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अटल बिहारी वाजपेयी ‘‘राजनीतिज्ञ नई बलकि एक महान व्यक्तित्व रहिन’’

अटल बिहारी वाजपेयी के जनम 25 दिसम्बर बछर 1924 को ग्वालियर म एक सामान्य परिवार म होय रहिस। उंकर पिता जी के नाव कृष्ण बिहारी मिश्र रहिस। जे ह उत्तर परदेस म आगरा जनपद के प्राचीन असथान बटेश्वर के मूल निवासी रहिस। अउ मध्यपरसेद रियासत ग्वालियर म गुरूजी अउ एक कवि रहिस अउ उकर मॉं के नाम कृष्णा देवी रहिस। तीन बहिनी अउ भाई म सबसे छोटे अटल बिहारी ल उंखर दादी प्यार ले अटल्ला कई के बुलावत रहिस। काबर के अटल के पिता शिछक अउ कवि रहिस ये कारन ले अटल जी ल कविता बिरासत म मिलिस। अटल जी ह जब कछा 5 वीं म रहिस त एक प्रतियोगिता म अपन पहली भाषन दिहिस पर अटल जी अपन रटे भाषन ल बीचे म भूलागे त अटल ह कसम खाईस के कभू रटे भाषन नई दो। अटल जी जब 1939 म विक्टोरिया कालेज ग्वालियर म कछा 9 वीं म रहिस त पहली बार उंकर कविता कालेज के पत्रिका छपे रहिस। अटल जी विक्टोरिया कालेज (अब रानी लछमीबाई महाविद्यालय) ले बी.ए. करिस। येखर बाद दयानंद एंग्लो वैदिक महाविद्यालय ले राजनीति म स्नातकोत्तर करिस। बाद कानून म इसनातक करत रहिस त उंखर पिता घलो विधि में इसनातक बर अटल जी के कछा म ही दाखिला लिहिस अउ छात्रावास के एके ही कमरा म रईके पढ़ाई करत रहिस।

लोगनमन बाप-बेटा ल देखे बर आये करत रहिस, पर छात्र अटल ह कानून के पढ़ाई बीच म ही छोड़के पूरा निस्ठा से संघ के कार्य में जुट गे। अटल जी जब सन् 1942 म भारत छोड़ो आंदोलन म हिस्सा लीस अउ उनला जेल जाना पड़िस पर वो ह देस के आजादी खातिर पीछे नहीं हटिस। जब वो ह पं. दीनदयाल उपाध्याय जी के संपर्क म आईस त उनला रास्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचार-प्रसार करे के मौका मिलीस। वा ह अपन जीवन रास्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक के रूप म आजीवन अविवाहित रहे के संकल्प लेके सुरू करिस अउ अंतिम समय तक संकल्प ल पूरा निस्ठा से निभाईस। रास्ट्रीय जनतांतत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के पहली परधानमंतरी रहिस जेहा गैर कांग्रेसी परधानमंतरी पद के 5 साल बिना कोनो रूकावट के पूरे करिस। वो ह कई पारटी ल जोर के सरकार बनाये रहिस, कभी कोनो पारटी ह दबाव नई डारिस। येखर से उकर अद्भुत नेतृत्व छामता के पता चलते। उनला रास्ट्रधर्म पत्रिका (हिन्दी मासिक) के सम्पादन के घलो मौका मिलीस। येखर बाद आजादी के तुरंत बाद 14 जनवरी, सन् 1948 को मकर संक्राति के पावन पर्व पर अपने आवरण पृष्ठ पर भगवान श्री कृष्ण के मुख से शंखनाद के साथ श्री अटल बिहारी वाजपेयी के संपादकत्व म पाचजन्य रास्ट्रीय हिन्दी साप्ताहिक के अवतरण स्वाधीन भारत म स्वाधीनता आन्दोलन के प्रेरक आदर्स अउ राष्ट्रीय लछय ल सुरता दिलाय के संकलप के उद्घोस रहिस। वाजपेयी जी अपन संपादकीय में लिखिस- कुरूक्षेत्र के कण-कण से पांचजन्य फिर हुंकार उठा है। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अउ पं. दीनदयाल उपाध्याय के निरदेसन म राजनीति के पाठ तो पढ़िस संगे-संग पाचजन्य, राष्ट्रधर्म, दैनिक स्वदेश अउ वीर अर्जुन जैसे पत्र-पत्रिका के संपादन के काम ल कुसलता के साथ करिस।

आजादी के बाद हिन्दी पत्रकारिता बर ये कम गौरव के बात नई हे कि कोखरो व्यक्तिगत स्वामित्व अथवा औघोगिक घराना के छत्र छाया से बाहर रहकर घलो ’’पाचजन्य’’ साप्ताहिक अपन स्वरन जयंति मानाइस अउ ओ स्वर्ण जयंति बछर म वोखर पहिली संपादक भारत के परधानमंतरी पद पर आसीन रहिस वो ह रहिस अटल बिहारी वाजपेयी जी।

