छत्‍तीसगढ़ के दुलरूवा अउ समर्थ कवि आलोचक

कुछ साहित्‍य अल्‍पायु ही म अतका कुछ स्रेस्‍ठ साहित्‍य के रचनाकर जाथे के आने वाला पीढी़ वोकर कारज देख के चकित हो जाथे प्रतिभावान साहित्‍यकार डॉ.नरेन्‍द्र वर्मा के जनम 4 नवंबर 1939 म वर्धा म होय रहिस। बचपन म आप के अग्रज स्‍वामी आत्‍मानंद के विचार धारा के परभाव आपके साहित्‍य म अनिवार्य रूप ले पडे़ रहिस। सुसील यदु ठीकेच कथे डॉ.नरेन्‍द्र देव वर्मा के सुरता करे ले भव्‍य व्‍यक्‍तित्‍व ऊँच ललाट के झलक हमर आघु मा आ जाथे। जउन काम उदयनारायण तिवारी हा भोजपुरी खातिर करिस ओइसने काम डॉ.नरेन्‍द्र वर्मा हा छत्‍तीसगढ़ी खातिर करे रहिस। जेकर परमान आय ”छत्‍तीसगढी़ भासा के उदविकास।” उंकर प्रकासित अउ परसिद्ध ग्रंथ ये प्रकार ले हवय-1.सुबह की तलास (उपन्‍यास) अपूर्वा छत्‍तीसगढ़ काव्‍य संकलन। प्रयोगवादी काव्‍य साहित्‍य (आलोचना) मोला गुरू बनई लेते (छत्‍तीसगढी़ नाटक)। ये अति उजोगहा कवि लेखक के इंतकाल रायपुर म दिल के दौरा परे म 8 सितंबर 1979 म हो गइस। फेर उंकर साहित्‍य के परकास आज भी हमला उसमा ओज प्रदान करत हे।