मोर छत्तीसगढ़ भुंइया के,कतका गुन ल मैं गांवव | चन्दन कस जेकर माटी हाबे,मैं ओला माथ नवांवव || ये माटी म किसम किसम के, आनी बानी के चीज हाबे | अइसने भरपूर अऊ रतन, कोनो जगा कहां पाबे || इही में गंगा इही में जमुना, इही में हे चारो धाम | चारों कोती तेंहा किंचजरले, सबो जगा हाबे नाम || आनी बानी के फूल इंहा, महर महर ममहावत हे | हरियर लुगरा धान के पाना, धरती ल पहिनावत हे || आनी बानी के रिती रिवाज, दुनिया ल लुभाथे | गुरतुर…
Read MoreTag: Mahendra Dewangan Mati
मटमटहा टूरा
पढ़ई लिखई में ठिकाना नइहे गली में मटमटावत हे हार्न ल बजा बजा के फटफटी ल कुदावत हे। घेरी बेरी दरपन देख के चुंदी ल संवारत हे आनी बानी के किरीम लगा के चेहरा ल चमकावत हे। सूट बूट पहिन के निकले चसमा ल लगावत हे मुंहू में गुटका दबाके सिगरेट के धुंवा उड़ावत हे। मोबाइल ल कान में लगाके फुसुर फुसुर गोठियावत हे फेसबुक अऊ वाटसप चलाके मने मन मुस्कावत हे। संगी साथी संग घूम घूमके आदत ल बिगाड़त हे फोकट म खाय ल मिलत त बाप के कमई…
Read Moreछत्तीसगढ़ के बासी चटनी
छत्तीसगढ़ के बासी चटनी, सबला बने मिठाथे | इंहा के गुरतुर भाखा बोली, सबला बने सुहाथे | होत बिहनिया नांगर धरके, खेत किसान ह जाथे | अपन पसीना सींच सींच के, खेत म सोना उगाथे | नता रिशता के हंसी ठिठोली, इंहा के सुघ्घर रिवाज ए, बड़े मन के पैलगी करना, इंहा के सुंदर लिहाज ए | बरा सोंहारी ठेठरी खुरमी, इंहा के कलेवा ए | चीला रोटी चंउसेला कतरा, इंहा के ये मेवा ए | मीत मितानीन महा परसाद मे, सबो माया बंधाये हे | जंवारा भोजली गंगाजल मे,…
Read More