राजा भूपदेव सिंह के कृपापात्र मेदिनी प्रसाद पांडेय के जन्‍म परसा पाली (खरसिया) म सन् 1869 म अउ मृत्‍यु 1930 म होय रहिस। छत्‍तीसगढी़ अउ ब्रज भाषा मिश्रि‍त खडी़ बोली म आप रचना करत रहा। डॉ. रामनरायण पटेल के सब्‍द म आप द्विवेदी युग के परसिद्ध कवि रहा। आप छत्‍तीसगढी़ अउ ब्रजभाषा के कवि सम्राट थे। आपकी रचनाएं सत्‍संग बिलास गद्य मंजूसा पद्य-मंजूसा गणपति उत्‍सव दरपन एकर सिवाय उंकर सिंगार सुधार संग्रह हर सरस्‍वती बिलास प्रेस नरसि‍हपुर ले परकासित होय रहिस। उंकर कईठन रचना आजो ले परसिद्ध हवय- ”ए हर नोहय कचेहरी बडे़-बडे़ हॉकिम मन खेले हे गरी ” जइसे परसिद्ध रचना हर डॉ. प्रभाकर दरसन अउ डॉक्‍टर रामनारायण के अनुसार मेदिनी प्रसाद पांडेय रचित आय। लेकिन लाला फूलचंद एला हारमोनियम के साथ अतका तन्‍मयता ले गावत रहिन के ये कहा कठिन हो जात रहिस के येहर लाला जी के रचना आय के पाण्‍डेय जी के। राजा भूपदेव सिह के राजा साहब परसन्‍न होके उनला टाडा अउ परसापाली गांव देहे रहीन।