सुरता (संस्मरण) – सिकरनिन दाई

जब मंय ह प्रायमरी कक्षा म पढ़त रेहेंव अउ हमर ददा-कका मन के संयुक्त परिवार रिहिस त परिवार म बारो महीना कोई न कोई घुमंतू मंगइया-खवइया नइ ते पौनी-पसेरी मन के आना-जाना लगेच् रहय। विहीमन म एक झन माई घला आवय। हमर दाई-काकी, परिवार के अउ गाँव के दूसरमन ह वोला सिकरनिन कहंय। मंय ह वोला सिकरनिन दाई कहंव। सिकरनिन दाई ह होली-देवारी अउ दूसर तिहार-बार होतिस तभे आतिस। आतिस तब भीतर आंगन म आ के एक ठन आंट म बइठ जातिस। जब कभी वो आतिस, इहिच आंट म बइठतिस।…

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उम्मीद म खरा उतरे बर आज के बुद्धिजीवीमन ल सामने आना चाही : खुमान लाल साव

खुमान लाल साव जी से कुबेर अउ पद्मलोचन के गोठ बात, श्रुत लेखन – कुबेर आज (25 फरवरी 2019) मंझनिया पाछू भाई पद्मलोचन शर्मा ’मुँहफट’ के फोन आइस। जय-जोहार के बाद वो ह पूछिस – ’’कुबेर, अभी तंय ह कहाँ हस? खुमान सर से मिले बर जाना हे। बहुत दिन होगे, जाना नइ होवत हे, अब परीक्षा शुरू हो जाही तहाँ फेर दू महीना समय नइ मिल पाही।’’ खुमान सर के अस्वस्थ होय के अउ अस्वस्थता ले उबरे के बाद महू हर वोकर से मिल नइ पाय हंव। मंय ह…

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’लोक साहित्य म लोक प्रतिरोध के स्वर’ बर रचना आमंत्रित हे

साकेत साहित्य परिषद् सुरगी ह पीछू पंदरह बरस ले सरलग अपन सालाना कार्यक्रम म कोनों न कोनों महत्वपूर्ण विषय ल ले के विचार गोष्ठी के आयोजन करत आवत हे। निर्धारित विषय ऊपर केन्द्रित स्मारिका के प्रकाशन घला करे जाथे। विषय विशेषज्ञ के रूप म आमंत्रित विद्वान मन गोष्ठी म विचार मंथन करथें। इही सिलसिला म 23 फरवरी 2014 में गंडई पंडरिया म छत्तीसगढ़ी हाना ल ले के विचार गोष्ठी के आयोजन करे गे रिहिस। गोष्ठी म डॉ.विनय पाठक, डॉ.गोरेलाल चंदेल, डॉ.जीवन यदु, डॉ.पीसी लाल यादव, डॉ.दादूलाल जोशी जइसे विद्वान मन के अनमोल विचार…

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परोसी के भरोसा लइका उपजारना

बुधारू घर के बहू के पाँव भारी होइस, बुधारू के दाई ह गजब खुस होईस। फेर बिचारी ह नाती के सुख नइ भोग पाईस। बहू के हरूण-गरू होय के पंदरा दिन पहिलिच् वोकर भगवान घर के बुलव्वा आ गे। बुधारू के बहू ह सुंदर अकन नोनी ल जनम दिस, सियान मन किहिन “डोकरी मरे छोकरी होय, तीन के तीन।” बहू के दाई ह महीना भर ले जच्चा.बच्चा के सेवा जतन करिस। दाईच् आय त का होईस, कतका दिन ले अपन घर-दुवार ल छोड़ के पर घर म जुटाही नापतिस, दू…

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अनुवाद : टँगिया (The Axe)

मूल कहानी: The Axe कथाकार: R. K. Narayan अनुवादक : कुबेर गाँव डहर ले नहकत खानी एक झन भटरी ह बचपन म वेलन के बारे म भविसवानी करे रिहिस कि ये ह एक दिन कई एक्कड़ के बगीचा के बीच म बने तिमंजिला मकान म रही। तब ये बात ऊपर छोटकुन वेलन के चारों मुड़ा सकलाय हर आदमी ह वोकर खिल्ली उड़ाय रिहिस। कोप्पल म वेलन के परिवार के समान गरीब अभागा दूसर अउ कोई नइ रिहिस। वोकर बाप ह घर के सब चीजबस ल गहना धर डरे रिहिस अउ…

