भकाड़ू अऊ बुधारू के बीच म, घेरी बेरी पेपर म छपत माफी मांगे के दुरघटना के उप्पर चरचा चलत रहय। बुधारू बतावत रहय – ये रिवाज हमर देस म तइहा तइहा के आय बइहा, चाहे कन्हो ला कतको गारी बखाना कर, चाहे मार, चाहे सरेआम ओकर इज्जत उतार, लूट खसोट कहीं कर …….. मन भरिस तहन सरेआम माफी मांगले …….। हमर देस के इही तो खासियत हे बाबू …….. इहां के मन सिरीफ पांच बछर म भुला जथे अऊ कन्हो भी, ऐरे गैरे नत्थू खैरे ला, माफी दे देथे। भकाड़ू…
Read MoreTag: Harishankar Gajanan Prasad Dewangan
व्यंग्य : पहिचान
पिरथी के बढ़ती जनसंखिया ला देख के, भगवान बड़ चिनतित रहय। ओहा पिरथी के मनखे मनला, दूसर गरह म बसाये के सोंचिस। पिरथी के मन दूसर गरह म, रहि पाही के नहि तेकर परयोग करे बर, हरेक देस के मनखे कस, डुपलीकेट मनखे के सनरचना करीस। इंकर मन के रेहे बर घर, बऊरे बर समान, खाये बर अनाज, पहिरे बर कपड़ा उपलब्ध करा दीस। अलग अलग देस के डुपलीकेट मनखे मन बर, अलग अलग जगा, निरधारित कर दीस। देस के हिसाब से, ऊंकर संसकार अऊ रीत रेवाज ला ऊंकर दिल,…
Read Moreलघुकथा : अमर
आसरम म गुरूजी, अपन चेला मनला बतावत रहय के, सागर मनथन होइस त बहुत अकन पदारथ निकलीस । बिख ला सिवजी अपन टोंटा म, राख लीस अऊ अमरित निकलीस तेला, देवता मन म बांट दीस, उही ला पीके, देवता मन अमर हे । एक झिन निचट भोकवा चेला रिहीस वो पूछीस – एको कनिक अमरित, धरती म घला चुहीस होही गुरूजी …..? गुरूजी किथे – निही…… एको बूंद नी चुहे रिहीस जी …। चेला फेर पूछीस – तुंहर पोथी पतरा ला बने देखव, एक न एक बूंद चुहेच होही …?…
Read Moreव्यंग्य : जनता गाय
सरग म, पिरथी के गाय मन ला, दोरदिर ले निंगत देखिस त, बरम्हाजी नराज होगे। चित्रगुप्त ला, कारन पूछिस। चित्रगुप्त किथे – मरे के पाछू, गाय कस परानी मन अऊ कतिहां जाही भगवान, तिहीं बता भलुक ? बरम्हाजी पूछिस – अतेक अकन, एके संघरा मरिस तेमा ? चित्रगुप्त किथे – भाग म, जतका दिन जिये के हे, तेकर ले जादा, कन्हो ला जियन देहस का तेमा …..? रिहिस बात कारन के ….., कन्हो किथे, भूख ले मरे हे, कन्हो किथे, जाड़ म मरे हे …काकर ला पतियांवव। गाय ला भेजत…
Read Moreमोर गांव म कब आबे लोकतंत्र
अंगना दुवार लीप बोहार के, डेरौठी म दिया बार के – अगोरय वोहा हरेक बछर। नाती पूछय – कोन ल अगोरथस दाई तेंहा। डोकरी दई बतइस – ते नि जानस रे, अजादी आये के बखत हमर बड़े –बड़े नेता मन केहे रिहीन, जब हमर देस अजाद हो जही, त हमर देस म लोकतंत्र आही। उही ल अगोरत हंव बाबू। नाती पूछिस – ओकर ले का होही दाई ? डोकरी दई किथे – लोकतंत्र आही न बेटा, त हमर राज होही, हमर गांव के बिकास होही। मनखे मनखे में भेद नि…
Read Moreपरजातंत्र
