छोटे देवारी के खुशी भारी : देवउठनी एकादशी 31 अक्टूबर

हमर पुरखा मन के बनाय परमपरा हा आज तिहार बहार के नाँव धरागे हे। अइसन तीज-तिहार हा हमर जिनगी मा खुशी के रिंगी-चिंगी रंग ला भरथे। तिहार-बहार समाज मा एकता अउ भाईचारा के गुरतुर चासनी घोरथे।अइसन गुरतुर चसनी ले बंधाय एकता हा कभू छरियाय नहीं। हमर गवँई गाँव मा तिहार के अलगेच रंग-ढ़ंग हा दिखथे। सिधवा मनखे के जिनगी जीये के रंग-ढ़ंग घलाव सिधवा सोज बाय रथे। ए बात के प्रमान हमर गवँई-गाँव मा सोज्झे दिख जाथे। सुमता के एकठन अइसनहे तिहार हरय “जेठउनी तिहार” जउन हा धार्मिक अउ समाजिक…

Read More

दीया अउ जिनगी

अँजोर के चिन्हारी दीया हा हरय। बिन दीया के अंधियारी ला हराना बड़ मुसकुल बुता हे। अंधियारी हे ता दीया हे अउ दीया हे ता अँजोर हे। अंधियारी हा जब संझा के बेरा होथे ता अपन पसरा ला धीरे-धीरे पसराथे अउ जन मन ला अपन करिया रंग मा बोरथे। जभे अंधियारी हा जन मन ला मुसकुल मा डारथे तभे सबला दीया के सुरता आथे, दीया बारे के सुरता आथे। दीया हा जर-जर के अंधियारी ला खेदथे अउ अँजोर ला बगराथे। अँजोर बगरथे, बिहनिया होथे ता जम्मो झन मन हा दीया…

Read More

सुरहुत्ती तिहार

हमर हिन्दू समाज मा तिहार बहार हा सबके जिनगी मा बड़ महत्तम रखथे। पुरखा के बनाय रीति रिवाज अउ परम्परा हा आज तिहार के रुप रंग मा हमर संग हावय। अइसने एकठन तिहार हे जौन हा हिन्दू समाज मा अब्बड़ महत्तम के हावय जेला धनतेरस के तिहार कहीथन। हमर हिन्दू मन के सबले बड़े तिहार देवारी के दू दिन पहिली मनाय जाथे धनतेरस के तिहार जेला सुरहुत्ती घलाव कहे जाथे। ए सुरहुत्ती तिहार जौन हा धनतेरस के नाँव ले जग प्रसिद्ध हे एखर पाछू अलग-अलग मानियता हे। देवता अउ दानव…

Read More

तोरे अगोरा हे लछमी दाई

होगे घर के साफ सफाई, तोरे अगोरा हे लछमी दाई। घर अँगना जम्मों लिपागे, नवा अंगरक्खा घलो सिलागे। लेवागे फटक्का अउ मिठाई। तोरे अगोरा हे लछमी दाई।1 अंधियारी मा होवय अंजोर, दिया बारँव मैंहा ओरी ओर। हूम धूप अउ आरती गा के, पँईया परत हँव मैंहा तोर। बाँटव बताशा खुरहोरी लाई, तोरे अगोरा हे लछमी दाई।2 तोर बिना जग अंधियार, संग तैं ता रतिहा उजियार। तोर किरपा हा होथे जब, अन धन के बाढ़य भंडार। सरी सुख के तैं सदा सहाई, तोरे अगोरा हे लछमी दाई।3 कलजुग के तहीं महरानी,…

Read More

कारतिक महीना के महिमा

हमर हिन्दू पंचांग के हिसाब ले बच्छर भर के आँठवाँ महीना कारतिक महीना हा हरय जउन ला जबर पबरित महीना माने जाथे। कारतिक महीना के महत्तम बेद पुरान मन मा घलो हावय। हमर भारतीय संसकिरति मा समे के गिनती चंदा के चाल ले बङ पराचीन परमपरा के रूप मा भारत मा चले आवत हे। बाहिर परदेस मा समे के गिनती हा सुरुज नारायण के गती उपर चलथे। हमर पुरखा मन चन्दा ला हमर पिरिथवी के सबले लकठा एकठन अगास के पिन्ड जान के समे के गणना बर सबले बढिया साधन…

