मर जाय। दुकलहा समय के एक झन सीताराम नाव के डोकरा रहय थोरकिन पढ़े-लिखे रहिसे। सब अपन हालत ल जानत रहिसे दुकाल के दीन ल। एक दिन ये बबा हर बइठक जुरे रहै ते मेरा जाके कइथे-थोरकिन मोरो गोठ ल सुन लेतव जी। महाबीर नाव के एक झन कड़कनहा आदमी हर कइथे- का हो ही बबा! काय गोठे तेन ल बता। बबा सीताराम…
Read Moreफरहार के लुगरा अउ रतिहा के झगरा
एक बार वर्मा जी के घर गे रेहेंव। वर्मा जी ह अपन सबो लइका मन बर एके रंग के कुरता अउ एके रंग के पेंठ बनवा दे राहय। देवारी के भीड़ में भी वर्मा जी के लइका मन कलर कोड से चिनहारी आवय। अइसे लगय जइसे सबो झन एके इसकूल के पढ़इया लइका आयं। मैं देखेंव तब मोर मन परसन्न हो गे। उही दिन ले मैं सोचे रेहेंव कि इही परयोग ल मैं अपनों घर दुहराहूं। आसो के तीजा में सबो बहिनी मोरे घर अवइया रिहिन। तीजा माने बहिनी, भांचा-भांची…
Read Moreटेंशन वाली केंवटिंन दाई 1
केंवटिन धमतरी राजिम के गाड़ी तीर धमतरी टेसन म चना मुर्रा बेचय। पचास साल ले टेशन मास्टर रहे बंगाली बाबू एक दिन अइस अऊ केंवटिन ल रयपुर घुमाय बर गाड़ी म बइठार के लान लिस। केंवटिन के पहिली बेर गाड़ी म बइठे अउ घूमेके अनुभव ले पढ़व।‘ए दाई भालो आहे।’‘अरे बंगाली बाबू, भालो हे, सुग्घर हे। रिटायर होएके बड़ दिन बाद बाबू तोला इंहा के सुरता आइस। तोर बाल, बच्चा मन कहां रथें, अउ तैं कहां रथस।’ छोटे रउल लाइन के धमतरी टेसन म चना मुर्रा, लाड़ू बेचवइया केंवटिन दाई…
Read Moreसच्चा चेला
सुन्दरपुर म एक झन बहुत बढ़िया साधु रहय। जेन हर रोज भगवान भक्ति म लीन रहय। येकर कुटिया म बहुत झन चेला रहय जेन मन अपन गुरुजी के बताय मार्ग, रस्ता म रेंगय। इही म एक झन किरपाल नाम के चेला रहीस। तेन हर अपन गुरुजी के संझा बिहनिया पांव परय अउ हर कहना ल मानय। एक दिन गुरुजी हर अपन सब चेला ल उंकर-उंकर लईक काम बताईस। सब चेला अपन-अपन काम म चल दीन। बाच गीस किरपाल हर तेन ल गुरुजी हर कइथे- बेटा किरपाल तैं आज सुख्खा-सुख्खा लकड़ी…
Read Moreबांझ के पीरा-बांझ के सुख
लघुकथा‘तें मोला टूरा-टूरी नइ देस ना सुन्दरी, मे दूसर बिहाव करहूं तें मोला दोसदार मत कबे, काबर नी देत हस मोला तेंहा टूरा-टूरी। दू बच्छर ले जादा होगे फेर तोर पांव भारी नी होवत हे।’ भुलऊ ह अपन सुन्दरी नाम के गोसइन ल धमका के काहत राहय।‘मोर किस्मते मा नइ हे तेला का करहूं, तोला भारी पांव वाली गोसइन लाना हे ते ले आ, मोला कुछु नी कहना हे।’ सुन्दरी ताना ल सुन के फैसला सुना दीस।‘भुलऊ ल मौउका मिलिस। तहां ले राम्हीन ला बना के ले अइस जेन साल…
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