सुरता सुशील यदु

सहज, सरल, मिलनसार अउ मृदुभाषी व्यक्तित्व के धनी सुशील यदु जी के पिता के नाम स्व.खोरबाहरा राम यदु रहिस । एम.एम. (हिन्दी साहित्य) तक शिक्षा प्राप्त यदु जी प्राइमरी स्कूल म हेड मास्टर के पद रहिन । छत्तीसगढ राज बने के पहिली ले छत्तीसगढी भाखा ल स्थापित करे के जडन आंदोलन चलिस ओमा सुशील यदु के नाम अग्रिम पंक्ति म गिने जाथे । छत्तीसगढी भाखा अउ साहित्य के उत्थान खातिर हर बछर छ.ग. म बडे-बडे आयोजन करना जेमा प्रदेश भर के 400-500 साहित्यकार ल सकेलना, भोजन पानी के व्यवस्था करना…

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अजय साहू “अमृतांशु” के दोहा : इंटरनेट

छागे इंटरनेट हा, महिमा अपरंपार। घर बइठे अब होत हे, बड़े-बड़े व्यापार।। बिन खरचा के होत हे, बड़े-बड़े सब काम। दउड़े भागे नइ लगय, अब्बड़ हे आराम।। नेट हवय तब सेट हे, दुनिया के सब रंग। बिना नेट के लागथे, जिनगी हा बदरंग।। रात-रात भर नेट मा, झन कर अतका काम। चिंता कर परिवार के, कर ले कुछ आराम।। घर मा बइठे देख लव, दुनिया भर के रीत। आनी बानी गोठ अउ, अब्बड़ सुग्घर गीत।। लइका मन पुस्तक पढ़य,घर बइठे अभ्यास। होत परीक्षा नेट मा, तुरते होवय पास।। का कहना…

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छन्न पकैया : पकैया छ्न्द

छन्न पकैया छन्न पकैया,पक्का हम अपनाबो नइ लेवन अब चीनी राख़ी,देशी राखी लाबो। छन्न पकैया छन्न पकैया,बहिनी आँसों आबे। हमर देश के रेशम डोरी,सुग्घर तैं पहिराबे। छन्न पकैया छन्न पकैया,चीनी झालर टारव झन लेवव जी उँकर माल ला,माटी दीया बारव। छन्न पकैया छन्न पकैया,झगरा चीन ल प्यारा हिन्दी चीनी भाई भाई,झूठा हावय नारा। छन्न पकैया छन्न पकैया,चीनी कपड़ा छोड़व। पहिनव सुग्घर सूती कपड़ा,गरब चीन के टोरव। अजय अमृतांशु भाटापारा

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छन्द के छ : एम.ए.छत्तीसगढी के पाठ्यक्रम मा जोडे जाना चाही

निगम जी के “छन्द के छ’ पढे बर मिलीस। पिंगल शास्त्र के जानकारी देवइया किताब ल महतारी भाखा म पढ के मन आल्हादित होगे। आज के लिखइया मन छन्द के नाम ल सुन के भागथे अइसन बेरा म छत्तीसगढी साहित्य ला पोठ करे खातिर निगम जी पोठ काम करे हवय। छन्द ला समझाये खातिर निगम जी ह सबले पहिली – अक्षर, बरन, यति, गति, मातरा, डांड अउ चरन (सम चरण, बिषम चरण), लघु (1) गुरू (5) काला कहिथे? तेला बिस्तार ले समझाये हे। मातरा ला कइसे गिने जाथे? मातरा ल…

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गांव के संस्‍कृति के धरोहर : ओरिया के छांव

“ओरिया के छांव” के मनीराम साहू “मितान” के पहिली छत्तीसगढी कृति आय। छत्तीसगढ के गॉंव-गँवई ल जेन जानना चाहथे उनला ये किताब जरूर पढना चाही। सावन, भादो, जेठ,अषाढ़, घाम, जाड जम्मो मास के सौंदर्य के बरनन मितान जी ये संघरा म करे हवय। कोन महिना म छत्तीसगढ़ के किसान का काम करथे, कोन से तिहार परथे तेकर सुघ्‍घर चित्रण ये संघरा म मिलही संगे-संग सँझा, बिहनिया, देवारी, फागुन, तीजा-पोरा, नवा बछर हमर छत्तीसगढ़ म कइसे होथे अउ कइसे मनाथे येकर जानकारी ये संघरा ल पढे़ म मिलही। कुल 51 रचना…

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छत्तीसगढी शब्द में भ्रम के स्थिति….