Read More

सरद पुन्नी के सार कथा

चार महीना चौमास के बीते ले सरद रितु के शुरुवात होय ला धर लेथे ता गुरतुर जाड़ हा तन मन ला मोहे ला धर लेथे। इही कुनकुनहा जाड़ मा सरद पुन्नी के वरत हा आथे। घर परवार जुरमिल के पुन्नी के रतिहा चंदा ले बरसे अमरित ला पाये खातिर रातभर एके जगा जुरिया जाथें। ए पुन्नी के वरत हा मन के सब्बो कामना ला पुरा करइया वरत हरय। सरद पुन्नी के गुन अउ महत्तम के कारन एखर अब्बड़ अकन नाँव घलाव हे। एला कोजागरी वरत, रास पूर्णिमा, कुमार वरत, अउ…

Read More

तन के साधु, मन के शैतान

ये दे नवरातरी हा आगे,मनखे मन के तन मा नौ दिन बर भक्ति के शक्ति समागे। बिन चप्पल के उखरा, दाढ़ी मेछा के बाढ़, मंद-मउँहा के तियाग, माथा ले नाक बंदन मा बुँकाय सिरिफ नौ दिन नारी के मान-गउन, कन्या के शोर-सरेखा। तहाँ ले सरी अतियाचार हा नारी देंह के शोभना बन जाथे। नारी देवी ले पाँव के पनही सिरिफ नौ दिन मा ही लहुट जाथे। सरी सरद्धा अउ भक्ति हा नौ दिन के बाद उतर जाथे। कन्या के नाँव सुनते साठ तरपौरी के गुस्सा हा तरवा मा चढ़त देरी…

Read More

असल रावन कोन

दशरहा मा रावन के पुलता ला जलाय के परंपरा हावय। ए हा बुराई मा अच्छाई के जीत के चिन्हारी हरय। समय के संग मा रावन के रंग-ढ़ंग हा घलाव बदलत जावत हे। हजारों ले लेके लाखों रुपिया के रावन ला सिरिफ परंपरा के नाँव मा घंटा भर मा फूँके के फेशन हा बाढ़त जावत हे। रावन के पुतला हा हर बच्छर बाढ़ते जावत हे। असल रावन हा घलाव समाज मा सुरसा के मुँह बरोबर सरलग बाढ़त हावय। जेती देखबे तेती रावन ले जादा जबरहा राक्छस फिरत हाँवय। रावन के अशोक…

Read More

हमर माँवली दाई के धाम

हमर नान्हें छत्तीसगढ़ राज ला उपजे बाढ़हे अभी खूब मा खूब सोला बच्छर होवत हे फेर छत्तीसगढ़ राज के नाँव के अलख जगावत कतको साल होवत हे। हमर छत्तीसगढ़ राज के जुन्ना इतिहास हा बड़ प्रसिद्ध अउ सुग्घर हावय। ए राज के बीचो-बीच मा शिवनाथ नदिया बोहावत हावय। इही शिवनाथ नदिया के दुनो पार मा अठारा-अठारा ठन गढ़ प्राचीन समे मा ठाढ़े रहीन। एखरे सेती ए राज के नाँव छत्तीसगढ़ पड़ीच हे अइसन कहे जाथे। इही छत्तीसगढ़ मा के एकठन गढ़ हमर गवँई-गाँव सिंगारपुर (माँवली) हा घलाव आय। इही गाँव…

Read More

सिरिफ नौ दिन के बगुला भगत

ये दे नवरातरी अवइया हे,मनखे मन नौ दिन बर बगुला भगत बनइया हे। बिन चप्पल के उखरा, दाढ़ी मेछा के बाढ़, मंद-मउँहा के तियाग, माथा ले नाक बंदन मा बुँकाय सिरिफ नौ दिन नारी के मान-गउन, कन्या के शोर-सरेखा। तहाँ ले सरी अतियाचार हा नारी देंह के शोभना बन जाथे। नारी देवी ले पाँव के पनही सिरिफ नौ दिन मा ही लहुट जाथे। सरी सरद्धा अउ भक्ति हा नौ दिन के बाद उतर जाथे। कन्या के नाँव सुनते साठ तरपौरी के गुस्सा हा तरवा मा चढ़त देरी नइ लागय। बेटी…

Read More