अटल जी ल संसद के चार दसक के अनुभव रहिस। बछर 1955 म वोहा पहली बार लोगसभा के चुनाव लड़िस पर जीत नई मिलिस, पर वोहा हार नई मानिस अउ बछर 1957 म बलरामपुर जिला गोण्डा उत्तर प्रदेश से जनसंघ के प्रत्यासी के रूप म जीत के लोकसभा पहुॅचिस। वोहा बछर 1957 से संसद सदस्य रहिस। वोहा हिन्दु, मुस्लिम के बीच बहुत लोकप्रिय रहिस। वोहा 2,4,5,6,7,10,11,12,13,14 लोकसभा बर चुने गे रहिस। ये परकार ले वोहा 10 लोकसभा चुनाओं में चुन के आये रहिस। बछर 1962 व 1986 म वोहा राज्यसभा सदस्य रहिस। वोहा चार अलग-अलग राज्य उत्तरप्रदेश, गुजरात, मध्यप्रदेश, दिल्ली ले चुने जाने वाले देश के पहली सांसद आये। अटल जी ल सरकारी सुविधा के गलत इस्तेमाल करना बिल्कुल पंसंद नई रहिस। अटल जी ल सायकिल चलाये के बहुत सौक रहिस, जब वोहा ग्वालियर से लोकसभा सदष्य रहिस त अपन लोकसभा छेत्र म सायकिल म ही चल देत रहिस। अटल जी ल सिफारिस करना या करनवाना सक्त नापसंद रहिस। वोहा अपन परिवार अउ सगे संबंधी मन ल बोले करत रहिस के आगे बढ़ना हे त अपन दम म बढ़ा।

वाजपेयी जी ह कई संस्था मन के अस्थापना घलो करे रहिस। वो ह भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य म ले एक रहिस। बछर 1951,1968-1973 तक येखर अध्यक्ष घलों रहिन। बछर 1957 ले 1977, 20 वर्ष लगातार जनसंघ के संसदीय दल के नेता रहिस। 1975 म जब आपातकाल के घोषना होइस त तत्कालीन जनसंघ ल घलो संघ के साथ प्रतिबंध लगा दिहिस अउ आपातकाल हटे के बाद जनसंघ के विलय जनता पार्टी में हो गे अउ केन्द्र में मोरारजी देसाई के परधानमंतरीत्व म मिलीजुले सरकार बनीस। मोरारजी देसाई सरकार म बछर 1977-1979 तक बिदेश मंतरी रहिस अउ बिदेशों म भारत के अच्छा छवि बनाईस।
अटल जी के एक ईच्छा रहिस के उनला मौका मिलतिस त कोनो बैस्बिक स्तर के सभा म अपन भासन हिन्दी म ही देतेवे। अटल जी जब विदेश मंत्री रहिस त वो अवसर बछर 1977 म आ ही गे जब वोहा संयुक्त रास्ट्र संध के समान्य सभा म अपन वक्तव्य हिन्दी म दिहिस अउ वो पहिली ऐसे भारतीय बनिस जे ह भारत के राजकीय भाषा हिन्दी ल बिश्व पटल म सुसोभित करिस। अटल जी हिन्दी के संगे-संग अंगरेजी भाषा घलो म बने पकड़ रहिस। वोहा बछर 2000 म अमेरिका म अंगरेजी भाषा म अपन वक्तव्य दिहिस जेखर ले पूरा सभा ताली ले गंूज गे।
बछर 1980 म जनता पार्टी ले असंतुष्ट होके वाजपेयी जी ह जनता पार्टी छोड़ दीहिस अउ भारतीय जनता पार्टी के अस्थापना करिस। 6 अप्रेल 1980 म बने भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष के जिम्मेदारी घलो वाजपेयी जी सौपे गईस। बछर 1980 के समय जब भारतीय जनता पार्टी की अस्थापना के तैयारी चलत रहिस तब समस्या आईस के पारटी के चिन्ह का होही। काबर के अटल जी ल कमल के फूल बहुत प्यारा रहिस अउ ओखर कहना रहिस के कमल कीचड़ घलो म खिल के सुंदर दिखथे येखर कारन भारतीय जनता पारटी के चिन्ह कमल के फूल रखे गईस। अटल जी ह अपन कविता म भारतीय जनता पारटी के उदय के बिषय लिखथे-
अंधेरा छटेगा ,
सूरज निकलेगा,
कमल खिलेगा।

