लाली चूरी

तुलसी ह अंगना के धुर्रा ल रपोट रपोट के परदा रुंधे। पारा भर के लोग लइका सेकला के घरघुfधंया खेले। एक झन नोनी के दाइ बने एक झन बाबू के दाई। सुघ्घर पुतरी पुतरा के बिहाव ल रचै। लइकुसहा उमर के लइकुसहा नेंग जोग। उही बरतीया उही घरतीयाए उही लोकड़हीन उही बजनीया। नान नान पोरा चुकिया म साग भात चुरय। कमचिल के मड़वा म तेल हरदी चड़हय अउ भांवर परय। टूरा मन कनिहा म नंगारा बांधे। रोंगो बती अउ पानवाला बाबू गाना गा गा के गुदंग गुदंग नाचे। ये ठट्ठा…

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नान्हे कहिनी – दहकत गोरसी म करा बरसगे

ये बखत कतका जाड़ परिस अउ कतका गरमी रही येला प्रकृति के नारी छुवइया मन बने बताही। रेडियो अउ टीबी वाला मन ओकरे बात ल पतिया के सरी दुनिया म बात बगराथें। टीबी म संझा के समाचार सुन के मैं मुड़ी गोड़ ले गरम ओनहा पहिरेंव अउ रातपाली काम म जाय बर निकलेंव। गर्मी होवे चाहे ठंड, खाय बर कमाय ल परथे। दस बजती रात म पूरा शहर कोहरा ले तोपा गे रिहीस। गली म एक्का-दुक्का मनखे रिहीस। हमन गली के आखिरी कोन्टा म रिक्सा वाला के परिवार रिथे। कोनो…

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सइताहा – कहिनी

परेम के गौटिया घर अवई हा फलित होगे। चार महिना की बीते ले गौटनिन के पांव भारी होगे। दूनों परानी ल गजब खुसी होगे। मानो दुनिया के जम्मो सुख वोकर आगू मे आगे। लइका के लालन-पालन म दूनो परानी ह जम्मो बेरा ल पहा दय। सबो खेती -खार के देख-रेख ल परेम ह करय। एक दिन उदुप ले परेम ह गौंटिया घर ल छोड़के पटइल बाड़ा म रेहे ल चल दिस। वोकर मन के बात उही जाने मंगतू गजब पुछिस फेर परेम ह एक भाखा नई बकरिस।’ ब गांव म…

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