नवा साल आगे रे, अपन जिनगी ल गढ़। मुड़ के पाछू मत देख, आघू-आघू बढ़॥ पहागे रात करिया, आगे सोनहा फजर। सुरूज उत्ती म चढ़गे, किसान खेत डहर॥ खोंदरा ले चिरइया बोलै, चींव-चींव अडबड़। नवा साल आगे रे, अपन जिनगी ल गढ़॥ दु हजार दस फेर कभू नइ तो बहुरय। घर बइठे तरिया भर, पानी नइ तो पुरय॥ दाई-ददा के पुरखौती, चीज म मत अकड़। नवा साल आगे रे, अपन जिनगी ल गढ़॥ अंधवा बर आंखी बन, भैरा बर कान जी। कोंदा बर मुंह बन, अप्पढ़ बर गियान जी॥ खोरवा,…
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- Kaushal Kumar Sahu