कवि के रूप में वाजपेयी – अटल बिहारी वाजपेयी राजनीतिज्ञ होय के संगे-संग एक कवि घलो रहिस। ‘‘मेरी इंक्यावन कविताएं’’ अटल जी के परसिद्ध काव्य संग्रह हे। वाजपेयी जी ल काव्य रचना के शैली बिरासत म मिले रहिस। उंखर पिता कृष्ण बिहारी वाजपयी ग्वालियर रियासत म अपन समय के जाने-माने कवि रहिन। वो ह बरज भाखा अउ खड़ी बोली म काव्य रचना करत रहिन। पारिवारिक वातावरण साहित्यिक अउ काव्यमय होय के सेतर ओकर घलो रूचि काव्य रचना रहिस। सित्तो म कोनो ह कवि हृदय कभू कविता से रिता नई रह सकय। राजनीति के संगे-संगे पूरा रूप म अउ रास्ट्र के परति उंखर वैयक्तिक संवेदनशीलता सुरू ले आखिरी तक परगट होत रहिस। ओखर संघर्षमय जीवन, परिवर्तनशील परिस्थिति, राष्ट्रव्यापी आंदोलन, जेल-जीवन जईसे कई आयामों के परभााव अउ अनुभूति ह काव्य म हमेंसा अभिव्यक्ति पाय हावय। अटल जी के कविता ‘‘मौत से ठन गई’’ म अटल जी लिखते –
ठन गई!
मौत से ठन गई!
जूझने का मेरा इरादा न था,
मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था,
रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई
यों लगा जिंदगी से बड़ी हो गई
मौत की उमर क्या है?दो पल भी नहीं,
ज़िन्दगी सिलसिला, आज कल की नही।
मैं ज़ी भर जीया, मैं मन से मरुॅ,
लौटकर आऊॅंगा, कूच से क्यों डरुॅ?
तू दबे पाव, चोरी छिपे से न आ,
सामने वार कर फिर मुझे आज़मा।

येखर अलावा वाजपेयी जी ह अनेक परकार के गद्य अउ कविता के रचना करिस जे ह उंकर कवि हृदय ल दिखाथे। उंखर रचना म- अमर बलिदान (लोकसभा में अटल जी के वक्तव्यों का संग्रह), कैदी कविराय की कुण्डलियां (आपात काल के दौरान लिखि कविताएं), संसद के तीन दशक, अमर आग है।, कुछ लेख कुछ भाषण, सेक्यूलर वाद, राजनीति की रपटीली राहें, बिन्दू-बिन्दू विचार, मेरी संसदीय यात्रा (चार भागों में), संसद के चार दशक (भाषणों का संग्रह), भारत की विदेश नीति के नए आयाम (विदेश मंत्री के रूप में दिए जाने वाले भाषण 1977-79),, शक्ति से शांति, क्या खोया क्या पाया परमुख हावय। गजल गायक जगजीत सिंह ह अटल जी के परसिद्ध कविता मन ल संगीतबद्ध करके एक एलबम बनाये हावय।
अटल जी ल मिले पुरूस्कार – बछर 1992 में पद्म विभूषण, 1994 मेें लोकमान्य तिलक पुरूस्कार, पं. गोविन्द वल्लभ पंत पुरूस्कार घलो ले सम्मानित किये गे हावय। पं. गोविन्द वल्लभ पंत पुरूस्कार उंहला सबसे अच्छा सांसद होय बर , बछर 1993 में कानपुर विश्वविद्यालय ह उंनला डॉक्टरेट के मानद उपाधि ले सम्मानित करिस। 2015 म देस के सबले बड़का पुरस्कार भारत रत्न भारत सरकार उनला दे हे रहिस।
परधानमंतरी के रूप म अटल जी के कार्यकाल – वाजपेयी जी ने एक बार नई तीन बार गैर कांग्रेसी सरकार बनाइस। पहिली बार 16 मई 1996 ले 1 जून 1996 तक 13 दिन, दूसर बार 19 मार्च 1998 ले 22 मई तक 13 महिना अउ फेर बछर 2004 तक तीसरा कार्यकाल पूरा 5 बछर पूरा करिन।
परधानमंतरी के रूप म अटल जी के कार्यकाल मेे महत्वपूर्ण निरनय
1. भारत ल परमानु सक्ति सम्पन्न राष्ट्र बनाना- अटल सरकार ह 11 व 13 मई 1998 म राजस्थान के पोखरण म 5 ठन जमीन के अंदर देस के दूसर परमानु परीक्षण बिस्फोट करके भारत ल परमानु सक्ति सम्पन्न देस घोसित कर दिहिस। ये कदम ले ओ ह भारत ल निरविवाद रूप ले बिस्व मानचित्र म एक सुदृढ़ बैस्विक सक्ति के रूप म अस्थापित कर दिहिस। ये सब येतका गोपनीय रूप ले करिस के बिकसीत जासूसी उपग्रह अउ तकनीकी ले सम्पन्न पश्चिमी दस घलो ल येखर भनक तक नई होईस। येखर बाद पश्चिमी देस मन भारत म कई परकार के पाबंदी लगा दिहिस पर वाजपेयी सरकार ह सबके दृढ़ता से सामना करत आरथिक बिकास के नवा उंचाई ल छू दिहिस। येखर ले उंकर दृढ़ इच्छा सक्ति दिखथे।
2. पाकिस्तान करा संबंध म सुधार के पहल- बछर 19 फरवरी 1990 म सदा-ए-सरहद नाव ले दिल्ली से लाहौर तक बस सेवा सुरू करिस। येखर उद्घाटन करत पहिली यात्री के रूप म वाजपेयी जी ह पाकिस्तान के यातरा करके नवाज सरीफ करा मुलाकात करिस अउ आपसी संबंध म एक नवा जुग के सुरूवात करिस। संगे-संग खेल संबंध के मामला म अटल जी ह भारत अउ पाकिस्तान के बीच खेल ल बढ़ावा देहे बउ अटल जी ह कई खेलईया मन जइसे कपिल देव के संग फिलम जगत के मन ल जेमा देवानंद सामिल रहिन अपन प्रतिनिधि मण्डल के साथ पाकिस्तान ले के गईस अउ। अउ आपसी संबंध ल सुधारे के उदिम करे रहिस।
कुछ समय बाद पाकिस्तान के वो समय के सेना परमुख परवेज मुसर्रफ के सह पर पाकिस्तानी सेना अउ उग्रवादी मन कारगिल छेत्र म घुसपैठ करके भारत के कई पहाड़ी चोटी मन म कब्जा कर लिहिस। अटल सरकार ह पाकिस्तान के सीमा के उल्लंघन नई करे के अंतर्राष्ट्रीय सलाह के सम्मान करत धैर्यपूर्वक पर ठोस कार्यवाही करके भारतीय छेत्र ल छुड़वाईस। अटल जी ह बिघ्न -बाधा ले हार नई मानने वाला मन म ले एक रहिन। वो ह देस के कोनोे समस्या चाहे वो ह आंतरिक हों, चाहे राजनीतिक हों, चाहे अंतर्राष्ट्रीय हो, चाहे विदेशी मामला हो ओखर बड गंभीरता, धीरता एवं दृढ़ता पूरवक सबो ल साथ लेके हल करे के उदिम करय। उंखर कबिता ’’कदम मिलाकर चलना होगा ” कबिता ले हमन ल ये ही सीख मिलथे-
बाधाएँ आती हैं आएँ
घिरें प्रलय की घोर घटाएँ,
पावों के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ,
निज हाथों में हँसते-हँसते,
आग लगाकर जलना होगा।
कदम लिमाकर चलना होगा।

