‘रामलाल कथे भाई मेहा दसमी पास होगेंव, ये ले मोर अंकसूची कहिके देखाय बर धरथे त देखथे पेपर ह ओकर ले गायब हो जाय रथे। वोला पेपर पढ़इया मन धरके लेग जाय रथे। रामलाल ल अड़बड़ दु:ख होथे। बिचारा के पीरा पहाड़ कस हो जथे।’ रामलाल बहुत खुश रिहिस अपन अंकसूची ल देखके वोला जतन के पेपर म तोप के अपन दुकान म लइस अपन बड़े भाई ल देखाये बर, भाई दुकान म नई राहे। अपन भाई के रद्दा जोहत-जोहत अंकसूची ल टेबुल म मड़ा दिस। ओखर भाई ह आ…
Read MoreTag: Jitendra Kumar Sahu “Sukumar”
नान्हे कहिनी : सिसटाचार
गियारह बजे के बेरा आय। मिथलेस अपन संगवारी मनसन गोठियात जात राहे, त परकास कथे-कइसे रे मिथलेस ! तेंहा अड़बड़ दिन बाद कॉलेज आय हाबस। आजकल तोर दरसन दुरलभ होगे हाबे। कहां जाथस दिखस निही। त मिथलेस कथे- बहुत बियस्त होगे हाबों यार, सबो डाहर ल देखे ल पड़थे घर डाहर घलो अड़बड़ बूता रथे। सबो झन पढ़इया लइका मन अपन-अपन किलास म जात रथे। ओतकीच बेर कॉलेज के प्रिंसपल ह आ जथे, अउ मिथलेस ल देखके कथे- ‘आप मेरे आफिस में आइए।’ मिथलेस ह कोन ल काहत हे कहिके…
Read Moreनान्हे कहिनी : सिसटाचार
गियारह बजे के बेरा आय। मिथलेस अपन संगवारी मनसन गोठियात जात राहे, त परकास कथे-कइसे रे मिथलेस ! तेंहा अड़बड़ दिन बाद कॉलेज आय हाबस। आजकल तोर दरसन दुरलभ होगे हाबे। कहां जाथस दिखस निही। त मिथलेस कथे- बहुत बियस्त होगे हाबों यार, सबो डाहर ल देखे ल पड़थे घर डाहर घलो अड़बड़ बूता रथे। सबो झन पढ़इया लइका मन अपन-अपन किलास म जात रथे। ओतकीच बेर कॉलेज के प्रिंसपल ह आ जथे, अउ मिथलेस ल देखके कथे- ‘आप मेरे आफिस में आइए।’ मिथलेस ह कोन ल काहत हे कहिके…
Read Moreनान्हे कहिनी : लबारी
‘रामलाल कथे भाई मेहा दसमी पास होगेंव, ये ले मोर अंकसूची कहिके देखाय बर धरथे त देखथे पेपर ह ओकर ले गायब हो जाय रथे। वोला पेपर पढ़इया मन धरके लेग जाय रथे। रामलाल ल अड़बड़ दु:ख होथे। बिचारा के पीरा पहाड़ कस हो जथे।’ रामलाल बहुत खुश रिहिस अपन अंकसूची ल देखके वोला जतन के पेपर म तोप के अपन दुकान म लइस अपन बड़े भाई ल देखाये बर, भाई दुकान म नई राहे। अपन भाई के रद्दा जोहत-जोहत अंकसूची ल टेबुल म मड़ा दिस। ओखर भाई ह आ…
Read Moreमया के दीया
घर कुरिया, चारों मुड़ा होही अंजोर फुलवारी कस दिखही महाटी अऊ खोर जुर मिलके पिरित के रंग सजाबो रे आगे देवारी मया के दीया जलाबो रे बैरी भाव छोड़ के जम्मो बनव मितान जइसे माटी के रखवारी करथे किसान बो बोन जइसे बीजा ओइसने पाबो रे आगे देवारी मया के दीया जलाबो रे मने मन मुस्कुराये खेत म धान के बाली भुइयां करे सिंगार, लुगरा पहिरे हरियर लाली गांव के जम्मो देवी-देवता ल नेवता दे आबो रे आगे देवारी मया के दीया जलाबो रे असीस दिही लक्ष्मीदाई होही उपकार लइका…
Read Moreमया के दीया
