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Read MoreTag: Deen Dayal Sahu
गीत : दीन दयाल साहू
मै हा नहकाहूं डोगा पार,आवत हे प्रभु मोर द्वार। तैहा जग के ,आये पालन हार ये मोरे स्वामी। राम लक्ष्मण दूनो भाई ,संग मा हावे सीता माई। तैहा जग के ,आये पालनहार। नइ डूबो कभू। मझदार,सेवा में आयेव मल्हार । तैहा जग के ,आये पालानहार मोरे स्वामी । तोर चरण मैहा परवार हूं ,सब सागर मे हा तर जाहूं। तेंहा जग के ,आये पालनहार । नेंना मोर तरसत हे आज ,कब आबे प्रभु तै मोर घाट। तेंहा जग के,आये पालनहार । नैना मोर तरसत हे आज ,कब आबे प्रभु तै…
Read Moreबेटी दमाद के करनी : नान्हे कहिनी
”बरतिया किथे कईसे गउंटिया जानत हस, हमन राउत हाथ के पानी नी पीयन तेला। हमन बड़े कबीरहा हरन। हमन नई खान तोर जेवन ल। हमन छोटे नई होवन। गउंटिया हा हाथ जोर के खड़ा होगे। फेर बराती मन टस के मस नी होईन। लगिन के बेरा हा निकलत रिहिस। दमाद बाबू बराती मन ल किथे हमन धरम के रखवारी करइया कबीरपंथी हरन। फेर कबीर के बताय रद्दा ल नी जानेन।” सहर के तीर म लगे एक ठन गाय बरहापुर रहाय। जिहां खेती किसानी ले भरपूर एक झन किसान रहाय। कतको…
Read Moreसबके अपन रंग
पेड़ पौधा मन अपन रंग बदलथे लोग अपन सुवारथ बर खाये पीये के जीनिस ला रंगा के बेचत है। जीव जंतु मन अपन रंग बदलथे। टेटका मेचका मन अपन दुसमन ला चकमा देबर रंग बदलके वाला होथे। बिगर बुध्दिवाला मन अपन रंग बदल सकत हे, त बुध्दि वाला मनखे अपन रंग ला बदले बर काबर छोड़ही। मनखे ला जेती देखले वोती रंगे-रंग के गोठ ला गोठियात मिलहीं। नीरस कोनों अपन जिनगी ला देखना नी चाहे। माई लोगिन के काय पूछना। उंकर तो रंगे अलग रिथे। बेरा संग सबो मन अपन…
Read Moreगुदेलना – कहिनी
राधा अपन अंतस के पीरा ला कभू कोनो ल जनान नी देवय। फेर येकर कोनो नइहे कहिके लोगन जइसने पाथे वइसने ताना मारे मा कमी नी करय। राधा ह बिगर धियान दे अपन रसता आवत-जात रिथे। फेर ककरो बहकावा मा नी अईस। रसता मा कतको झन कुछु-न-कुछु कहात रिथे फेर लहुट के जुवाब कोनो ला नी दे अपने बूता म मगन रिथे। किसन के राधा हा जग मा मया बगराय के मिसाल बनिस। तेकरे सेती इंकर गुनगान ला हमन करथन। ये जग मा बिधाता हा हमन ला घलो बिगर छोटे-बड़े…
Read Moreहमर होरी – कहिनी
काय करबे बिधाता के आघु मा काकरो थोरे चलना हे। जिनगी के मरम ला निभाना हे। तब रोवत होय ते हासत जिये बर परही। अइसने जेकर करम हा फुटहा रिथे तेहर होस संभाले तहाने जियत भर ले मुड़ धरके रोवत राह। कतको कमा ले पईसा-कौड़ी भरे-भरे परवार के रहात ले घलो जिनगी मा कोनो न कोनो भुगता ले उबरना नी होवय। अइसने कोनजनी बिचारा अतुल। येकर भाग में काय लिखाय हावे ते। अपन दाई-ददा अउ भाई-बहिनी सबो ल अपन आघु मा गंवात देखिस फेर काय कर सकत रिहिस। वोतका ला…
Read Moreमनखे के भाव
बड़ बिहनिया मुंदरहा ले बेर निकले के पहिली नागर ला खान मा धरे चौरसता ले आघू कोती अरहू कहिके हफरत नाहकत रेहेंव ततके मा एक ठन मोटर हा आके मोर सन हबरगे। बीच रसता मा मुहु केर्रा गिरेंव मोटर के आघू घलो पेचक गे। मोर उठते, मोटर ले एक झन उतरिस ललछरहा मेंहा देखत केहेंव कइसे तोला दिखे घलो नही का जी-अतक बड़ रसता हा। गरीब मनखे मोर बासी पेज गंवागे नागर टूटगे बने होगे परान बाचगे हात गोड़ नी टुटिस? नीहिते, नीहिते-का, का होही अंधरा उत्ती बेरा के अंजोर…
Read Moreकुरसी नी पुरत हे
का जमाना आगे हे भगवान, तुही मन बताव काय करना चाही। जमाना कतका आघु बढ़त हे। तेनहा काकरो ले लुकाय नई हे। कुछु समझ नी आय काय करना चाही। आज के बेरा मा खुरसी के मरमे ला देखलव। पहिली जमाना मा सुघ्घर घर लीप के पहुना ला भुंईंया मा बईठारयं। घर के मनखे संग बईठके सुघ्घर गोटियावंय। पहिली के मन ला अईसने सगा माने मा बिक्कट मजा आय। बेरा के बदलाव संग धीर-धीर येहु मा बदलाव अईस। सबो मा बदलाव आवत हे ता येहु मा बदलाव तो आनाच हे अउ…
Read Moreसाल गिरहा मना लेतेन जोड़ी
कुकरा बासे नी रिहिस हे। बड़ बिहनिया ले गोसईन हा सुत उठके घर दुवार ला लीप बहार के तियार होगे। मेंहा देखेंव अउ कलेचुप सुतगेंव। गुनत रेहेंव येहा आज पहिली ले कईसे सुतके उठगे हावे कहिके। मोला काय करना हे कहिके धियान घलो नी देंव। गोसईन हा मुंदेरहा ले चहा लान के मुरसरिया मेर आके बईठ गे। तहाने मोला किथे उठना जोड़ी चहा पीले। पहिली बेर तो मेंहा अनसुनी कर देंव, दुसरैय्या मा धीरलगहा काय होगे कहिके कनवात उठेंव। त गोसईन हासत मोर हात मा चहा ल धरात किथे येदे…
Read Moreफेरीवाला
हमर देस हा जबले अजाद होय हावय तेन बखत ले सबला अजादी मिलगे हावय। तेकरे सेती कोनो हा डर नाव के कोनो जिनिस होथे तेनला भुलागे हें। अजादी मा डर के कोनो बाते नईहे। ईही अजादी के फेरा मा जेनहा काय होही देखे जही कहिके कुछु करथे तेकर काहीं घलो नी होवय। अउ डरराय असन ईमान ले जेनहा कुछु करथे तेकरे टोटा मा फांसी वोरमात रिथे। मोला तो अजादी के पर भासा समझे नी आय। नानपन मा दाई-ददा के बंधना, उहा ले निकले तहाने गोसईन लोग-लईका के बंधना अउ बुढ़ापा…
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