बिदेसी बाबू बिसराये ब्यौहार , पहिर अँगरेजी चोला महतारी अउ बाप , नजर नइ आवै तोला जाये बर परदेस , तियागे कुटुम – कबीला बन सुविधा के दास , करे बिरथा जिनगी ला का पाबे परदेस ले , नाता – रिस्ता जोड़ के असली सुख इहिंचे मिलै , झन जा घर ला छोड़ के छप्पय छन्द डाँड़ (पद) – ६, ,चरन – १२, पहिली ४ डाँड़ रोला अउ बाद के २ डाँड़ उल्लाला होथे. माने छप्पय छन्द हर १ रोला अउ १ उल्लाला ला मिला के बनाये जाथे. तुकांत के…
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छत्तीसगढ़ी गद्य में छंद प्रयोग
छन्द के छ : उल्लाला
जिनगी (उल्लाला – १३,१३ मा यति ,बिसम-सम तुकांत) जिनगी के दिन चार जी, हँस के बने गुजार जी दुख के हे अँधियार जी, सुख के दियना बार जी नइ हे खेवन-हार जी , धर मन के पतवार जी तेज नदी के धार जी, झन हिम्मत तयँ हार जी गुरू – १ (उल्लाला – १३,१३मा यति, सम-सम तुकांत) दुख के पाछू सुख हवे, गोठ सियानी मान ले बिरथा नइ जाये कभू , संत गुरु के ग्यान ले गुरू बड़े भगवान ले , हरि दरसन करवाय जी गुरू साधना मा जरै ,…
Read Moreछन्द के छ : अमृत ध्वनि छन्द
जब तँय जाबे जाबे जब तँय जगत ले , का ले जाबे साथ संगी अइसन करम कर, जस होवै सर-माथ जस होवै सर – माथ नवाबे, नाम कमाबे जेती जाबे , रस बरसाबे , फूल उगाबे झन सुस्ताबे , अलख जगाबे , मया लुटाबे रंग जमाबे , सरग ल पाबे, जब तयँ जाबे अमृत ध्वनि छन्द डाँड़ (पद) – ६, ,चरन- १६ , पहिली २ डाँड़ दोहा अउ बाद के ४ डाँड़ ८-८ के मातरा मा यति वाले ३-३ चरन माने कुल २४-२४ मातरा के रहिथे फेर रोला नइ रहाय.…
Read Moreछन्द के छ : कुण्डलिया छन्द
चेत हरियर रुखराई कटिस, सहर लील गिन खेत देखत हवैं बिनास सब, कब आही जी चेत कब आही जी चेत , हवा-पानी बिखहर हे खातू के भरमार , खेत होवत बंजर हे रखौ हवा-ला सुद्ध , अऊ पानी-ला फरियर डारौ गोबर-खाद , रखौ धरती ला हरियर कवि के काम कविता गढ़ना काम हे, कवि के अतकी जान जुग परिबर्तन करिस ये, बोलिन सबो सियान बोलिन सबो सियान , इही दिखलावे दरपन सुग्घर सुगढ़ बिचार, जगत बर कर दे अरपन कबिता – मा भर जान, सदा हे आगू बढ़ना गोठ अरुन…
Read Moreछन्द के छ : रोला छन्द
मतवार पछतावै मतवार , पुनस्तर होवै ढिल्ला भुगतै घर परिवार , सँगेसँग माई-पिल्ला पइसा खइता होय, मिलै दुख झउहा-झउहाँ किरिया खा के आज , छोड़ दे दारू-मउहाँ रोला छन्द डाँड़ (पद) – ४, ,चरन – ८ तुकांत के नियम – दू-दू डाँड़ के आखिर मा माने सम-सम चरन मा, १ बड़कू या २ नान्हें आवै. हर डाँड़ मा कुल मातरा – २४ , यति / बाधा – बिसम चरन मा ११ मातरा के बाद अउ सम चरन मा १३ मातरा के बाद यति सबले बढ़िया माने जाथे, रोला के डाँड़…
Read Moreछन्द के छ : सोरठा छन्द