3. परधानमंतरी ग्रामीण सड़क योजना- वाजपेयी सरकार के केन्द्रीय मंत्रीमण्डल ह ये योजना के नाव ल अटल जी के नाव से चलना चाहिस पर अटल जी ह येला परधानमंतरी ग्रामीण सड़क योजना के नाव दिस अउ वो ह 1000 ले जादा के आबादी वाला गांव मन ल बारहमासी रद्दा के माध्यम ले सहर ले अउ रास्ट्रीय राज्यमार्ग ले जोड़ के गांव ले परिवहन माध्यम से जोड़ दिहिस जेखर ले गांव के चहँुमुखी बिकास सम्भव हो सकिस जो के पाछू 50 बछर म नई हो पाये रहिस। ओखर ये योजना के कारन आज देस के हर गांव ह मेन रोंड से जुड़ गे हावय। जेखर कारन आज गांव के अपन फसल, गोरस, सब्जी-भाजी मन ल बेचे बद अउ बिमार मनखे मन के ईलाज बर तुरते सहर पहुंच जावथे।
4. स्वर्णिम चतुर्भूज योजना- भारत देश के चारों कोना ल सड़क से जोड़े बर स्वर्णिम चतुर्भूज परियोजना (गोल्डन क्चाड्रिलेट्रल प्रोजेक्ट) जेला जी.क्यू. प्रोजेक्ट के नाव ले जाने जाथे के शुरूवात करिन। जेमा दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, अउ मुंबई ल राजमार्ग से जोड़े गईस। अइसनहा माने जाथे के अटल जी के शासनकाल म भारत म जेतना रद्दा बनिस ओतना सिर्फ शेरशाह सूरी के समय म ही होय रहिस।
5. सर्व शिछा अभियान- सर्व शिक्षा अभियान के शुरूवात अटल जी के कार्यकाल के एक बड़े उपलब्धि हे। जेमा वो ह प्राथमिक अउ पूर्व माघ्यमिक म पढ़िया लईकन मन के सिछा के स्तर ऊँचा करे बर हर 5 कि.मी. के दूरिहा म प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक इसकूल खोलिस। जेखर संगे-संग गुरूजी मन के भरती घलो करे गे रहिस जेखर से देस म बेरोजगारी के समस्या के कुछ हद तक समाधान होईस हावय।

