Chhattisgarh: 3 KM पैदल सफर, दो नदियां और गोद में बच्ची… ऐसे स्कूल पहुंचती हैं बलरामपुर की महिला शिक्षिका, तस्वीर ने खींचा ध्यान

बलरामपुर। बारिश के मौसम में खराब सड़कों की वजह से लोगों को होने वाली परेशानी की तस्वीरें अक्सर सामने आती हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में समस्या इससे भी आगे की है। यहां स्कूल तक पहुंचने के लिए रास्ता ही चुनौती बन गया है। वाड्रफनगर ब्लॉक के धौरपुर गांव में पदस्थ महिला शिक्षिकाओं को बारिश के दिनों में करीब 3 किलोमीटर पैदल चलने के बाद नदियां पार कर स्कूल पहुंचना पड़ता है। इस दौरान एक शिक्षिका अपनी छोटी बच्ची को साथ लेकर नदी पार करती नजर आईं, जिसकी तस्वीर सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया है।

पहले 3 किलोमीटर पैदल सफर, फिर नदियों को पार करने की चुनौती

धौरपुर गांव में पदस्थ दो महिला शिक्षिकाओं की तस्वीर सामने आई है। बताया जा रहा है कि स्कूल तक पहुंचने के लिए उन्हें पहले करीब 3 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ता है। इसके बाद रास्ते में पड़ने वाली मोरन और इरिआ नदियों को पार करना होता है।बारिश के दौरान नदियों का जलस्तर बढ़ने पर मुश्किल और ज्यादा बढ़ जाती है। पानी अधिक होने की स्थिति में शिक्षिकाओं को नदी पार करने का जोखिम उठाने के बजाय वापस लौटना पड़ता है। ऐसे में स्कूल तक पहुंचना भी संभव नहीं हो पाता।

स्कूटर है, लेकिन स्कूल तक नहीं पहुंचा सकती

शिक्षिका संध्या के मुताबिक, वह अपनी स्कूटर को मरना इलाके में खड़ा करती हैं। इसके बाद आगे का करीब 3 किलोमीटर रास्ता पैदल तय करना पड़ता है। रास्ता पथरीला और ऊबड़-खाबड़ होने के कारण पैदल चलना भी आसान नहीं है।लेकिन सबसे बड़ी परेशानी इसके बाद सामने आती है, जब रास्ते में नदी पड़ती है। संध्या कई बार अपनी बेटी को भी साथ लेकर स्कूल जाती हैं। ऐसे में नदी पार करना उनके लिए सामान्य आवागमन नहीं, बल्कि रोज की चुनौती बन जाता है।

2014 से जारी है यही परेशानी

शिक्षिका संध्या ने बताया कि वह वर्ष 2014 से यहां पदस्थ हैं। इतने वर्षों में बारिश का मौसम आते ही उन्हें इसी तरह की परिस्थितियों से गुजरना पड़ता है। जलस्तर अधिक बढ़ने पर वह स्कूल नहीं पहुंच पाती हैं।उनका कहना है कि जब किसी वजह से स्कूल नहीं पहुंच पातीं तो उन्हें इसका मलाल रहता है। उन्हें चिंता होती है कि उनकी अनुपस्थिति का असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ सकता है।

कलेक्टर तक पहुंचा मामला, शिक्षिका की मेहनत की सराहना

महिला शिक्षिकाओं के इस संघर्ष की जानकारी बलरामपुर कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी तक भी पहुंच चुकी है। कलेक्टर ने शिक्षिका के समर्पण और मेहनत की सराहना की है।कलेक्टर के मुताबिक, उन्हें ऐसी शिक्षिका के बारे में जानकारी मिली है, जो अपने छोटे बच्चे को साथ लेकर बारिश के दौरान नदी पार करती हैं और करीब 3 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचती हैं। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद बच्चों को पढ़ाने के लिए शिक्षिका का इस तरह प्रयास करना सराहनीय है।

सवाल सिर्फ रास्ते का नहीं, बच्चों की पढ़ाई का भी

धौरपुर की यह तस्वीर ग्रामीण इलाकों में शिक्षा व्यवस्था तक पहुंच की जमीनी चुनौती को सामने लाती है। शिक्षिकाओं के सामने हर साल बारिश के दौरान यही समस्या खड़ी होती है। अब देखना होगा कि इस मुश्किल आवागमन को आसान बनाने के लिए प्रशासन की ओर से क्या स्थायी व्यवस्था की जाती है।

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