कईसन कब झटका लग जही…..

काय करबो संगी जिनगी मा जीये बर हे ता खाये-पीये ला परही। करू-मीठ दूनों के सुवाद ला घलो ले बर परही। येदे जिनिस करू हरे नई खावन, येदे गिनहा हे नई खान केहे मा नी होवय। खाबे तभे होही ना, सुवाद ला लेबे तभे तो। अइसने जिनगी मा बने-गिनहा सबो जिनिस ला जाने-अनजाने मा करेच ला परथे तभे जिनगानी ला जीये के रद्दा हा बनत जथे। अईसने हमन सबो के जिनगानी मा कोनो न कोनो रूप मा झटका घलो लगत रिथे। इही झटका ले सीख घलो मिलथे। बिगर झटका खाय…

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देसी के मजा

आजकाल जेला देखबे तेला खाये-पीये के, उठे-बईठे के, कपड़ा-लपता फेसन सबो मा विदेसी जिनिस के जाला मा अरझत जात हें। हमर देसी हा कोनो ला सुहावत नईहे, अउ बहिरी के मनहा हमर गुनगान करथें। आघू अउ कइसन बेरा कोनजनी समझ नी आय। एक घाव मोर मितान घर के छट्ठी नेवता अईस। मितान कल्लई असन करिस ता मेहा बिहनिया ले नेवता मा चल देंव, कतको बछर होगे रिहिस गे घलो नी रेहेंव। दू चार झन संघरा हमन बईठे रेहेन, जुन्ना गोठ-बात, सुख-दुख के होवत रिहिस। अवईय्या-जवईय्या मनखे मा परछी सईमो-सईमो करत…

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दर्रा हनागे

संझौती बेरा कोतवार हाका पारत रिहिस- नरवा मा नावा बने पुलिया हा तियार होगे हे, आज ले पांचवा दिन इतवार के हमर कोती के मंतरी फकालूराम हा फीता काटके उदघाटन करही। कोतवार केहाका ला सुनके गांव के लईका-सियान, दाई-बहिनी तिहार बरोबर उछल-मंगल मनात हें, अऊ टुटपुंजिहां गांव के नेता मन अइसे करत हें, जईसे ऊही मन मंतरी ले बाड़गे हे. गौरा-चौरा मेर तो दू पारटी के नेता मन धरी-धरा होगे रिहिन,अभीन के सरपंच किथे-मोर परयास ले पुलिया हा बने हे, पहिली वाले सरपंच किथे- मंत्री ला मेंहा केहे रेहेंव तेकर…

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