संरचनात्मक ढाँचा बर कार्यदल, साप्टवेयर विकास बर सूचना अउ प्रौघौगिकी कार्यदल, विघुतीकरण म गति लाये बर केन्द्री विघुत नियामक आयोग के गठन करिस। 100 बछर ले जादा समय ले बिवादित चले आवत कावेरी नदी जल बिवाद ल सुलझाइस। राष्ट्रीय राजमार्ग अउ हवाई अड्डा के बिकास, नवा टेलीकाम नीति अउ कोंकन रेलवे के शुरूवात करके बुनियादी संरचनात्मक ढँाचा ल मजबूत बनाईस।

6. तीन राज के गठनः- बछर 2000 में तीन राज छत्तीसगढ, झारखण्ड अउ उत्तराखण्ड बनाये के निरनय लिहिस। आज जो हमर छत्तीसगढ़ राज ह बिकास के रद्दा म आघू बढ़त हावय वो ह अटल जी के अटल निरनय के कारन ही है। वो ह भारत माता के सच्चा सपूत रहिस।

अटल जी भाजपा पारटी के वो आदरस चेहरा हे जेखर आघू सबो राजनीतिक दल घलो नतमस्तक हो जाथे। बहुत बढ़िया कवि, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, महान राजनीतिज्ञ अउ एक सफल प्रधानमंत्री के रूप म अपन पहिचान बनाने वाला अटल जी आज हमर बीच म नई हे लेकिन ओखर आदरस, सिद्धांत,सादा जीवन जीये के कला, करतब्य परायनता, ईमानदारी गोठ-बात अउ उंखर कबिता मनखेमन के मन म जिन्दा अउ प्रासंगिक हे। आज अटल जी जईसे नेता खुद भाजपा म घलो कोनो नई हावय। रानजीतिक दल भी कईथे के अटल जी जईसे कोनो नई हे। अटल जी के बारे येहू कहे जाथे के वो ह अकेल्ला ही जनाधार के बल म सत्ता चला सकत रहिस। ओखरे कारन भाजपा ह एक नहीं तीन नही अब पांचवा पईत सत्ता म हावय। भले ही पहली पईत 13 दिन, दूसरी पईत 13 माह, और तीसरी, चौथी अउ पांचवा पईत पूरे 5 वर्ष तक शासन करिस अउ करत हावय। अटल जी के अंदर एक सुंदर कवि घलो हावय, जेहा समय-समय म देस के मनखे मन के बीच उपंिस्थत हो जात रहिस। ओखर छंद म बने मिठास घलो हावय। अइसना महान व्यक्तित्व के धनी ल जे भारत देस के गौरव है, देस के असनहा अनमोल रतन ल भारत रतन से सम्मानित करे गईस ते ह गौरव के बात हावय।
अटल जी ह अपन रचना ‘‘दो अनुभूति‘‘ शीर्षक कबिता म लिखे हावय-

टूटे हुए सपनों की कौन सुने सिसकी,
अन्तर की चीर व्यथा पलको पर ठिठकी,
हार नहीं मानूॅंगा,
रार नहीं ठानूॅंगा,
काल के कपाल पे लिखता मिटाता हॅू
गीत नया गाता हॅूं।

अटल जी ह बछर 2005 म ये घोषना कर दिहिस के अब सक्रिय राजनीति म नई रहव पर संगठन बर काम करत रहूं। आज अटल बिहारी वाजपेयी जी हमर बीच नई हावय लेकिन जब ओला ओ समय पता चलिस होही जब वो बिमार रहिस अउ 16 वां लोकसभा म भाजपा पूरा बहुमत के साथ देस के सत्ता अपन हाथ म ले लेहे हावय त उंखर खुसी के ठिकाना नई रहे होही। जब बछर 1984 के 8 वां लोक साभा म ओ ह जे राजनीतिक दल के बीजारोपण कर ओला अपन मेहनत, लगन, निष्ठा अउ आदरसवादिता के पानी ले सींच के 2 लोकसभा सीट, 1989 – 9 वां लोकसभा म 85 लोकसभा सीट, 1991 – 10 वां लोकसभा म 120 सीटं, 1996- 11 वां लोकसभा म 161 सीट, 1998- 12 वां लोकसभा म 182 सींट 1999-13 वां लोकसभा म 182 सींट, 2004- 14 वां लोकसभा म 138 सींट, 2009- 15 वां लोकसभा म 116 सींट, के रूप म एक छोटे-से पउधा ल सुरछित रखे रहिस, वो ह आज 2014 – 16 वां लोकसभा म 282 लोकसभा सीट अउ 17 लोकसभा 303 सीट जी के एक बिशाल वट वृक्ष के रूप म अपन गहरा जड जमा के अपन प्रतिष्ठा प्राप्त कर ले हे हे त उंखर आत्मा ह बड़ खुस होवत होही। उंखर कबिता ’’ जीवन की ढलने लगी साँझ ” म ओ ह ये जीनगी के असल मतलब ल लेहे हावय-
जीवन की ढलने लगी साँझ
उमर घट गई
डगर कट गई
जीवन की ढलने लगी साँझ
बदलेे है अर्थ
शब्द हुए व्यर्थ
शांति बिना खुशियां है बांझ
सपनों में मीत
बिखरा संगीत
ठिठक रहे पांव और झिझक रही झांझ।
जीवन की ढलने लगी साँझ।