घर कुरिया, चारों मुड़ा होही अंजोरफुलवारी कस दिखही महाटी अऊ खोरजुर मिलके पिरित के रंग सजाबो रेआगे देवारी मया के दीया जलाबो रेबैरी भाव छोड़ के जम्मो बनव मितानजइसे माटी के रखवारी करथे किसानबो बोन जइसे बीजा ओइसने पाबो रेआगे देवारी मया के दीया जलाबो रेमने मन मुस्कुराये खेत म धान के बालीभुइयां करे सिंगार, लुगरा पहिरे हरियर लालीगांव के जम्मो देवी-देवता ल नेवता दे आबो रेआगे देवारी मया के दीया जलाबो रेअसीस दिही लक्ष्मीदाई होही उपकारलइका सियान सब ल मिलही मया दुलारबांट के खुशी जग म अपन खुशी पाबो…
Read Moreदू ठो नान्हे कहिनी
आदिमानव सुकारो के छुट्टी झटकुन हो जथे। रद्दा म खेलत-खेलत घर आथे अउ अपन बस्तर ल पठेरा म मड़हा के हडिया-कुडेड़ा ल मांजे बर बोरींग डाहर जाथे, रातकुन घर म पढ़ेबर बइठेन ताहन ओकर बबा ह पूछथे, तो गुरूजी मन का पढ़हईस गोई! त सुकारो ह लजावत कहिथे- आदिमानव के बारे म बतइसे। आदिमानव मन ह पहिली उघरा किंजरे कथे। ओतकीच बेर खेत डाहर ले मोहन आथे अउ टी.वी. ल चालू करके ताहन एक्स एम चैनल ल लगाथे त ओमे ‘कांटा लगाऽऽऽ’ कहिके अड़बड़ झन टूरी मन नाचत रथे। तेला…
Read Moreजिनगी ल बचाव भइया : जितेन्द्र कुमार साहू ‘सुकुमार’ के कबिता
जिनगी बड़ कीमती हे बचाव भइयारही-रहिके मुंहू म आगी झन लगाव भइयातुहर पर्डरा दांत होही बिरबिट करियागुटखा, तम्बाकू झन खावव भइयाबड़ मेहनत करके सकेले हाबे पुरखा मनधनहाल धुंगिया म झन उड़ावव भइयाबेरा ले पहिली हो जहू तुमन डोकराअतेक जादा झन इतरावव भइयाये सबो नसा के गलत परभाव हरे ताव म अतेक झन चिचयाव भइयातुमर बढ़िया रहूं तब रही हमर राजदेस, समाज अउ हमर गांव भइयामान लो ये अड़हा सुकुमार के बात लमऊत ल झटकुन झन बलाव भइयाठन-ठन ले सुक्खा तरिया होगे भाटोमोर मया के किसानी परिया होगे भाटोआगी फेकत हे…
Read Moreकबिता : नवा हे बिहान
मोर मयारु छत्तीसगढ़ गजब हे महान गा। धरती दाई के सेवा करे लइका, सियान गा॥ तन म पसीना ओगार के चोवा रुकोवत हे। खेत-खार म मोर नगरिहा, करम के बीजा बोवत हे॥ ये अड़हा किसान ल नइए गरब गुमान गा। धरती दाई के सेवा करे लइका, सियान गा॥ कोलकी-कोलकी बइला रेंग, बइला के सिंग म माटी गा। नवा बहुरिया लाए हाबे चटनी संग म बासी गा॥ रापा, कुदारी, नागर कोप्पर जेकर मित-मितान गा। धरती दाई के सेवा करे लइका, सियान गा॥ बलावय वोला चिरई चुरगुन अऊ मेड़ पार गा। सबके…
Read Moreघर म नाग देव भिंभोरा पूजे ल जाय : नान्हे कहिनी
पीरा म गोहार पारत सुशीला अपन बेटा ल कथे, रूपेश मोला पन्दराही होगे कनिहा पीरा म मरत-मरत। फेर आज उदूक ले जादा बाड़ गे तइसे लागत हे। मोर देह के जम्मो हाड़ा ह एके जगा अरहजगे तइसे लागथे बेटा, बने असन डॉक्टर ल देखा देते कथो- पीरा म कलपत अपन दाई ल देख नई सकिस अऊ ओतकीच बेर अपन होण्डा म बइठार के सहर डाहर लेग के बड़े असन डॉक्टर ल देखाईस डॉक्टर ह एक कोरी गोली ल धरा दिस, देखते-देखत महिना सिरागे फेर कुछू नई होईस, फेर वोकर ले…
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