Category: Shabdkosh

प्रयोजनमूलक छत्तीसगढ़ी की शब्दावली – विभक्तियाँ

छत्तीसगढी की विभक्तियाँ :-
छत्तीसगढ़ी में विभक्तियों के लिए निम्न प्रकार शब्द प्रयुक्त होते हैं –
मैं हर (मैं ने)
हमन (हम ने )
ओहर (उसने)
ओमन (उन्होंने /उन लोगों ने)
मोला (मुझे / मुझ को)
हमन ला (हमें / हम लोगों को)
तोला (तुम्हें / तुम को)
तुमन ला (आप लोगों को)
ओला (उसे / उसको)
ओमन ला (उन्हें / उन लोगों को)

मोर ले (मुझ से)
हमन ले (हम से)
तोर ले (तुम से)
तुमन ले ले (आप लोगों से)
ओकर ले (उस से)
ओकर मन ले (उन लोगों से)
मोर बर (मेरे लिए)
हमन बर (हमारे लिए)
तोर बर (तुम्हारे लिए)
तुमन बर बर (आप लोगों के लिए)
ओकर बर (उसके लिए)
ओकर मन बर (उन लोगों के लिए)
मोर (मेरा)
हमर (हमारा)
तोर (तुम्हारा)
(आप लोगों का)

ओकर /ओखर (उसका /उसके /उसकी)
उन कर / उँखर (उनका /उनके / उनकी)
इकर(इसका / इसके / इसकी)
इंकर(इनका / इनके / इनकी)
एहे /ओहे (वो)
एति /ए लंग(इधर)
औओती /ओ लंग(उधर)
ए करा(यहाँ)
ओ करा,(वहाँ)
जिहाँ (जहाँ)
तिहाँ / तेति(तहाँ)
जइसे(जैसा)
तइसे(तैसा)
ओसने (वैसा)
कोन कोति (किधर)
कोन हर (किसने)
जेति (जिधर)
ओति (उधर)
ए, एहर (इसने),
ए मन (इन्होंने)

ओ / ओहर (उसने)
ओमन (उन्होंने)
जे बेरा (जब)
जोन हर (जिसने)
जोन हर (जो)
जइसे (यथा)
अउ (और / तथा)
बर (के लिए)- खाए बर (खाने के लिए), जाए बर (जाने के लिए)

शोधार्थी – राजेन्‍द्र कुमार काले, रायपुर. निदेशक – चित्‍तरंजन कर

प्रयोजनमूलक छत्तीसगढ़ी की शब्दावली – मुहावरे
प्रयोजनमूलक छत्तीसगढ़ी की शब्दावली – विभक्तियाँ
प्रयोजनमूलक छत्तीसगढ़ी की शब्दावली – अव्यय
प्रयोजनमूलक छत्तीसगढ़ी की शब्दावली – सर्वनाम
प्रयोजनमूलक छत्तीसगढ़ी की शब्दावली – आस्था, अंधविश्वास, बीमारियाँ
प्रयोजनमूलक छत्तीसगढ़ी की शब्दावली – वर्जनाएँ
प्रयोजनमूलक छत्तीसगढ़ी की शब्दावली – क्रिया
प्रयोजनमूलक छत्तीसगढ़ी की शब्दावली – गीत, नृत्य
प्रयोजनमूलक छत्तीसगढ़ी की शब्दावली – संस्कार

प्रयोजनमूलक छत्तीसगढ़ी की शब्दावली – अव्यय

छत्तीसगढ़ी के अव्यय –
समुच्चय बोधक अव्यय
संयोजक – अउ, अउर
मैं अउ तैं एके संग रहिबोन।
वियोजक – कि, ते
रामू जाहि कि तैं जाबे।
विरोधदर्शक = फेर, लेकिन
संग म लेग जा फेर देखे रहिबे।
परिणतिवाचक = तो, ते, ते पाय के, धन
बुधारू बकिस ते पाय के झगरा होगे।
दिन-रात कमइस तभे तो पइसा सकेल पइस अउ अपन बेटी के बिहाव करिस।
आश्रय सूचक = जे, काबर, कि, जानौ (जाना-माना), मानौ (जाने-माने)
तैं ओला काबर बके होबे।
अइसन गोठियात हस जाना-माना तैं राजा भोज अस अउ मैं गगवा तेली।
विस्मयादिबोधक अव्यय
विस्मय – आँय, राम-राम, ए ददा, ए दाई, अरे, हे
आँय, का होगे ?
राम-राम, अइसन बखानत हे नहीं।
ए दाई ऽ ऽ अतका कन पई ऽ सा ऽ।
घृणा – दुर-दुर, छी, छि-छि, थू. हत, दुर-दुर एला दूरिहा राख। छि-छि, ओ टूरा ह पीथे तहाँ निचट बकथे। थू , कइसन बस्सावत हे।
हर्ष / प्रशंसा – वा, बने, धन-धन, सुग्घर, वा, बने करे बेटा। कत्तेक सुग्घर हे ओकर बहुरिया हा। धन-धन मोर भाग, मोर घर बेटी होगे।
पीड़ा – हाय, हा दाई /ददा, दाई वो, ददा गा, हा दाई ऽ मर गेंव वो ऽ। ददा गा , मैं नई तइसे लागथे अब्बड़ पीरावत हे।

शोधार्थी – राजेन्‍द्र कुमार काले, रायपुर. निदेशक – चित्‍तरंजन कर

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