अटल जी के जीनगी के प्ररमुख तथ्य- अटल जी आजीवन अविवाहित रहिन। वो ह ओजस्वी वक्ता अउ हिंदी भाखा ले परेम करने वाला मन म लेे एक हिंदी के कबि ये। अटल जी सबसे लंबा समय तक सांसद रहिस अउ जवाहरलाल नेहरू अउ इंदिरा गांधी के बाद सबसे लंबा समय तक गैर कांग्रेसी परधानमंतरी घलो रहिस। वो ह पहिली प्रधानमंत्री रहिस जेहा गठबंधन सरकार ल न केवल स्थायित्व दिहिस बलकि सफलता पूरवक संचालित घलो करिस। देस के पहिली राष्टपति राजेन्द्र प्रसाद शुक्ल जी ल अटल जी के परति बहुत लगाव रहिस। पूर्व परधानमंतरी चंद्रशेखर, अटल जी ल गुरू जी कहकर पुकारत रहिस। पूर्व परधानमंतरी डॉ.मनमोहन सिंह जी अटल जी ल भारतीय राजनीति के भीष्म पितामह कईथे। लता मंगेशकर, मुकेश, मो.रफी अटल जी के पसंदीदा गायक अउ गायिका रहिस।

अटल जी के टिप्पनीः-
चाहे देस के बात होवय, चाहे क्रांतिकाारी के, चाहे अपन कबिता के होवय, चाहे नेता प्रतिपछ के होवय, चाहे परधानमंतरी के नपे-तुले अउ बेबाक टिप्पणी करे म अटल जी कभी नई चूकिस। ओखर कुछ टिप्पनी ये परकार ले हावयः-
भारत ल लेकर मोर एक दृष्टि है, अइसे भारत जो भूख, भय, निरछरता अउ अभाव से मुक्त हों।
क्रांतिकारी के साथ हमन नियाव नई करेन – देसबासी महान क्रांतिकारी मन ल भूलात हावय। आजादी के बाद अहिंसा के अतिरेक के कारन ये सब होवत हावय।
अटल जी की हर कबिता ले हमन ल आघू बढ़े के प्रेरना मिलथे अउ ओमा मानवता के दरसन होथे। उंखर कबिता ‘‘आओें फिर दिया जलाऐं’’ म ओ ह लिखथे:-
आओें फिर दिया जलाएॅं
भरी दुपहरी में अॅंधियारा,
सूरज परछाईयों से हारा,
अंतरमन का नेह निचोड़े-
बुझी हुई बाती सुलगाएं।
आओें फिर दिया जलाए।

