समरथ गॅवइया

लजकुरिहा कवि लेखक मन गांव गंवई म लुकाय रइथे फेर उनला देस दुनिया समाज के विसंगति मन के सहज गियान रइथे समरथ दुरिहेच ले कवि जइसन प्रकृत कवि जइसन दिखैं अउ जब काव्‍य पाठ करैं त एक-एक सब्‍द के अर्थ हर फूल जइसे खिले लगयँ। छत्‍तीसगढ़ के समर्थ कवि लेखक जयप्रकास मानस हर उंकर पहि‍ली बार रायपुर म सम्‍मान कराय रहिन अउ उन अपन काव्‍य-पाठ अउ प्रतिभ के बल म रातो रात छत्‍तीसगढ़ म परसिद्ध हो गइन। उंकर कविता पुस्‍तक के नाव हे ”मरबो फेर रोवन नइ दन।” हास्‍य व्‍यंग्‍य के कविता के धार छुरी के धार जइसे हवय। ये प्रायमरी स्‍कूल के गुरूजी रहिन फेर जन-जीवन घलोक के गुरू रहिन। इंकर जनम रायगढ़ जिला के बांधा पाली गांव म 5 जुलाई 1926 के होय रहीस अउ इंतकाल 72 वरिस के उमर म सासकीय अस्‍पताल रायगढ़ म हो गइस। हरिठाकुर के अनुसार छत्‍तीसगढ़‍िया मन ला भोला-भाला सीधा सादा माने जाथे कवि समरथ गवंइहा छत्‍तीसगढ़‍िया मन के प्रतीक आय। समरथ जी के कविता के सैली समरथ जी जइसन हे। कवि‍ता ल पढे़ से अइसे लगथे जइसे कविता हमर संग गोठियात हे ये कवि‍ता मन हमर मरम ल टमड़थे कोचथे अउ कभू-कभू हुदरथे।