झरथे झरना झरझर झरझर,पुरवाही मा नाचे पात। ऊँच ऊँच बड़ पेड़ खड़े हे,कटथे जिंहा मोर दिन रात। पाना डारा काँदा कूसा, हरे हमर मेवा मिष्ठान। जंगल झाड़ी ठियाँ ठिकाना,लगथे मोला सरग समान। कोसा लासा मधुरस चाही,नइ चाही मोला धन सोन। तेंदू पाना चार चिरौंजी,संगी मोर साल सइगोन। घर के बाहिर हाथी घूमे,बघवा भलवा बड़ गुर्राय। आँखी फाड़े चील देखथे,लगे काखरो मोला हाय। छोट मोट दुख मा घबराके,जिवरा नइ जावै गा काँप। रोज भेंट होथे बघवा ले, कभू संग सुत जाथे साँप। लड़े काल ले करिया काया,सूरुज मारे कइसे बान। झुँझकुर…
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छत्तीसगढ़ी गद्य में छंद प्रयोग
छत्तीसगढ़ के वीर बेटा – आल्हा छंद
महतारी के रक्षा खातिर,धरे हवँव मैं मन मा रेंध। खड़े हवँव मैं छाती ताने,बइरी मारे कइसे सेंध। मोला झन तैं छोट समझबे,अपन राज के मैंहा वीर। अब्बड़ ताकत बाँह भरे हे , रख देहूँ बइरी ला चीर। तन ला मोर करे लोहाटी ,पसिया चटनी बासी नून। बइरी मन ला देख देख के,बड़ उफान मारे गा खून। नाँगर मूठ कुदारी धरधर , पथना कस होगे हे हाथ। अबड़ जबर कतको हरहा ला,पहिराये हँव मैंहा नाथ। कते खेत के तैं मुरई रे, ते का लेबे मोला जीत। परही मुटका कसके तोला,छिन मा…
Read Moreहमर बहू – विष्णु पद छंद
कहाँ जात हस आतो भैया,ले ले सोर पता। अब्बड़ दिन मा भेंट होय हे,का हे हाल बता। घर परिवार बहू बेटा मन,कहाँ कहाँ रहिथें। नाती नतनिन होंही जेमन,बबा बबा कहिथें। अपन कहौ हमरो कुछ सुनलौ,थोकुन बइठ जहू। बड़ सतवंतिन आज्ञाकारी,हमरो हवय बहू। बड़े बिहनहा सबले पहिली,भुँइ मा पग धरथे। घर अँगना के साफ सफाई,नितदिन हे करथे। नहा खोर के पूजा करथे,हमर पाँव परथे। मन मा सुग्घर भाव जगाथे,पीरा ला हरथे। हमर सबो के जागत जागत,चूल्हा आग बरे। दुसरइया तब हमर तीर मा,आथे चाय धरे। पानी गरम नहाये खातिर,मन चाहा मिलथे।…
Read Moreछन्न पकैया : पकैया छ्न्द
छन्न पकैया छन्न पकैया,पक्का हम अपनाबो नइ लेवन अब चीनी राख़ी,देशी राखी लाबो। छन्न पकैया छन्न पकैया,बहिनी आँसों आबे। हमर देश के रेशम डोरी,सुग्घर तैं पहिराबे। छन्न पकैया छन्न पकैया,चीनी झालर टारव झन लेवव जी उँकर माल ला,माटी दीया बारव। छन्न पकैया छन्न पकैया,झगरा चीन ल प्यारा हिन्दी चीनी भाई भाई,झूठा हावय नारा। छन्न पकैया छन्न पकैया,चीनी कपड़ा छोड़व। पहिनव सुग्घर सूती कपड़ा,गरब चीन के टोरव। अजय अमृतांशु भाटापारा
Read Moreकान्हा मोला बनादे : सार छंद
पाँख मयूँरा मूड़ चढ़ादे,काजर गाल लगादे| हाथ थमादे बँसुरी दाई,मोला किसन बनादे | बाँध कमर मा करधन मोरे,बाँध मूड़ मा पागा| हाथ अरो दे करिया चूड़ा,बाँध गला मा धागा| चंदन टीका माथ लगादे ,ले दे माला मूँदी| फूल मोंगरा के गजरा ला ,मोर बाँध दे चूँदी| हार गला बर लान बनादे,दसमत लाली लाली | घींव लेवना चाँट चाँट के,खाहूँ थाली थाली | दूध दहीं ला पीयत जाहूँ,बंसी बइठ बजाहूँ| तेंदू लउड़ी हाथ थमादे,गाय चराके आहूँ| महानदी पैरी जस यमुना ,कदम्ब कस बर पीपर | गोकुल कस सब गाँव गली हे…