देस के प्रतिनिधि मंडल के रूप म अटल जी की बिदेस यातारा- बाजपेयी जी कई बार देस के प्रतिनिधिमंडल के संग बिदेस मन होन वाला अंतर्राष्ट्रीय संस्था के सभा म सामिल होय बर यातरा करिन। सबसे पहिली ओ ह बछर 1965 म संसदीय सद्भावना सिष्टमंडल के साथ पूरब अफरीका के यातरा बर गे रहिस। वो ह भारत के संसदीय प्रतिनिधिमंडल के संग बछर 1967 म आस्ट्रेलिया, 1983 में यूरोपीय देस, 1987 म कनाडा घलो गे रहिस। वो ह राष्ट्रमण्डल संसदीय परिषद के सभा बर कनाडा म बछर 1996,1994, जाम्बिआ म 1980 भारतीय सिष्टमंडल के सदस्य म सामिल रहिन।
वो ह वा भारतीय प्रतिनिधिमंडल घलो म सामिल रहिन जे ह जापान म अंतर संसदीय संघ के कान्ॅफ्रेंस 1974, सिरीलंका म 1975, स्वीट्जरलैण्ड म 1984 म सामिल रहिस। वे संयुक्त राष्ट्र संघ के सभा म सामिल होने वाला भारतीय संसदीय सिस्टमंडल के नियमित सदस्य रहिस अउ 1988,1990,1991,1992,1993,1994,1996 म सामिल होईस।
वो ह मानवाधिकार आयोग सम्मेलन 1993 म जिनेवा म भारत के प्रतिनिधित्व करत भारतीय प्रतिनिधिमंडल के संग सामिल होईस अउ बाह्य कार्य स्थायी समिति म भारतीय प्रतिनिधिमंडल के रूप म गल्फ दस बहरीन, ओमान, कुवैत के घलो यातरा करिन।
एक पत्रकार, ओजस्वी वक्ता, जनकवि, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, आपातकाल म मीसा बंदी, बिदेश मंत्री, मॉं भारती ल बिश्व म गौरवान्वित करने वाला, अपन भाखा हिंदी के मान रखने वाला अउ फेर एक परधाननमंत्री, भारतीय जनता पारटी के पितृ पुरूष अउ भारतीय राजनीति के भीष्म पितामह के रूप सबो जगह अपन लोहा मनवाने वाला अटल जी कोनो एक दल के नेता नई हे बरन वो ह एक बैस्बिक नेता रहिन अउ आगू घलो रही। वो ह आज घलो पूरा भारत देस के लोगनमन के हिरदय म राज करथे अउ हमेसा करही। वो ह अद्वीतीय प्रतिभा के धनी रहिस। अब भले ही हमन ल उंखर भासन सुने बर नई मिलय पर उंखर लिखे कबिता अउ बोले भासन सुन के अइसे लगथे के आज भी अटल जी हमार सामने खड़े होके अपन ओजस्वी स्वर म मारगदरसन अउ प्रेरना देवत हे। युवा पीढ़ी ल उंखर जीनगी लेे प्रेरना लेना चाही। आज अटल जी हमार संग नई हे पर वो अटल सितारा जुग-जुग तक चमकत रही अउ ओखर परकास ले हमर जीनगी ल सही रद्दा अउ प्रेरना मिलत रही। ओ अटल महापुरूष ल बारम्-बार नमन।
प्रदीप कुमार राठौर “अटल“
ब्लाक कालोनी जांजगीर जिला-जांजगीर चांपा (छ.ग.)

भोजली तिहार : किसानी के निसानी

हमर छत्तीसगढ़ देस-राज म लोक संसकिरीति, लोक परब अऊ लोक गीत ह हमर जीनगी म रचे बसे हाबय। इहां हर परब के महत्तम हे। भोजली घलो ह हमर तिहार के रूप म आसथा के परतीक हावय, भोजली दाई।

भोजली ह एक लोक गीत हावय जेला सावन सुकुल पछ के पंचमी तिथि ले के राखी तिहार के दूसर दिन याने भादो के पहिली तिथि तक हमर छत्तीगढ़ राज म भोजली बोय के बाद बड़ सरद्धा भकती-भाव ले कुंवारी बेटी मन अऊ ़नवा-नेवरिया माईलोगन मन गाथे।

असल म ये समय धान के बोआई अऊ सुरूवात के निंदाई-गोड़ाई के काम ह खेत म खतम होत्ती आये रहिथे अऊ किसान के बेटी मन घर म बने बरसात अऊ बने फसल के मनोरथ मांगे के खातिर फसल के परतीकात्मक रूप म भोजली के आयोजन करथे।

सावन के दूसर पाख याने पंचमी याने नाग पंचमी के दिन गहूं या जवा ल चिखला के माटी ल लाके ओखर उपर राख ल छिंच के गांव म माता चौरा, ठाकुर देव या फेर घर के पूजा-पाठ वाले जगह म जिहां अंधियार रहय तिहां बोय जाथे अऊ हरदी पानी छिंच-छिंच के बड़े करथे। घर म कुंवारी कनिया, बेटी माई मन येखर बड़ सेवा-जतन करके पूजा करथे अऊ जइसना देवी मॉं के जसगीत नवरात्रि म गाथे वईसने भोजली बोय के बाद ओखर सेवा म सेवा गीत, सिंगार गीत जुर-मिल के गाथे।

पीयर भोजली
दोहा- ठैंया-भुईयां हमर गांव के, ठाकुर देव रखवार।
भोजली के सेवक जुरेन, झोंका हमर जोहार।।

आवा गियां जूर मिलके, भोजली जगईबो।
हां भोजली जगईबों।।
हरदी पानी छिंची-छिंची,सेवा ला बजाईबों।
ह हो देवी गंगा।।
उठा-उठा भोजली, तंु जागा होसियारा।
हो जागा होसियारा।।
सेवा करे आये हावन, झोंका अब जोहारा।
ह हो देवी गंगा।।

