1. महॅू संतान अँव झन करौ गा भेद महूं संतान अँव बिधि के बिधान अँव बचपन म पाँव के पइरी सरग ले सुहाथे घर के बूता म दाई ल हाथ कोन बटाथे लीप बाहर अँगना दुवार कोन सजाथे लक्षमी दू दिन के मेहमान अँव जोड़थौं बिहा के मैं दू ठिन परिवार ल ए घर ले वो घर ले जाथौं संस्कार ल पीरा सहि कोख ले जनमथौं संसार ल सोचैं तो मैं जग के जान अँव सोचै महतारी तुँहर रहिस कखरो बेटी जेकर ले बिहाव करेव उहू कखरो बेटी कहाँ पाहू…
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छत्तीसगढ़िया कबि कलाकार
पानी हँ धार के रूप लेके बरोबर जघा म चुपचाप बहत चले जाथे। जिहाँ उबड़-खाबड़ होथे पानी कलबलाय लगथे। कलकलाय लगथे। माने पानी अपन दुःख पीरा अउ उछाह ल कलकल के ध्वनि ले व्यक्त करथे। पानी के कलकल ध्वनि हँ ओकर जीवटता अविरलता अऊ प्रवाहमयता के उत्कट आकांक्षा ल प्रदर्सित करथे। ओइसने मनखे तको अपन सुख-दुख ल गा-गुनगुना के व्यक्त करथे। वोहँ अपन एकांत म जिनगी के पीरा अऊ उमंग ल गुनगुनाथे जेला संगीत कहिथन। हमर छत्तीसगढ़ हँ गीत अऊ संगीत के अपार सागर म उबुक-चुबुक हे। इहाँ कोनो किसम…
Read Moreधर्मेन्द्र निर्मल के योजना प्रचार गीत
धर्मेन्द्र निर्मल के ये गीत मन ह सरकारी योजना मन के प्रचार-प्रसार बर संगीतबद्ध करे गए हे अउ ये गीत मन ह प्रदेश के कोना-कोना म प्रदर्शित होवत हे। 1. जम्बूरी डण्डा गीत जम्बुरी भारत के शान ए मान ए जम्बुरी भारत के शान स्वाभिमान हे देश हित खातिर जीना अउ मरना मानव सेवा ही तो जग म महान हे जुरमिल जम्मो वृक्षारोपण करबो भारत भुॅइया म लाबो हरियाली स्वच्छ भारत अभियान के सपना ल सकार करबो अउ लाबो खुशहाली दया मया प्रेम पर उपकार के भावना ल हिरदय म…
Read Moreदसवा गिरहा दमांद
जोतिस के जानकार मन ल नौ ले उपरहा गिनतीच नइ आवय। तेकर सेती जोतिस म नौ गिरहा माने गे हे। फेर लोकाचार म दस गिरहा देखे बर मिलथे। ओ दसवा गिरहा के नाँव हे दमांद। अलग -अलग गिरहा के अलग- अलग प्रभाव होथे। सबले जादा खतरा सनि ल माने गे हे। जेन हँं मनखे ल जादा ढेलवा -रहचुली झुलाथे। कोनो जब जादा परेसान हो जथे त कहिथे एकर उपर सनि चलत हे गा ! तेकर सेती पेरावथे बिचारा हँ। फेर ओकर ले जादा पेरूक तो दमांदमन होथे। एकर मतलब मैं…
Read Moreरोवा डारिन रियो म
31 वाँ ओलम्पिक खेल अपन सतरंगी छटा बिखेर के खतम होगे। ब्राजील के रियो डी. जेनेरियो साहर के मराकाना स्टेडियम म ए खेल के आयोजन बड़ धूमधाम से होइसे। एकर समापन के घोसना अंतरास्ट्रीय ओलम्पिक समिति के अध्यक्ष थामस चाक हँ करिस हे। ए खेल हँ 5 अगस्त से 21 अगस्त तक 16 दिन ले चलिस हे। जेमा 42 खेल सामिल रिहिसे। एमा 205 देस के अंदाजन 11000 खेलाड़ी मन अपन भागीदारी निभइन हे। अब 32 वाँ ओलम्पिक खेल सन 2020 म जापान के टोक्यो साहर म होही। पुराना जमाना…