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अनुवाद : आशा के किरण (The Silver Lining)

मूल कहानी: The Silver Lining कथाकार : Chaman Nahal अनुवादक : कुबेर मनखे के मन के भाव के थाह लगा पाना अउ अनुमान लगा पाना बड़ा कठिन काम होथे। सदा हाँसत- मुस्कात रहने वाला, हरियर मन वाले आदमी के हिरदे भीतर भारी दुख हो सकथे, जेकर कीरा ह भीतरे-भीतरे वोला खावत रहिथे अउ जबकि मनहूस, जड़बुद्धि दिखने वाला आदमी ह भीतर ले सुखी अउ परम आनंदित हो सकथे। मनुष्य के जीवन ह बड़ अद्भुत होथे, छिन भर के सुख-शांति ह मन ल जीत लेथे। अभी-अभी पहाड़ म एक ठन निजी…

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अनुवाद : पतंगसाज (The Kite Maker)

मूल कहानी: The Kite Maker कथाकार: RUSKIN BOND (रस्किन बांड) अनुवादक – कुबेर एक बहुत जुन्ना मस्जिद, जउन ह खण्डहर हो गे रिहिस, नमाजी मन जिहाँ नमाज पढ़ना छोड़ देय रिहिन हे, के दीवाल के दर्रा म एक ठन बर रूख जाम गे रिहिस। ये गली म, जउन ह गली राम नाथ के नाम से प्रसिद्ध रिहिस, खाली इही एके ठन पेड़ रिहिस, अउ येकरे डंगाली म छोटकू, अली के पतंग ह टंगा गे रिहिस। लइका ह, खाली पांव अउ सिरिफ चिरहा कुरता भर पहिरे, अपन इही संकुरी गली के…

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अनुवाद : रेड चीफ के फिरौती (The Ransom Of Red Chief)

मूल कहानी – The Ransom Of Red Chief कथाकार – O Henry अनुवादक – कुबेर बिचार बने हे, बने जिनिस सरीख। फेर जब तक मंय ह कुछू नइ कहंव, तंय मोर अगोरा कर। अगवा करे के ये बिचार ह जब हमर दिमाग म फूटिस, मंय अउ बिल ड्रिस्कल, अलाबामा के, खाल्हे दक्षिण भाग म रेहेन। बिल के अनुसार, जइसे कि पीछू वो ह प्रगट करिस – ’’छिन भर बर हमर मन म भूत सवार हो गे रिहिस हे।’’ फेर जउन ल बाद म हम कभू नइ पायेन। उहाँ खाल्हे डहर…

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अनुवाद : मारकस (My Dog Marcus)

मूल कहानी . My Dog Marcus कथाकार – Colin Howard (कोलिन होवार्ड) अनुवादक – कुबेर कोई घला, जउन मोर बड़े जबर, सुंदर, आलसी, मूर्ख, सेंट बर्नार्ड नस्ल के मारकस से मिलतिस, विश्वास नइ कर पातिस कि अभी-अभी वो ह कोनो आइडिया सोचे हे। ये बात पक्का हे कि वो ह जउन आइडिया सोचे हे, वो ह वोकर जिन्दगी के पहिली आइडिया आय अउ मंय हा सोच नइ सकंव कि ये आइडिया ल वो ह सोचिस कइसे होही। वो आइडिया ह कुछ अइसे रिहिस कि जउन ह सेंट बर्नार्ड के जिन्दगी…

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अनुवाद : विष्णु भगवान के पदचिन्ह (Marks of Vishnu)

विष्णु भगवान के पदचिन्ह खुशवंत सिंह अनुवादक – कुबेर ’’ये ह कालिया नाग खातिर’’ सासर म दूघ ल ढारत-ढारत गंगा राम ह किहिस – ’’रोज संझा कुन कोठ तीर के बिला मेर मंय ह येला मंढ़ाथंव अउ बिहिनिया के होवत ले दूध ह सफाचट हो जाथे।’’ ’’का पता, बिलई ह पीयत होही।’’ हम नवजवान मन वोला सुझाव देयेन। ’’बिलई!’’ गंगा राम ह हमन के घोर निंदा करिस अउ किहिस – ’’ये बिला के नजीक कोनो इलई-बिलई नइ जा सकय। इहाँ कालिया नाग ह रहिथे। मंय ह वोला जब ले दूध…

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