Read Moreभोले बाबा : सार छंद
डोल डोल के डारा पाना ,भोला के गुन गाथे। गरज गरज के बरस बरस के,सावन जब जब आथे। सोमवार के दिन सावन मा,फूल दूब सब खोजे। मंदिर मा भगतन जुरियाथे,संझा बिहना रोजे। कोनो धरे फूल दसमत के ,केसरिया ला कोनो। दूबी चाँउर छीत छीत के,हाथ ला जोड़े दोनो। बम बम भोला गाथे भगतन,धरे खाँध मा काँवर। भोला के मंदिर मा जाके,घूमय आँवर भाँवर। बेल पान अउ चना दार धर,चल शिव मंदिर जाबों। माथ नवाबों फूल चढ़ाबों ,मन चाही फल पाबों। लोटा लोटा दूध चढ़ाबों ,लोटा लोटा पानी। सँवारही भोले बाबा…
Read Moreबरसात : गीतिका छंद
आज बादर बड़ बरसही,जाम कस करियाय हे। नाच के गाके मँयूरा ,नीर ला परघाय हे। भर जही अब ताल डबरी,एक होही खोंचका। दिन किसानी के हबरही, मन भरे ये सोच गा। ढोड़िया धमना ह भागे,ए मुड़ा ले वो मुड़ा। साँप बिच्छू घर म घूँसे,डर हवय चारो मुड़ा। बड़ चमकथे बड़ गरजथे,देख ले आगास ला। धर तभो नाँगर किसन्हा ,खेत रचथे रास ला। देख डबरा भीतरी ले, बोलथे बड़ मेचका। ढेंखरा उप्पर चढ़े हे , डोलथे बड़ टेटका। खोंधरा जाला उझरगे,रोत हावय मेकरा। टाँग डाढ़ा रेंगथे जी,चाब देथे केकरा। तीर मा…
Read Moreसावन बइरी (सार छंद)
चमक चमक के गरज गरज के, बरस बरस के आथे। बादर बइरी सावन महिना, मोला बड़ बिजराथे। काटे नहीं कटे दिन रतिहा, छिन छिन लगथे भारी। सुरुर सुरुर चलके पुरवइया, देथे मोला गारी। रहि रहि के रोवावत रहिथे, बइरी सावन आके। हाँस हाँस के नाचत रहिथे, डार पान बिजराके। पूरा छंद ये कड़ी म पढ़व..
Read Moreखुमरी : सरसी छंद
बबा बनाये खुमरी घर मा,काट काट के बाँस। झिमिर झिमिर जब बरसे पानी,मूड़ मड़ाये हाँस। ओढ़े खुमरी करे बिसासी,नाँगर बइला फाँद। खेत खार ला घूमे मन भर,हेरे दूबी काँद। खुमरी ओढ़े चरवाहा हा, बँसुरी गजब बजाय। बरदी के सब गाय गरू ला,लानय खार चराय। छोट मँझोलन बड़का खुमरी,कई किसम के होय। पानी बादर के दिन मा सब,ओढ़े काम सिधोय। धीरे धीरे कम होवत हे,खुमरी के अब माँग। रेनकोट सब पहिरे घूमे, कोनो छत्ता टाँग। खुमरी मोरा के दिन गय अब,होवत हे बस बात। खुमरी मोरा मा असाड़ के,कटे नहीं दिन…
Read Moreयोग के दोहा
महिमा भारी योग के,करे रोग सब दूर। जेहर थोरिक ध्यान दे,नफा पाय भरपूर। थोरिक समय निकाल के,बइठव आँखी मूंद। योग ध्यान तन बर हवे,सँच मा अमरित बूंद। योग हरे जी साधना,साधे फल बड़ पाय। कतको दरद विकार ला,तन ले दूर भगाय। बइठव पलथी मार के,लेवव छोंड़व स्वॉस। राखव मन ला बाँध के,नवा जगावव आस। सबले बड़े मसीन तन,नितदिन करलव योग। तन ले दुरिहा भागही,बड़े बड़े सब रोग। चलव साथ एखर सबे,सखा योग ला मान। स्वस्थ रही तन मन तभे,करलव योगा ध्यान। जीतेन्द्र वर्मा “खैरझिटिया” बाल्को (कोरबा)
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