महान क्रांतिकारी कवि

छत्‍तीसगढी़ में थोरेच अकन लिखे हवयं फेर उकर गीतमन ल लोकगीत जइसे परसिद्धि‍ मिलिस। पंडित छबिराम चौबे (स्‍वामी नारायणानंद) के घर ए कुंजबिहारी जइसे बिद्रोही कवि के जनम होय रहिस। 16 वरिस के उमर में लि‍खना सुरू करे रहीन। जेल जीवन घलोक म उन कई ठन रचना करे रहिन। मात्र 27 साल में अल्‍पायु म उकर देहावसान हो गईस। उन प्रगतिशील कवि रहिन। सामाजिक विलासिता ले उन ला अब्‍बड़ घिना रहिस। हरि ठाकुर के अनुसार बियासी के नांगर 1937 म आकास बानी नागपुर ले परकासित होय रहिस।
ये हर लोक गीत के अद्वितीय परकासन आय सत्‍तर बहत्‍तर साल के बाद भी ये गीत हर आज भी तरो ताजा है। अउ हर संकलन म ऐला स्‍थान दिए जाथे।