माईलोगन मन अपन भोजली दाई ल जल्दी-जल्दी बाढ़े बर अरज करथे अऊ कईथे-
देवी गंगा, देवी गंगा लहर तुरंगा।
हमरो भोजली देवी भीजे आठो अंगा।।
माड़ी भर जोंधरी, पोरिस कुसियार हो।
जल्दी बाढ़ौ भोजली, होवौ हुसियार।।

अंधियार जगह म बोय भोजली ह सुभाविक रूप ले पीऊरा रंग के हो जाथे। भोजली के पीऊरा होय के बाद माईलोगन मन खुसी परगट करथे अऊ भोजली दाई के रूप ल गौर बरनी अऊ सोना के गहना ले सजे बता के अपन अरा-परोस के परिस्थिति ल घलो गीत म मिलाथे।
सिंगार गीत

गये बजार, बिसाई डारे कांदा।
बिसाई डारे कांदा।।
हमरो भोजल रानी, करे असनांदा।
ह हो देवी गंगा ।।
देवी गंगा, देवी गंगा, लहर तुरंगा।
हो लहर तुरंगा।।
तुहरो लहरा भोजली, भिजे आठो अंगा।
ह हो देवी गंगा।ं।

बरसात दिन म किसान के नोनी मन जब कछु समय बर खेती-किसानी ले रिता होथे त घर म आगू के ब्यस्त दिन के पहिली ले धान ले चांऊर बनाय बर ढेंकी ले धान ल कुटथे अऊ पछिंनथे-निमारथे। जांता म राहेर, अरसी, चना, बउटरा ल पिसथे। ये काम म थोरकुन देरी हो जाथे त समय निकाल के संगी-जवरिहा मन करा मिलके भोजली दाई के सामने जाथे अऊ ओखर सामने म अपन मन के बात ल ये परकार ले कहिथे।
कुटी दारे धाने, पछिनी डारे कोड़हा।
लइके-लइका हन, भोजली झन करबे गुस्सा।।

सावन महिना के सुक्ल पछ के पंचमी तिथि से ले के सावन पून्नी याने राखी तक भोजली माता के रोज सेवा करथे अऊ ये सेवा म गाये जाने वाला पारंपरिक गीत ल ही भोजली गीत कहे जाथे। हमर छत्तीसगढ़ राज म अलग-अलग जगह अलग-अलग भोजली गीत गाये जाथे पर गाये के ढंग अऊ राग ह एकेच हावय।

सावन महिना के सुक्ल पछ के पंचमी तिथि से ले सावन पून्नी याने राखी तक भोजली के सेवा जतन करके भादो के पहिली तिथि के भोजली माता बिसरजन बर कुवांरी कनिया मन टुकनी मन लेके मुड़ी म बो के एक के पाछू एक करके गांव के तलाव म ले जाथे। जेला भोजली ठंडा करे जाथे, कईथे। ये पूरा बिसरजन यात्रा म बेटी माई मन भोजली गीत गावत जाथे अऊ संगे-संग मांदर, मंजीरा के थाप के सुघ्घर धुन ह मन म भकती के भाव अपने आप जगाये लगथे। पून्नी के दिन भोजली ठंडा करे समय साम के बेरा पूरा गांव म खुसी के अऊ भकती के माहौल बन जाथे। फेर भोजली दाई ल अच्छा फसल के मनोरथ के साथ तालाव के पानी म बिसरजन कर देथे। बेटी माइमन भोजली बिसरजन के बाद जस गीत के जईसे भोजली के बिरह गीत गाथे काबर के ये 10-12 दिन ले भोजली माता के सेवा जतन करे म वोखर से भावात्मक रूप से जुड़ाव हो जाये रईथे। भोजली के बिसरजन के बेरा थोरकन भोजली ल गांव के मनखेमन भगवान घलो म चढ़ाथे अऊ सियान मन ल येला दे के गोढ़ ल छू क आसीस लेथे। ये भोजली से छत्तीसगढ़ के बेटीमाई मन के भावात्मक संबंध हे ऐखरे कारन तो ये भोजली के दू-चार पउधा ल एक-दूसर के कान म खोंच के तीन-तीन पीढ़ी बर मितान, गिया बदथे अऊ सगा जइसे मानथे अऊ रईथे।

पर आज कल हमर ये परब मन अब केवल गांव-गांव म ही रह गे हे। सहर म तो केवल नेंग मात्र हो गे हे। संगवारी हो हमर ये सभयता अउ संसकिरीति, लोक परब, लोक गीत अउ तिहार मन ल नंदाय ले बचना हे जेखर ले हमर पहिचान हे अगर वो तिहार मन नंदा जाही त हमनके पहिचान नस्ट हो जाही।

प्रदीप कुमार राठौर ’अटल’
ब्लाक कालोनी जांजगीर
जिला-जांजगीर चांपा
(छत्तीसगढ़)