गहना गुरिया : चौपाई छंद

जेवर ये छत्तीसगढ़ी, लिखथे अमित बखान। दिखथे चुकचुक ले बने, गहना गरब गुमान। नवा-नवा नौ दिन चलय, माढ़े गुठा खदान। चलथे चाँदी सोनहा, पुरखा के पहिचान।। पहिरे सजनी सुग्घर गहना, बइठे जोहत अपने सजना। घर के अँगना द्वार मुँहाटी, कोरे गाँथे पारे पाटी।~1 बेनी बाँधे लाली टोपा, खोंचे कीलिप डारे खोपा। फिता फूँदरा बक्कल फुँदरी, कोरे गाथें सुग्घर सुँदरी।~2 कुमकुम बिन्दी सेन्दुर टिकली, माथ माँग मोती हे असली। रगरग दमदम दमकै माथा, कहत अमित हे गहना गाथा।~3 लौंग नाक नग नथली मोती, फुली खुँटी दीया सुरहोती। कान खींनवा लटकन तुरकी,…

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धरती मँइयाँ : चौपाई छन्द

नँदिया तरिया बावली, भुँइयाँ जग रखवार। माटी फुतका संग मा, धरती जगत अधार।। जल जमीन जंगल जतन, जुग-जुग जय जोहार। मनमानी अब झन करव, सुन भुँइयाँ गोहार।। पायलगी हे धरती मँइयाँ, अँचरा तोरे पबरित भुँइयाँ। संझा बिहना माथ नवावँव, जिनगी तोरे संग बितावँव।~1 छाहित ममता छलकै आगर, सिरतों तैं सम्मत सुख सागर। जीव जगत जन सबो सुहाथे, धरती मँइयाँ मया लुटाथे।~2 फुलुवा फर सब दाना पानी, बेवहार बढ़िया बरदानी। तभे कहाथे धरती दाई, करते रहिथे सदा भलाई।~3 देथे सबला सुख मा बाँटा, चिरई चिरगुन चाँटी चाँटा। मनखे बर तो खूब…

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विश्व जल संरक्षण दिवस : सार छंद मा गीत – पानी जग जिनगानी

पानी जग जिनगानी मनवा, पानी अमरित धारा। पानी बिन मुसकुल हे जीना, पानी प्रान पियारा। जीव जगत जन जंगल जम्मो, जल बिन जर मर जाही। पाल पोस के पातर पनियर, पानी पार लगाही। ए जग मा जल हा सिरतो हे, सबके सबल सहारा। पानी जग जिनगानी मनवा, पानी अमरित धारा।1 तरिया नँदिया लहुटय परिया, धरती दाई रोवय। रुख राई हा ठुड़गा ठुँठवा, बादर बरसा खोवय। मनखे के हे ए सब करनी, भोगय जग संसारा। पानी जग जिनगानी मनवा, पानी अमरित धारा।2 राहत भर ले सेखी मारे, भर भर उलचे भारी।…

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हिन्दू नवा बच्छर के बधाई..

आज फेसन के युग हे। ये बात सोलाआना सिरतोन हे फेर फेसन के चलन मा अपन जरी कटई हा अलहन ला नेवता देवई हरय। आज बिदेशी जीनिस ला अपनाय के चस्का मा अपन देशी मान मरजाद ला घलाव मेटावत चले जाथन। अइसने एकठन नवा फेसन हे 31 दिसंबर के अधरतिहा हो हल्ला करत नवा बच्छर के सुवागत करई। फेर सिरतोन मा एहा हमर भारतीय नवा बच्छर नो हे। पबरित भारत भुँइयाँ के शान अउ मान दु हजार ले जादा जुन्ना विक्रम संवत हा हरय जेखर सुग्घर सुरुवात चइत अंजोरी पाख…

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नवरात मा दस दोहा

1~भक्ति भाव भक्कम भरे, बंदन बदन बुकाय। राम-राम बड़ जीभ रटे, छूरी पीठ लुकाय। 2~ चंदन चोवा चुपर के, सादा भेस बनाय। रंगरेलिहा मन हवै, अंतस जबर खखाय। 3~जप-तप पूजा पाठ ले, नइ छूटय जी पाप। मन बैरागी जे करय, वोला का संताप। 4~ माया मोय मा मन रमे,भगवन मंदिर खोज। अंतस अपने झाँक ले, प्रभू दरस हे रोज। 5~ नौ दिन देवी देहरी, भंडारा दिनरात। लांघन महतारी मरे, कइसे बनही बात। 6 ~देवी सेवा जस करे, करथे कैना भोज। महतारी के कोख मा, बेटी हतिया रोज। 7~तन ला तपसी…

