अपन-अपन समझ

जब मेहा अपन चार बछर के बेटा रामसरूप ला बने तउल के देखथंव, त जान परथे के वोमे भोलापन अउ सुनदरई नई रहि गे, जउन दू बछर पहिली रिहिस हे। वो अइसे लागथे जाना-माना अपने गुस्सेलहा बानी म लाल आंखी मोला देखावत हे। वोकर ये हालत ला देख के मोर करेजा कांप जथे अउ मोला अपन वो बचन के सुरता आ जथे जउन दू बछर पहिली मरन सैय्या म परे वोकर महतारी ल दे रेहेंव। मनखे अतेक सुवारथी अउ अपन इंद्री के गुलाम हे के अपन फरज ला कोनो बखत…

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भुलवारे बर तब अंजोर के गजब गीत गाथे : डॉ. परदेशीराम वर्मा के गीत

कलेचुप बइगा हा जब अंधियारी घपटाथे, भुलवारे बर तब अंजोर के गजब गीत गाथे। बडे गौटिया कहिथंन जेला पांव परइया मन, उही गुनी मनखे के दिखथे बइहा कस लच्छन मनखे मनखे ले जादा वोला बिखहर हा भाथे। भुइयां, भाखा, दाई के जस गाथे नवां नवां, भीतर-भीतर गजब खोड़ पिरीत उपर छांवा। बड़ा गियानी हे मुस्किल म अच्छर उमचाथे। पनही चमकाके ररुहा, बड़का मालिक बनगे, परछी के परदेशी भईया के बिल्डिंग तनगे जुग के जमुना म बइठे हे कोन किसन नाथे। लिख लिख मरिन सियान हमर तेमन ला बिजराथे, जकला भकला…

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दूसरइया बिहाव

जब मेहा अपन चार बछर के बेटा रामसरूप ला बने तउल के देखथंव, त जान परथे के वोमे भोलापन अउ सुनदरई नई रहि गे, जउन दू बछर पहिली रिहिस हे। वो अइसे लागथे जाना-माना अपने गुस्सेलहा बानी म लाल आंखी मोला देखावत हे। वोकर ये हालत ला देख के मोर करेजा कांप जथे अउ मोला अपन वो बचन के सुरता आ जथे जउन दू बछर पहिली मरन सैय्या म परे वोकर महतारी ल दे रेहेंव। मनखे अतेक सुवारथी अउ अपन इंद्री के गुलाम हे के अपन फरज ला कोनो बखत बेरा म…

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छत्‍तीसगढ़ी गज़ल – हम परदेशी तान ददा

मुरहा पोटरा आन ददा, लात ल तंय झन तान ददा। पानी टेक्‍टर भुइया तोर, हमला नौकर जान ददा। छेरी पठरू गाय गरू, तोरेच आय दइहान ददा। पांव परे म हम अव्‍वलदेन करेजा चान ददा। चमकाहू तलवार तभो, करबो हम सनमान ददा। तुंहर असन संग का लड़बो, हमरे हे नकसान ददा। मालिक आंही बाहिर ले, इंहा इही फरमान ददा। नइये जिंकर कहूँ थिरवांह, छत्‍तीसगढि़या जान ददा। आव तुहीं मन घर मालिक हम परदेशी तान ददा। डॉ.परदेशीराम वर्मा एलआईजी 168, आमदी नगर, भिलाई.

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