जनचेतना के महत्‍वपूर्ण कवि

कोदूराम दलित जी के जनम दुर्ग जिला के ट‍िकरी गांव म 5 मार्च 1910 के अउ इंतकाल 28 सि‍तंबर 1967 के होय रहिस। उन खुदे अपन परिचय इन सब्‍दन म दे हवयॅ –

लइका पढ़ई के सुधर करत हववं मैं काम
कोदूराम दलित हवय मोर गंवइया नाम

कोदूराम दलित के कुंडलियां सिल्‍प अउ भाव दूनों दृष्‍ट‍ि ले गिरधर कवि के सुरता करा देथे। उंकर 10 ठन कृति परकासित हे-
1. सियानी गोठ 2. कनवा समधी 3. अलहन 4. दु मितान 5. हमर देस 6. कृष्‍ण जन्‍म 7. बाल निबंध 8. कथा कहानी 9. बहुजन हिताय बहुजन सुखाय 10. छन्‍नर छन्‍नर पैरी बाजे सीरसक ले करे हवयं दलित जी दुबारा परयोग करे गये ध्‍वनि व्‍यंजित करने वाला सब्‍द मन एक कती तो कवि‍ता ल मधुरता प्रदान करथे दूसर कती भावना मनके वेग ल सम्‍परेसित करथे हास्‍य बियंग के अतका बड़का कवि छत्‍तीसगढी़ म अभी तक दूसर पैदा नई होय है।