गिरिवर दास वैष्‍णव के जनम संवत् 1954 के पूस पुन्‍नी याने 1897 म बलौदा बाजार तहसील के ग्राम माचा भांठा म होय रहिस। उन रूसी क्रांति अउ साम्‍यवाद ले परभावित रहिन। सोसित किसान-मजदूर के सोसन के खिलाफ उठाने वाला कवि रहिन डॉ. सत्‍यभामा आडिल के सब्‍द म उन जाति के ब्राम्‍हन रहिन फेर सोसित मजदूर गरीब किसान अउ हरिजन मन के पक्षधर रहिन। देस अउ समाज ले जुडे़ उंकर जनवादी कविता हर दरपन जइसे हवय उंकर छत्‍तीसगढ़ सुराज नामक क्रांतिकारी कवि‍ता किताब हर सन् 1930 म परकासित होय रहिस। सुसील यदु कथे छत्‍तीसगढी़ सुराज हर छत्‍तीसगढी़ साहित्‍य के मील के पथरा आय। डॉ. नरेंद्र देव वर्मा ए किताब के खूबेच बडा़ई ए सब्‍दन म करे हवयं वो समे के जनभाव के आंकलन जइसे कुंजबिहारी चौबे के बहुत कम छत्‍तीसगढी़ अउ गिरिवर दास वैसनव के छत्‍तीसगढी़ सुराज में रचना मन म होये हो ओइसन आने कवि मन मा कहीं नहीं सध सके हवय।