जेन भाखा म जतके सरलता,सहजता अउ सरलगता होही वो भाखा उतके उन्नति करही, अँग्रेजी भाखा येकर साक्षात उदाहरण हवय । अउ जेन भाखा म क्लिष्टता होही वो भाखा ह नंदाये के स्थिति म पहुंच जाथे जइसे कि हमर संस्कृत । यदि हम ये सोचथन कि छत्तीसगढी ह वैश्विक भाखा बनय त ओखर सरलता अउ सहजता उपर हमन ल ध्यान दे बर परही । खास करके संज्ञा शब्द के उपयोग करत बेरा । जडउन शब्द मन हिन्दी, उर्दू, अंग्रेजी या अन्य भाखा ले आय हे वो शब्द ल ज्यों के त्यौ…

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पुस्तक समीक्षा : अंतस म माता मिनी

छत्तीसगढ म जतका महान विभूति अवतरित होईन ओमा मिनी माता के प्रमुख स्थान हवय। माता मिनी न केवल कुशल राजनेता रहिन बल्कि बहुत बडे समाज सुधारक, गुरूमाता अउ दूरदृष्टा भी रहिन। एक विभूति के भीतर अतका अकन सद्गुण के समावेश ये बात के परिचायक हवय कि माता मिनी छत्तीसगढ म परिवर्तन लाये खातिर अवतरित होय रहिन। आज जब हम मिनी माता के जीवन उपर कुछ पढना चाहथन त उँकर उपर लिखे गे साहित्य के कमी के कारण अध्ययन से वंचित रहि जाथन। गौरतरिहा जी के ये किताब सार्थक पहल हवय।…

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पुस्तक समीक्षा : चकमक चिंगारी भरे

दोहा हिन्दी साहित्य के जुन्ना विधा आय। भक्तिकाल में कबीर, सूर, तुलसी, रसखान, रहीम आदि कवि मन दोहा के माध्यम ले जन जागरण के काम करिन। बिहारी तो सतसई लिख के अमर होगिन, बिहारी के सतसई परंपरा ल छत्तीसगढी म आगू बढाय के काम श्री बुधराम यादव जी अपन दोहा सतसई “चकमक चिंगारी भरे” म करे हवय। चार चरण अउ दू डांड म कहे जाने वाला दोहा लिखना गगरी म सगरी भरे के चुनौती भरे काम आय। दिखब म जतका सरल दिखथे लिखे म वोतके कठिन काम आय दोहा लिखना,…

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मानव सेवा – देहदान : जरूरत अउ महत्ता

सरग इंहे, नरक इंहे । मरे के बाद कोन जीव कहाँ जाथे तेला कोनो नद जानय। बने करम करबे त ओकर सुख भोगे बर अउ घिनहा करम करबे त दु:ख भोगे बर इही भुइंया म फेर आना हे। सियान मन कहिथे के मरे के पहिली अइसन करम कर लव कि मरे के बाद जम्मो मनखे तुंहर सुरता राखय। दान, दक्षिणा, दीन-दुखी के सेवा, सहायता आदि कतको तरीका हवय जेकर ले आप पुन्न के काम करके मानवता के संदेश दे सकथव। दान करे के कई तरीका हे जइसे कोनो स्कूल बनवा दिस,…

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स्कूल म ओडिसी .. पंथी, करमा काबर नहीं …?

छत्तीसगढ के जम्मो सरकारी स्कूल म पहली ले पाँचवी कक्षा तक पढईया लईका मन ला अब भाषा,गणित विज्ञान के अलावा ओडिसी नृत्य के घलो शिक्षा ले बर परही । ये नवा तुगलकी फरमान एन सी आर टी ह जारी करे हवय । ओकर कहना हवय के नृत्य के शिक्षा ले से लइका मन नृत्य के भाव भंगिमा के जरिया ठीक से खडे होना,सांस लेना अउ रीढ के हड्डी ल सीधा राख के चले के तरीका सिखाय जाही । शिक्षा विभाग के दावा हवय के ये नवा कोर्स ले लइका मन के…

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