पर्यटन : माण्डूक्य ऋषि के तपोभूमि ‘मदकू द्वीप’

शिवनाथ नदी के सुघ्‍घर धार ले घेराय बीचो-बीच लगभग आधा कि.मी. के दायरा म फइले मदकू द्वीप “श्री हरिहर क्षेत्र केदार मदकू द्वीप” के नाम से प्रसिद्ध हवय। पुरातात्वीय अवशेष अउ रमणीक पर्यटल स्थल ‘मदकू द्वीप’ के स्तर जमाव ले प्रागैतिहासिक कालीन विविध पाषाण उपकरण के श्रृंखला मिलथे। इंहाँ 11 वीं सदी के स्थापत्य कला के अवशेष अउ प्रतिमा मन विद्यमान हवय। पारिस्थितिकी जैव विविधता पुरातात्वीय अवशेष अउ पर्यटन के संभावना ले भरपूर मदकू द्वीप ह जल दुर्ग सरीक आभासित होथे। अपन प्राकृतिक सौंदर्य अउ धार्मिक मान्यता के कारण ‘मदकू…

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पाठ्यक्रम म छत्तीसगढ़ी – आंदोलन के जरूरत …..

–अजय अमृतांशु प्राईमरी (कक्षा पहली ले पॉचवी) तक महतारी भाखा छत्तीसगढ़ी म पढई काबर नइ होत हे? ये दाहकत सवाल हमर बीच हवय। येखर पीरा तो जम्मो छत्तीसढिया मन ल हवय फेर सब ले जादा पीरा साहितकार मन ल हवय। अउ होही काबर नहीं? साहितकार बुद्धिजीवी वर्ग आय, भाखा के संवर्धन अउ क्रियान्वयन के सब ले बडे जिम्मेदारी साहितकार मन के होथे। आखिर का वजह हे कि छत्तीसगढ़ी म पढई लिखई ल पाठ्यक्रम म लागू नइ करे जात हे? पाठ्यक्रम म लागू करना अउ नइ करना पूर्ण रूप ले राजनीतिक…

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समीक्छा : दोहा के रंग

साहित्य के छंद के अपन अलगे महत्ता हवय। छंद ह साधना के विसय आय, बेरा-बेरा म छत्तीसगढ़ी म छंद लेन के काम होवत रहे हे, फेर आज के नवा पीढ़ी ह छंद के नाव ले सुनके भागथे। अइसन बेरा म रमेेश चौहान के दोहा गीत संगरा- दोहा के रंग के परकासन ये बात द्योतक हे कि अभी घलो छंद के महत्ता कम नइ होय हे, ओकर लिखईया भले कम होगे हे। दोहा के रंग ल चौहान बड़ सुग्घर ढंग ले अलग- अलग खंड म बांट के लिखे हवय। खंड “अ”…

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नंदाजाही का रे कमरा अउ खुमरी

  मीर अली मीर जी छग के लोकप्रिय गीतकार आय। उंकर गीत संघरा नंदा जाही का? कमरा अउ खुमरी…। मिलिस। नंदा जाही का… उंकर प्रतिनिधि अउ कालजयी रचना आय। इही गीत ह उंकर संघरा के शीर्षक आय जउन फिट बईठथे। कुल 58 गीत ए संघरा म संग्रहित हवय। जमो गीत ह अपन अलग-अलग रंग म रंग हवय। मीर जी अपने गीत के माध्यम से एक डहर जिहां सामाजिक अव्यवस्था ऊपर बियंग करथे उंहे दूसर डहर अलख जगाय के काम घलो करथे। विगत 10-12 बछर ले गांव-गांव में जाके अपन कर्णप्रिय…

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7 हाईकु पर्यावरण के

पेड कटागे                        कटाही रूख                   पेड लगाबो नई मिलय छांव                  उजरही जंगल                जुरमिल मितान पानी अटागे                       जीबे कईसे                     तभे बिहान

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