घर से गायब हुई थी नाबालिग, वापस लौटने के बाद सामने आया मामला
अभियोजन के मुताबिक, 4 मई 2025 को पीड़िता के पिता ने थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि परिवार के लोग जंगल गए थे और उनकी दूसरी बेटी घर पर अकेली थी। वापस लौटने पर वह घर में नहीं मिली।करीब छह दिन बाद 10 मई को पीड़िता खुद घर वापस लौटी। इसके बाद उसने परिजनों को आरोपी के संबंध में जानकारी दी। शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।जांच के दौरान पीड़िता के आरोपी के संपर्क में रहने, शारीरिक संबंध और उसके गर्भवती होने की जानकारी सामने आई। पुलिस ने 17 सितंबर 2025 को मामले में चालान पेश किया, जिसके बाद ट्रायल कोर्ट ने आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए।
शादी का भरोसा देने का लगाया था आरोप
ट्रायल कोर्ट में दिए बयान के मुताबिक, पीड़िता ने आरोप लगाया कि आरोपी ने पहले उसके साथ प्रेम संबंध बनाए और शादी करने का भरोसा दिया। इसके बाद वह उसे जंगल और अपने घर के आंगन में ले गया, जहां उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए गए।पीड़िता के अनुसार, बाद में उसे अपनी गर्भावस्था की जानकारी मिली और उसने इसकी जानकारी आरोपी को भी दी। जब वह बरामद हुई, तब वह करीब सात से आठ महीने की गर्भवती थी। बाद में उसने एक बच्चे को जन्म दिया, लेकिन जन्म के करीब एक सप्ताह बाद नवजात की मौत हो गई।
DNA जांच रिपोर्ट ने मामले में जोड़ा अहम साक्ष्य
हाईकोर्ट ने जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान मामले में उपलब्ध साक्ष्यों पर गौर किया। कोर्ट ने माना कि पीड़िता के बयान के साथ गर्भावस्था से जुड़े चिकित्सकीय साक्ष्य भी मौजूद हैं।मामले में सबसे महत्वपूर्ण साक्ष्यों में से एक नवजात की DNA जांच रिपोर्ट रही। रिपोर्ट के अनुसार आरोपी को बच्चे का जैविक पिता बताया गया है। कोर्ट ने इस रिपोर्ट को पीड़िता और आरोपी के बीच शारीरिक संबंध के आरोप के समर्थन में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना।
आरोपी ने प्रेम संबंध होने का दिया था तर्क
जमानत की मांग करते हुए आरोपी की ओर से कहा गया कि पीड़िता अपनी इच्छा से उसके साथ पटना और चांपा गई थी। बचाव पक्ष ने दोनों के बीच प्रेम संबंध होने का भी तर्क दिया। पीड़िता की उम्र को लेकर भी सवाल उठाए गए।हालांकि, कोर्ट के समक्ष उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर यह सामने आया कि घटना के समय पीड़िता की उम्र 18 वर्ष से कम थी। मामले में पॉक्सो कानून के प्रावधान भी लागू किए गए हैं।इन परिस्थितियों और केस डायरी में मौजूद साक्ष्यों को देखते हुए हाईकोर्ट ने आरोपी को जमानत देने से इनकार करते हुए उसकी याचिका खारिज कर दी।