राजधानी म पइठ के , परभावली म बइठ के । हमर बर मया बरसाथे , हमींच ला अइंठ के । रिद्धी सिद्धी पाके , मातगे जोगी जति । ठेमना गिजगिजहा , पांच बछरिया गनपति । बड़का बुढ़हा तरिया के , करिया भुरवा बेंगवा । अनखाहा टरटरहा , देखाये सबला ठेंगवा । पुरखौती गद्दी म खुसरे खुसरे , बना लिन अपन गति । अपनेच अपन बर फुरमानुक , पांच बछरिया गनपति । लोट के , पोट के , भोग लगाये वोट के । न करम के , न धरम के ,…
Read MoreTag: Gajanan prasad dewangan
कहानी : बड़का तिहार
गुरूजी पूछथे – कते तिहार सबले बड़का आय ? समझ के हिसाब से कन्हो देवारी, दसरहा अऊ होली, ईद, क्रिसमस, त कन्हो परकास परब ला बड़का बतइन। गुरूजी पूछथे – येकर अलावा ……? लइका मन नंगत सोंचीन अऊ किथे – पनदरा अगस्त अऊ छब्बीस जनवरी। कालू हा पीछू म कलेचुप बइठे रहय। गुरूजी पूछथे – तैं कुछु नी जानस रे ? ओला तिर म बलइस। कालू हा अपन चैनस के आगू कोती ला, पेंठ म खोंचे रहय, पीछू कोती, चैनस हा पेंठ ले बाहिर रहय। ओकर बिचित्र पहिनावा देख, लइका…
Read Moreगरीब के देवारी
गरीब के देवारी का पूछथस ? संगवारी। जेकर कोठी म धान हे ओखर मन आन हे। पेट पोसा मजदूर बर सबर दिन अंधियारी ॥ का पूछथस संगवारी – गरीब के देवारी। उघरा नंगरा लइका के सुसवाय महतारी। जिनगी भर झेलथे – करम छंड़हा , लाचारी। का पूछथस संगवारी – गरीब के देवारी। दुख जेकर नगदी हे सुख हे उधारी। भूख ओकर सच हे भरपेट – लबारी। का पूछथस संगवारी – गरीब के देवारी। दुनिया अबड़ अबूज हे बिन मुड़ी के भूत हे। ईमानदार बइठे हे ठाठा – बेईमान रोज छेवारी…
Read Moreसोंच समझ के चुनव सियान
छत्तीसगढ़ ला गजब मयारू, सेवक चाही अटल जुझारू, अड़बड़ दिन भोरहा म पोहागे, निरनय लेके बेरा आगे। पिछलग्गू झन बनव, सुजान, सोंच समझ के चुनव सियान ।। करिया गोरिया जम्मो आही, रंग रंग के सब बात सुनाही, जोगी आही भोगी आही, सत्ता लोलुप रोगी आही। कोन हितू, कोन बेंदरा मितान, सोंचा समझ के चुनव सियान।। एक झिन बड़का सरग नेसेनी, दूसर के अदभुत हे करनी, ये नाग के नथइया, ओ सांप नचइया, दुबिधा म मत परव रे भइया। रसता सुझाही कुलेस्वर भगवान, सोंच समझ के चुनव सियान।। नहि खुरसी के…
Read Moreअवइया मुख्यमनतरी कइसन हो ?