देवारी राज करय उजियार, अँधियारी हारय सदा मया-पिरित के बार, देवारी मा तँय दिया, || तरि नरि नाना गाँय , नान नान नोनी मनन, सबके मन हरसाँय , सुआ-गीत मा नाच के || . सुटुर-सुटुर दिन रेंग, जुगुर-बुगुर दियना जरिस, आज जुआ के नेंग , जग्गू घर-मा फड़ जमिस || सोरठा छन्द डाँड़ (पद) – २, ,चरन – ४ तुकांत के नियम – बिसम-बिसम चरन मा, बड़कू,नान्हें (२,१) हर डाँड़ मा कुल मातरा – २४ , बिसम चरन मा मातरा – ११, सम चरन मा मातरा- १३ यति / बाधा…
Read Moreछन्द के छ : दोहा छन्द
बिनती बन्दौं गनपति सरसती, माँगौं किरपा छाँव ग्यान अकल बुध दान दौ, मँय अड़हा कवि आँव | जुगत करौ अइसन कुछू, हे गनपति गनराज सत् सहित मा बूड़ के , सज्जन बने समाज रुनझुन बीना हाथ मा, बाहन हवे मँजूर जे सुमिरै माँ सारदा, ग्यान मिलै भरपूर लाडू मोतीचूर के , खावौ हे गनराज सबद भाव वरदान मा, हमला देवौ आज हे सारद हे सरसती , माँगत हौं वरदान सबल होय छत्तीसगढ़ , भाखा पावै मान स्वच्छ भारत अभियान सहर गाँव मैदान – ला, चमचम ले चमकाव गाँधी जी के…
Read Moreदोहा
सुकवि श्री बुधराम यादव जी के नवा छत्तीसगढ़ी सतसई दोहा संग्रह “चकमक चिनगारी भरे “ से साभार – ——————————————————————————————————– पहुना कस बेटी भले – मइके बर दिन चार । पर मइके ससुरार के – मरजादा रखवार ॥ सिरतो बेटी सिरज के – रोथे सिरजनहार । मया पुतरिया के कदर – बिसरत हे संसार ॥ जेकर हिरदे नित भरे – सतगुन सुघर बिचार । जानव दियना ते धरे – करत रथे उजियार ॥ बिन किताब के घर लगय – जनव झरोखा हीन । सुद्ध पवन सत ज्ञान बिन – लगंय रहइया दीन ॥ …
Read Moreदेवारी तिहार के बधई
[bscolumns class=”one_half”] अँधियारी हारय सदा , राज करय उजियार देवारी मा तयँ दिया, मया-पिरित के बार || नान नान नोनी मनन, तरि नरि नाना गायँ सुआ-गीत मा नाच के, सबके मन हरसायँ || जुगुर-बुगुर दियना जरिस,सुटुर-सुटुर दिन रेंग जग्गू घर-मा फड़ जमिस, आज जुआ के नेंग || अरुण कुमार निगम http://mitanigoth.blogspot.in [/bscolumns][bscolumns class=”one_half_last_clear”](देवारी=दीवाली,तयँ=तुम,पिरित=प्रीत,नान नान=छोटी छोटी,नोनी=लड़कियाँ, “तरि नरि नाना”- छत्तीसगढ़ी के पारम्परिक सुआ गीत की प्रमुख पंक्तियाँ, जुगुर-बुगुर=जगमग जगमग,दियना=दिया/दीपक,जरिस=जले, सुटुर-सुटुर=जाने की एक अदा,दिन रेंग=चल दिए,फड़ जमिस=जुआ खेलने के लिए बैठक लगना,नेंग=रिवाज)देवारी (सं० दावाग्नि) कछारों में दिखाई देनेवाला लुक। छलावा। उदा०: जानहुँ…
Read Moreदोहावली
1. चार चरण दू डांड़ के, होथे दोहा छंद । तेरा ग्यारा होय यति, रच ले तै मतिमंद ।।1।। विसम चरण के अंत मा, रगण नगण तो होय । तुक बंदी सम चरण रख, अंत गुरू लघु होय ।।2।। 2. दुखवा के जर मोह हे, माया थांघा जान । दुनिया माया मोह के, फांदा कस तै मान।। 3. जीवन मा दिन रात कस, सुख दुख हा तो आय । दृढ़ आसा विस्वास हा, बिगड़े काम बनाय ।। 4. सज्जन मनखे होत हे, जइसे होथे रूख । फूलय फरय ग दूसर…
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