परजातंत्र उपर, लइकामन म बहेस चलत रहय। बुधारू किथे – जनता के, जनता मन बर, जनता दुआरा सासन ल, परजातंत्र कहिथें अऊ एमा कोई सक निये। भकाड़ू पूछीस – कते देस म अइसन सासन हे ? मंगलू किथे – हमर देस म ……, इहां के सासन बेवस्था, पिरथी म मिसाल आय। भकाड़ू किथे – तोर मिसाल कहूं डहर जाय, हमर देस म का सहींच म परजातंत्र सासन हे ? अरे हव रे …..के घांव बताहूं, इही परजातंत्र के जनम दिन म, हरेक बछर छब्बीस जनवरी के उतसव मनाथन – मंगलू…
Read Moreकागज के महल
अमबेडकर के मुरती के आघू म, डेंहक डेंहक के रोवत रहय। तिर म गेंव, ओकर खांद म हाथ मढ़हा के, कारन पुछत चुप कराहूं सोंचेंव फेर, हिम्मत नी होइस, को जनी रोवइया, महिला आय के पुरूस ……? एकदमेच तोप ढांक के बइठे रहय, का चिनतेंव जी ……। चुप कराये खातिर, जइसे गोठियाये बर धरेंव, ओहा महेला कस अवाज म, चिचिया चिचिया के, गारी बखाना करे लगिस। मोला थोकिन अच्छा नी लगिस। ओकर तिर जाके, गारी बखाना ले बरजे बर, ओकर खांद म, जइसे अपन हाथ मढ़हाये बर धरेंव, ओला को जनी मोर इसपर्स के का…
Read Moreचुनाव आयोग म भगवान : व्यंग्य
नावा बछर के पहिली बिहाने, भगवान के दरसन करके, बूता सुरू करे के इकछा म, चार झिन मनखे मन, अपन अपन भगवान के दरसन करे के सोंचिन। चारों मनखे अलग अलग जात धरम के रिहीन। भलुक चारों झिन म बिलकुलेच नी पटय फेर, जम्मो झिन म इही समानता रहय के, चाहे कन्हो अच्छा बूता होय या खराब बूता, ओला सुरू करे के पहिली, अपन देवता ला जरूर सुमिरय। बिहिनिया ले तियार होके निकलीन। मनदीर ले भगवान गायब रहय, मसजिद ले अल्लाह कती मसक दे रहय, चर्च ले ईसा गायब त,…
Read Moreमन के बात
इतवार के दिन बिहाने बेरा गांव पहुंचे रहय साहेब हा। गांव भर म हाँका परगे रहय के लीम चौरा म सकलाना हे अऊ रेडिया ले परसारित मन के बात सुनना हे। चौरा म मनखे अगोरत मन के बात आके सिरागे, कनहो नी अइन। सांझकुन गांव के चौपाल म फेर पहुंचगे साहेब अऊ पूछे लागीस। मुखिया किथे – काये मन के बात आये साहेब ! कइसे मनखे अव जी, हमर देस के मुखिया अतेक दिन ले अपन मन के बात सुनावत हे अऊ तूमन जानव घला निही – साहेब किहीस। गांव…
Read Moreखतरनाक गेम
सरकार हा, ब्लू व्हेल कस, खतरनाक गेम ले होवत मऊत के सेती, बड़ फिकर म बुड़े रहय। अइसन मऊत बर जुम्मेवार गेम उप्पर, परतिबंध लगाये के घोसना कर दीस। हमर गांव के एक झिन, भकाड़ू नाव के लइका हा, जइसे सुनीस त, उहू सरकार तीर अपन घरवाले मन के, एक ठिन ओकरो ले जादा खतरनाक गेम उप्पर, परतिबंध लगाये बर, गोहनाये लागीस। सरकार बिन कुछ सुने, मना कर दीस। पढ़हे लिखे भकाड़ू, कछेरी पहुंचगे, नालीस कर दीस। कछेरी म जज पूछीस – तुंहर गेम कइसे खतरनाक हे तेमा, परतिबंध लगवाये…
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