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छत्तीसगढ़ी गीत-ग़ज़ल-छंद-कविता

होगे होरी तिहार होगे – होगे होरी के, तिहार गा। कखरो बदलिस न,आदत ब्यवहार गा। करु बोली मा,अउ केरवस रचगे। होरी के रंग हा, टोंटा मा फँसगे। दू गारी के जघा, देय अब चार गा। कखरो बदलिस न,आदत ब्यवहार गा। टेंड़गा रेंगइया हा,अउ टेंड़गा होगे। ददा – दाई ,नँगते दुख भोगे। अभो देखते वो , मुहूँ फार गा। कखरो बदलिस न,आदत ब्यवहार गा। पउवा पियइया हा,अध्धी गटक दिस। कुकरी खवइया हा,बोकरा पटक दिस। टोंटा के कोटा गय , जादा बाढ़ गा। कखरो बदलिस न,आदत ब्यवहार गा। घर मा खुसर के,बरा-भजिया…

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नारी के महिमा भारी हे

हमर हिन्दू धरम मा नारी के दरजा ला नर ले ऊँच माने गे हावय। सबले सुग्घर बात हमर पुरखा के परमपरा मा हे के नारी ला देवी के रुप मा पूजे जाथे। हमर वेद पुरान अउ ग्रंथ मन मा घलाव नारी हा बिसेस इस्थान मा इस्थापित हावय। ए बात के प्रमान मनु स्मृति मा अइसन प्रकार ले हावय। यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:। यत्रे तास्तु न पूजयन्ते सर्वास्तफला: क्रिया।। मनु समृति अनुसार- जिहाँ नारी के मान, गउन अउ आदर-सत्कार होथे उहाँ देवता मन हा प्रसन्न रहीथें अउ जिहाँ अइसन…

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आल्हा छंद : वीर शिवाजी के शान

वीर शिवाजी जयंती 19 फरवरी वीर शिवाजी जनमे जग मा, शेर सँही ए राखिन शान। धन्य-धन्य महतारी ऊँखर, जनमीं जेमन पूत महान।।1 ददा शाहजी जीजा दाई, जनम धरे शिवनेरी धाम। नाँव छत्रपति जेखर अम्मर, कोटि-कोटि करँव प्रनाम।।2 नान्हें पन ले आज्ञाकारी, गुरू ददा दाई ला मान। देश भक्ति नस-नस मा दँउड़े, हाजिर राहँय धरके जान।।3 धरम-करम मा अघुवा आगर, सिक्छा-दिक्छा पुन्य प्रताप। सिक्छक माता सकल भवानी, सबले जादा छपगे छाप।।4 छदर-बदर सब हिन्दू परजा, करके सुन्ता सकला साथ। भारत भुँइयाँ भूसन राजा, तोर अमित हा लागय माथ।।5 कन्हैया साहू “अमित”…

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दामाखेड़ा धरम धाम के मेला

माघी पुन्नी मा चलव, दामाखेड़ा धाम। दरसन ले साहेब के,बनथे बिगड़े काम। मनखे हा समाज ले अलग अकेल्ला कभूच नइ रही सकय अउ मनखे ले धरम हा अलग नइ हो सकय। आज देश अउ दुनिया रंग-रंग मनखे हे ता ओखर संग रंग-रंग के धरम अउ संप्रदाय घलाव जुड़े हावय। ए मामला मा हमर छत्तीसगढ़ हा घलो आरुग नइ हे। इहों रिंगी-चिंगी धरम अउ संप्रदाय हावय। अइसने एकठन कबीर पंथ हमर छत्तीसगढ़ मा चलन मा हावय। कबीर पंथ के बिचार अउ बेवहार,विधि-विधान जस के तक इहों चलागत मा हे जइसे संसार…

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कोड़ो-बोड़ो- नवा बच्छर मा नवा उतसव*

> >> > > >> > *********************************************************************************** > >> > सबले पहिली आप सबो ला नवा बच्छर के नंगत बधई अउ शुभकामना > >> > हावय। > >> > मोर अंतस के इही उद्गार हे के सरी संसार हा हाँसत-गावत अउ मुसकावत नवा > >> > बच्छर के > >> > सुवागत करयँ अउ पूरा बच्छर भर हा बिघन-बाधा के बिन बित जावय। कोनो हा पाछू > >> > साल > >> > के कोनो गलती ला कोनो गलती ले झन दोहरावँय। नवा साल हा दगदग ले, रगरग ले >…

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