किसानी के दिन आगे

नांगर अऊ तुतारी के जुड़ा अऊ पंचारी के रापा गैंती कुदारी के मनटोरा मोटियारी के मनबोध ला सुरता आगे किसानी के दिन आगे । कबरा लाल धौंरा के खुमरी अऊ कमरा के आनी बानी रंग मोरा के बांटी अऊ भौंरा के भाग फेर जागगे किसानी के दिन आगे । बादर अऊ पानी के खपरा खदर छानी के डोकरा डोकरी कहिनी के लिमऊ आमा चटनी के दिन फेर लकठियागे किसानी के दिन आगे । धान खेती करइया के जामुन लीम छईंया के गीत ददरिया गवइया के गोंदली बासी अमरईया के सबके…

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कबिता: पइधे गाय कछारे जाय

भेजेन करके, गजब भरोसा । पतरी परही, तीन परोसा । खरतरिहा जब कुरसी पाइन, जनता ल ठेंगवा चंटवाइन । हाना नोहे, सिरतोन आय, पइधे गाय, कछारे जाय ॥ ऊप्पर ले, बड़ दिखथे सिधवा, अंतस ले घघोले बघवा । निचट निझमहा, बेरा पाके, मुंहूं पोंछथें, चुकता खा के । तइहा ले टकरहा आय, पइधे गाय कछारे जाय ॥ गर म टेम्पा, घंटी बांधव, चेतलग रहि के बखरी राखव । रूंधना टोरिस हरहा गरूवा, घर के घला, बना दिस हरूवा । हरही संग, कपिला बउराय । हाना नोहे, सिरतोन आय, पइधे गाय,…

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छत्तीसगढ़ी

हमर बोली छत्तीसगढ़ी जइसे सोन्ना चांदी के मिंझरा , सुघ्घर लरी । गोठ कतेक गुरतुर हे ये ला जानथें परदेसी । ये बोली कस , बोली नइये – मान गे हें बिदेसी ॥ गोठियाय म , त लागथेच – सुने म घला सुहाथे , देवरिहा फुलझरी ॥ मया पलपला जथे सुन के ये दे बोली । अघा जथे जी हा – भर जथे दिल के झोली ॥ मन हरिया जथे धान बरोबर – जइसे , पा के सावन के झड़ी । अऊ बोली मन डारा खांधा – छत्तीसगढ़ी , रूख…

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