तुलसीदास

बाल्मीकी जब लिखे रमायन, पंडित ग्यानी गावत रिहिस! बावहन पढ़है संस्कृत भासा, आन जात मन दूर ले पावत रिहिस !! राम कथा ह पोथी म लुकाके, ऊंच जाति के मंदिर सोहावत रिहिस ! जइसन सुनावै तइसन सुनन, कोनो ह उलटा गंगा बोहावत रहिस !! तब एक रामभगत गुनगान करिस, हमर तोर देहाती के भासा ! रामचरित जनजन बर लिखिस, नाव कहाइस तुलसीदासा !! अनपढ़ गरीब ऊँच नीच सबो, अब राम कथा सब जानत हे ! धरम ह पोथी के बंधना ले छुटगे, सब मानस गंगा मानत हे !! ऊंच नीच…

Read More

बेटी मन

बेटा कहूं जिनगी के डोंगा, त पतवार ए बेटी मन ! जेठ के सुक्खा परिया जिनगी, त सावन के फुहार ए बेटी मन !! नांगर के थके जांगर ल, एक लोटा पानी म हरियाथे ! चोंट लगथे दाई-ददा ल , पीरा उन ल जनाथे !! बहु बेटा के गारी बीच. मया दुलार ए बेटी मन.. बेटा कहूं…… नान्हे पांव के छुनुर पैरी, दुरिहा ले सुनाथे ! दाई ददा ल अइसे लगथे, जइसे जेठ म पुरवइय्या आथे !! मोर टुटहा कुंदरा के सिंगार ए बेटी मन… बेटा कहूं……….। बाप हिरदय मा…

Read More

किसान के पीरा : आरे करिया बादर

आरे करिया बादर अब आ रे करिया बादर सूक्खा परगे तरिया नदिया, जर के माटी होगे राखर। आरे करिया….. ददा के दवा अऊ बेटी के बिहाव, सेठ के कर्जा ल कइसे करिहौ। दुकानदार के गारी सुनके, खातू के लागा ल कइसे भरिहौ।। “आत्महत्या”के सिवा, अब नइये मोर जांगर.. आ रे करिया…… बूंद बूंद बर सब तरसगे, पीरा होगे किसान ल। दुनिया के पेट भरइया, अब कब बोहुं मैं धान ल? लइका मन के पेट बर बेचेंव बइला नांगर…… अब आ रे करिया……. टोंटा सुखा गे पानी बिना , चिरई चुरगुन…

Read More

छत्तीसगढ़ के नारी

मैं छत्तीसगढ़ के नारी औं-२ मया पिरीत के जम्मो रूप, बाई. बेटी अऊ महतारी औं !! गउ कस सिधवा जान, अबला झन समझव ! नो हौं मैंहा पांव के पनही, मोर मन्सा ल झन रमजव !! लंका जइसे आगी लगाहूं, धधकत मैं अंगारी औं.. तन के गोरस मैं पिआके, बीर नरायन कस सिरजाथौं ! जिअत मरत के पीरा सहिके, तब ‘महतारी’ कहाथौं !! दुरजोधन दुस्सासन बर, मैं टंगिया दुधारी औं… हर परिवार ल जोड़ें रहिथंव, मैं ममता के गारा औं ! पिढ़ी के पिढ़ी संग बोहइया, पबरित गंगा धारा औं…

Read More

भारत रक्षा खातिर आबे, गणनायक गनेस

भारत रक्षा खातिर आबे, गणनायक गनेस ! भ्रस्टाचार के बेड़ी म बंधागे ! आज हमर देस !! गरीब के कोनो पुछइया नइये, मनखे धरम ल भुलत हे ! गाय मरत हे चारा बिना, किसान फंदा म झुलत है !! चोर गरकट्टा मन गद्दी म बइठे, धरके रखवार के भेस…. राम कुमार साहू सिल्हाटी, कबीरधाम

Read More