बुधारु अऊ समारु दूनों भाई के प्रेम ह गांव भर में जग जाहिर राहे ।दूनों कोई एके संघरा खेत जाय अऊ मन भर कमा के एके संघरा घर आय । कहुंचो भी जाना राहे दूनों के दोस्ती नइ छूटत रिहिसे ।ओकर मन के परेम ल देख के गाँव वाला मन भी खुस राहे अऊ बोले के एकर मन के जोड़ी तो जींयत ले नइ छूटे । बिचारा बुधारु अऊ समारु के बाप तो नानपन में ही मर गे रिहिसे ।बाप के सुख ल तो जानबे नइ करत रिहिसे ।ओकर दाई…
Read MoreTag: Mahendra Dewangan Mati
मजदूर दिवस म कविता: मजदूर
पसीना ओगार के मेंहनत करथे दुनिया ल सिरजाथे रात दिन मजदूरी करथे तब मजदूर कहाथे । नइ खाये वो इडली डोसा चटनी बासी खाथे धरती दाई ल हरियर करथे माटी के गुन गाथे । घाम पियास ल सहिके संगी जांगर टोर कमाथे खून पसीना एक करथे तब रोजी रोटी पाथे । बिना मजदूर के काम नइ चले दुनिया ह रुक जाही जब तक मेंहनत नइ करही त कहां ले विकास हो पाही । महेन्द्र देवांगन “माटी” पंडरिया जिला — कबीरधाम (छ ग ) पिन – 491559 मो नं — 8602407353…
Read Moreगीत : मउहा बिने ल जाबो
चल बिने ल जाबो रे संगी , मउहा के दिन आगे बिनेल जाबो ।…….2 सुत उठके बड़े बिहनिया, टूकनी धर के जाबो। टुकनी टुकनी मउहा संगी, बीन के हमन लाबो। झरत हाबे मउहा संगी -2, धर के हमन आबो । चल बिने ल जाबो रे संगी, मउहा के दिन आगे बिनेल जाबो । लट लट ले फरे हाबे, अब्बड़ ममहाथे । खुसबू ल पाके ओकर, भालू घलो आथे । जगा जगा फरे मउहा -2, सबोझन खाथे । चल बिने ल जाबो …………………………. डोंगरी पहाड़ चढबो, तेंदू चार लाबो। आमा अमली…
Read Moreपरघनी
जगा जगा बाजत हे, मोहरी अऊ बाजा । गांव गांव में होवत हे,विडियो अऊ नाचा । बर तरी आके , खड़े हे बरतिया । सुघ्घर परघाय बर, जावत हे घरतिया। बड़े बड़े दनादन , फटाका फूटत हे । आनी बानी गीत गाके, टूरा मन कूदत हे। पगड़ी ल बांध के, दूनों समधी मिलत हे। घेरी बेरी चकाचक , फोटू खींचत हे । कूद कूद के बजनिया मन, बाजा बजावत हे। गांव भरके मिलके, बरतिया परघावत हे। महेन्द्र देवांगन “माटी” गोपीबंद पारा पंडरिया जिला — कबीरधाम (छ ग ) पिन –…
Read Moreगरमी बाढ़त हे
दिनों दिन गरमी बाढ़त, पसीना चुचवावत हे। कतको पानी पीबे तबले, टोंटा ह सुखावत हे। कुलर पंखा काम नइ करत, गरम हावा आवत हे। तात तात देंहे लागत, पसीना में नहावत हे । घेरी बेरी नोनी बाबू, कुलर में पानी डारत हे । चिरई चिरगुन भूख पियास में, मुँहू ल फारत हे। नल में पानी आवत नइहे, बोर मन अटावत हे। तरिया नदिया सुक्खा होगे, कुंवा मन पटावत हे। कतको जगा पानी ह, फोकट के बोहावत हे। झन करो दुरुपयोग संगी, माटी ह गोहरावत हे। – महेन्द्र देवांगन “माटी” गोपीबंद…