Read Moreकोजन का होही
धर्मेन्द्र निर्मल के गज़ल संग्रह संपूर्ण काव्य सेव करें और आफलाईन पढ़ें
Read Moreकहिनी: तारनहार
परेमीन गली म पछुवाएच हे, धनेस दउड़त आके अंगना म हॅफरत खड़ा होगे। लइका के मिले लइका, सियान के मिले सियान..। नरेस ह धनेस ल देख खुसी के मारे फूले नई समइस। चिल्लावत बताइस-दाइ ! बुवा मन आगे। भगवनतीन कुरिया ले निकलके देखथे डेढ़सास परेमीन अउ भॉचा धनेस अंगना म खडे हे। भगवन्तिन लोटा भर पानी देके परेमीन संग जोहार भेंट करिस। धनेस के पाँव छूवत चउज करत हॉंसत कहिथे – अलवइन भाँचा फेर आगे दई। भगवन्तिन के गोठ ल सुन के जम्मो झन हाँस भरिन। पाँव छूते साठ भगवन्तिन…
Read Moreधर्मेन्द्र निर्मल के पाँच गज़ल
कौड़ी घलो जादा हे मोल बोल हाँस के कौड़ी घलो जादा हे मोल बोल हाँस के। एकलउता चारा हे मनखे के फाँस के।। टोर देथे सीत घलो पथरा के गरब ला। बइठ के बिहिनिया ले फूल उपर हाँस के।। सबे जगा काम नइ आय, सस्तर अउ सास्तर। बिगर हाँक फूँक बड़े काम होथे हाँस के।। हाँसी बिन जिनगी के, सान नहीं मान नहीं। पेड़ जइसे बिरथा न फूलय फरय बाँस के।। दुनिया म एकेच ठन चिन्हा बेवहार हँ। घुनहा धन तन अउ भरोसा नइहे साँस के।। कोन ल कहन अपन…
Read Moreकुकुर कटायन
रामरमायन तिंहा कुकुर कटायन कहिथे। जिंहा सुभ काम के सुभारंभ होथे उँहे कुकुरमन के पहुँचना जरूरी होथे। कुकुर मन के ए दखलंदाजी ल देखके कभू कभू अइसे भरम होय लगथे के सुभ असुभ कोनो किसिम के काम होवय इंकर बिना असंभो हे। जइसे छट्ठी होवय चाहे मरनी नेता मन के उद्घाटन बिना असंभो होथे। कोनो मेर दू चार झिन मिलके बने बिचार-बिमर्स करत रहिबे। ओतके बेरा कुकुर मन आके झगरा होवत बिचार ल फोर भंगला देथे। बने बने सोचत चुप्पे अपन रस्ता म जावत रहिबे। इन अपने अपन भूंके लगथे।…
Read Moreनकाब वाले मनखे
अभीन के समे हॅ बड़ उटपटॉग किसम के समे हे। जेन मनखे ल देख तेन हॅ अपन आप ल उॅच अउ महान देखाए के चक्कर म उॅट उपर टॉग ल रखके उटपटॉग उदीम करे मा मगन हे। ंअइसन मनखे के उॅट हॅ कभू पहाड़ के नीचे आबेच नइ करय। आवस्कता अविस्कार के महतारी होथे ए कथनी ल मथानी म मथके अइसन मनखे मन लेवना निकाले बर गजब किसम किसम के उदीम करत रहिथे। मिहनत करइया मन के कभू हार नइ होवय सही बात घलो ए। इन मन हॅ आजकल अहसनेच…
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