घात जियानथे जऊन ला, गरीब अऊ अनाथ के पीरा, जऊन नेता के अंतस निये, जइसे तिनफंकिया खीरा। जेला गजब सुहाथे, छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़िया हीरा , जऊन नी बजावय, हमर पेट ला जइसे ढोल मनजीरा। छत्तीसगढ़ के हित के खातिर, जूझ मरे चाहे जइसन हो। जी चाहत हे छत्तीसगढ़ के अवइया मुख्यमनतरी अइसन हो। पाछू ला गोड़ेली मार, मुड़भसरा ओला गिराके, फेर, सबके देखऊ मा उही ला, पुचकारथे गजब उठाके। मंच – सजवा, माला पहिर के, जय जय कार कराके, मानसिक आरथिक सबो रूप मा, पक्का गुलाम बनाके। राज करइया नइ चाही,…
Read Moreपइधे गाय कछारे जाय
पइधे गाय कछारे जाय भेजेन करके, गजब भरोसा। पतरी परही, तीन परोसा। खरतरिहा जब कुरसी पाइन, जनता ल ठेंगवा चंटवाइन। हाना नोहे, सिरतोन आय, पइधे गाय, कछारे जाय ॥ ऊप्पर ले, बड़ दिखथे सिधवा, अंतस ले घघोले बघवा। निचट निझमहा, बेरा पाके, मुंहूं पोंछथें, चुकता खा के। तइहा ले टकरहा आय, पइधे गाय कछारे जाय ॥ गर म टेम्पा, घंटी बांधव, चेतलग रहि के बखरी राखव। रूंधना टोरिस हरहा गरूवा, घर के घला, बना दिस हरूवा। हरही संग, कपिला बउराय। हाना नोहे, सिरतोन आय, पइधे गाय, कछारे जाय ॥ –गजानंद…
Read Moreकइसे उदुप ले डोकरा होगे
कइसे उदुप ले डोकरा होगे जंगल के बघवा तेंहा, कइसे चऊंर–चाबे बोकरा होगे। एक कोरी म छै बछर कम, कइसे उदुप ले, डोकरा होगे।। जौन आथे तौन, बखरी ला उजारथे। पेट ला हमर काट के, देखावटी सुलारथे। छत्तीसगढ़ ल चरागन भुंइया बना लीन, चोरहा मन चौरस्ता म कोतवाल ल ललकारथे। मिठलबरा मन के डिपरा पेट, हमर बीता भर खोदरा होगे। तोर रग रग म, पैरी महानदी उछलथे, तोर बहां म सिहावा कांदा डोंगर उचकथे। सुरूज कस जोत तोर आंखी बरथे। तोर भाखा गरू, बादर असन गरजथे ॥ अपन आप ल…
Read Moreबसंत बेलबेलहा
सर सरात हवा संग जुन्ना पाना झरथे । फोंकियाये रूख के फुनगी बाती कस बरथे । रात लजकुरहीन संग दिन बरपेलिहा । दिल्लगी करथे चुपचुप बसंत बेलबेलहा । आमा जम्मो मऊरगे बउराये मन बऊरगे । चुचवाय संगी संऊरगे ललचाये अबड़ दंऊड़गे । सृस्टि दुलहिन बिहाये बर बरतिया बनगे ठेलहा । दुलहा बनके आये हे बसंत बेलबेलहा । हरियर डारा म बइठके कोइली मन कुहके । भौंरा अऊ तितली मन फूल के रस चुंहके । रसरसाय के बेरा आगे रहय कहूं नइ तनहा । फेर गुदगुदावथे रति ल रितुराज बेलबेलहा ।…
Read Moreपुरखा मन के चिट्ठी
जय भारत , जय धरती माता सबले उप्पर म लिखे हवय । सब झन बर , गजब मया करे हे , लागत हे सऊंहत दिखत हवय । हली भली रहिहहु सब बेटा , हम पुरखा मन चहत हबन । करम धरम हे सरग नरक , बिन सवारथ के कहत हबन । धुंआ देख के करिया करिया , छाती हर गजब धड़कथे । कोन जनी का बीतत होही , रहि रहि के आंखी फरकथे । एके माई के पिला सब झन , सुनता म रहिहऊ भईया । चंद रोजी जिनगी म…
Read Moreपांच बछरिया गनपति
रजधानी म पइठ के परभावली म बइठ के हमर बर मया दरसाऐ हमीच ला अइठ के । रिद्धी सिद्धि पा के मातगे जइसे जोगीजति ठेमना गिजगिजहा पांच बछरिया गनपति ।। बड़े बुढ़वा तरिया के करिया भुरवा बेंगवा अनचहा टरटरहा देखाये सब ला ठेंगवा । पुरखऊती गद्दी म खुसरे खुसरे बना लीन येमन अपन गति अपनेच अपन बर फुरमानुक पांच बछरिया गनपति ।। लोट के पोट के भोग लगाये बोट के न करम के न धरम के परवाह निये खोट के मेहला घर धनिया के छिनार घला अबड़ सति जय हो…
Read More