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उत्‍ती के बेरा

कविता, झन ले ये गाँव के नाव, ठलहा बर गोठ, हद करथे बिलई, बिजली, चटकारा, बस्तरिहा, अंतस के पीरा, संस्कृति, तोला छत्तीसगढी, आथे!, फेसन, कतका सुग्घर बिदा, गणेश मढाओ योजना, बेटा के बलवा, बाई के मया, रिंगी-चिंगी, अंतस के भरभरी, बिदेशी चोचला, ममादाई ह रोवय, छत्तीसगढिया हिन्दी, सवनाही मेचका, चिखला, महूँ खडे हँव, जस चिल-चिल, कुकुरवाधिकार, पइसा, तोर मन, होही भरती, छ.ग. के छाव, उत्ती के बेरा, हरेली, दूज के चंदा, अकादशी, निसैनी, प्रहलाद, राजनीति, नवा बछर, गुन के देख, चाकर, बिचार, श्रृंगार अउ पीरा, जीव के छुटौनी, पसार दिये तैं

मनोज कुमार श्रीवास्त, शंकरनगर नवागढ, जिला – बेमेतरा, छ.ग., मो. 8878922092, 9406249242, 7000193831
हरेली

सखी मितान अउ सहेली,
मिल-जुल के बरपेली,
खाबों बरा-चिला अउ,
फोड्बो नरियर भेली,
आज कखरो नई सुनन संगी,
मनाबो तिहार हरेली

चॉकलेट के इतिहास

Manoj Kumar Shrivastavaचॉकलेट बनाय के मुख्य जिनिस कोको के खोज 2000 वर्ष पूर्व होइस। अइसे माने जाथे कि जब 1528 म स्पेन के राजा हर मेक्सिको म विजय हासिल करके कब्जा कर लीस त ओ हर अपन साथ भारी मात्रा म कोको के बीजा लेके अइस तभे स्पेन के रसोई मन म चॉकलेट ड्रिंक प्रसिद्व होगे। फेर चॉकलेट हर पहली बिकट तीखा रहीस हवय, अमेरिका के मन एमा बहुत अकन मसाला मिलावय। एला मीठा बनाय के श्रेय यूरोप ल जाथे जेन हर एमा ले मिरचा निकाल के दूध अउ शक्कर के प्रयोग करीस तबले चॉकलेट हर मीठा रूप म प्रसिद्व होइस।
चॉकलेट मुख्यतः स्पैनिस भाषा के शब्द आय। जानकार मन के अनुसार ‘चॉकलेट’ शब्द हर माया अउ एजटेक सभ्यता के पैदाइस आय जेकर संबंध अमेरिका से हवय। एजटेक के भाषा म चॉकलेट शब्द के अर्थ होथे-खट्टा या कड़वा। चॉकलेट के प्रमुख सामग्री कोको के पेड़ के खोज 2000 साल पहिली अमेरिका के वर्षा के वन म होइस हवय। एखर फल के बीजा के चॉकलेट बनाये जाथे।
इटली के एक यात्री फ्रेंसिस्को कारलेटी हर सबले पहली चॉकलेट म स्पेन के एकाधिकार ल खतम करिस हवय अउ मध्य अमेरिका के इंडियंस ल चॉकलेट बनावत देखके अपन देश इटली म चॉकलेट के प्रचार-प्रसार करीस हवय। 1606 तक इटली म घलो चॉकलेट प्रसिद्व होगे। फा्रंस हर 1615 म चॉकलेट के स्वाद ल चिखिस हवय। फा्रंस के मन ल एहर स्वास्य्म के हिसाब से भी लाभदायक लगीस हवय। इंग्लैंड म चॉकलेट के पहुच 1650 म होइस। अभी तक मनखे मन चॉकलेट ल पीयत रहीन हे।
चॉकलेट हर पहिली तीखा रहत रहीस फेर एला यूरोप हर मीठा बनइस हे। चॉकलेट ल पीये से खाये वाले जिनिस यूरोप हर बनइस हवय। तब ले चॉकलेट हर खाये वाले जिनिस बनगे जेखर से आज चॉकलेट हर हमर जीवन के अभिन्न अंग बनगे। चाहे लइका मन के मन रखे बर होय चाहे बर-बिहाव अउ कोनो तिहार-बार होय चाहे कोनो संगवारी मन ल बाॅंटे बर होय, हर जगह चॉकलेट हर अपन जगहा बनाय हवय। एखरे सेती हर साल 9 फरवरी के ‘चॉकलेट डे’ मनाय जाथे। अइसन हे चॉकलेट के इतिहास।

सौ. सनस्टार समाचार पत्र, संकलन अउ अनुवाद

मनोज कुमार श्रीवास्तव
शंकरनगर नवागढ़
जिला- बेमेतरा, छ.ग.