Read Moreचलो मंदिर जाबो
चलो मंदिर जाबो भैया मोर, दाई के पूजा करबो । चलो मंदिर जाबो बहिनी मोर, माता के सेवा करबो। चंपा चमेली के फूल गुंथके , माता ल पहिनाबोन । आनी बानी फूल लानके, आसन ओकर सजाबोन। जोत जलाके सुघ्घर, आरती सबझन गाबो । चलो मंदिर जाबो भैया मोर, दाई के पूजा करबो । सोला सिंगार करके, माता हर मुसकाथे । भगत के मान रखे खातिर, सुंदर रुप देखाथे । चैत के महिना आगे, झूला ओकर सजाबो । चलो मंदिर जाबो बहिनी मोर, माता के सेवा करबो । बघवा के सवारी…
Read Moreमंहगाई
मंहगाई के मार से , बच न सके अब कोय, जेकर जादा लइका रही, तेला मरना होय। का अमीर अऊ का गरीब, सबके एके हाल, चक्की में पिसावत हे, सबके हाल बेहाल । दौलत खातिर लड़त हे, भाई भाई आज, घर परिवार ल दुख देके, अपन करत राज। दौलत ही सब कुछ हे, महिमा अपरंपार, कतको ग्यानी ध्यानी होही, कोनों न पावे पार। जेकर पास दौलत हे, उही करत हे राज , कुछू भी करही तब ले, ओला नइहे लाज । कतको पढ लिख के, घूमत हे बेरोजगार, जब तक…
Read Moreहोली हे भइ होली हे
होली हे भई होली हे , बुरा न मानों होली हे । होली के नाम सुनते साठ मन में एक उमंग अऊ खुसी छा जाथे। काबर होली के तिहार ह घर में बइठ के मनाय के नोहे। ए तिहार ह पारा मोहल्ला अऊ गांव भरके मिलके मनाय के तिहार हरे। कब मनाथे – होली के तिहार ल फागुन महीना के पुन्नी के दिन मनाय जाथे। एकर पहिली बसंत पंचमी के दिन से होली के लकड़ी सकेले के सुरु कर देथे। लइका मन ह सुक्खा लकड़ी ल धीरे धीरे करके सकेलत…
Read Moreहोली के रंग – राशिफल के संग
हमर हिन्दू धर्म में पंचांग के बहुत महत्व हे।कोई भी काम करथन त पहिली पंचांग देखथन तब काम के शुरूआत करथन।राशिफल ह हमर जीवन में बहुत महत्व रखथे ।एकर से हमला शुभ अशुभ के जानकारी होथे । होली के शुभ अवसर में ज्योतिसाचार्य स्वामी भकानंद जी के द्वारा भांग के नशा में बनाय गे राशिफल आप मन के सामने प्रस्तुत हे – मेष -( अ,चु, चे, चो, ला, ली,लू,ले, ) ए साल ह मेष राशि वाला मन बर जादा अच्छा नइहे ।परिवार में कलह अऊ अशांति रही ।व्यापार ह मंदा…
Read Moreकहानी : अंधविसवास
असाढ के महिना में घनघोर बादर छाय राहे ।ठंडा ठंडा हावा भी चलत राहे ।अइसने मौसम में लइका मन ल खेले में अब्बड़ मजा आथे। संझा के बेरा मैदान में सोनू, सुनील, संतोष, सरवन, देव,ललित अमन सबो संगवारी मन गेंद खेलत रिहिसे। खेलत खेलत गेंद ह जोर से फेंका जथे अऊ गडढा डाहर चल देथे । सोनू ह भागत भागत जाथे अऊ गडढा में उतर जथे ।ओ गडढा में एक ठन बड़े जान सांप रथे अऊ सोनू ल चाब देथे ।सोनू ह जोर जोर से अब्बड़ रोथे अऊ रोवत रोवत…
Read More