आज संझौती बेरा म बुता ले लहुट के आयेंव त हमर सिरीमति ह अनमनहा बैठे राहय।ओला अइसन दसा म देखके मे डर्रागेंव।सोचेंव आज फेर का होगे?काकरो संग बातिक बाता होगे धुन एकर मइके के कोनो बिपतवाला गोठ सुन परिस का। में ह पूछेंव-कस ओ!आज अतेक चुप काबर बैठे हस? ओहा किहिस -कुछु नीहे गा!अउ अपन बुता काम म बिलमगे।जें खायके बाद ओहा बुता काम ले रीता होइस त फेर पूछेंव-कुछु तो बात हे खिल्लू के दाई!बता न मोला! मोर गोठ ल सुनके ओकर आंखी ले आंसू निथरगे।ओहा बताइस-तें ह हमर…
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नान्हे कहिनी : नोनी
आज राधा अउ जानकी नल म पानी भरत खानी एक दूसर संग गोठियावत राहय। राधा ह जानकी ल पूछथे-‘हव बहिनी! सुने हंव तोर बर नवा सगा आय रिहिस किके।’ जानकी ह बताथे-“हव रे! आय तो रिहिन हे!” ‘त तोर का बिचार हे?’ “मोर का बिचार रही बहिनी! दाई-ददा जेकर अंगरी धरा दिही ओकर संग चल देहूं। आखिर उंकर मुड के बोझा तो बनगे हंव” ‘पाछू घनी धोखा खाय हस रे! सोच समझ के निरनय लेबे।’-राधा किथे। “मोर निरनय ल कब कोन सुने हे रे! पाछू समे में ह अउ पढहूं…
Read Moreमोला करजा चाही
पाछू बच्छर दू बच्छर ले करजा के अतेक गोठ चलत हे कि सुन-सुन के कान पिरागे हे।फलाना के करजा,ढेकाना के करजा।अमका खरचा करे बर करजा।ढमका खरचा बर करजा।राज के करजा।सरकार के करजा।किसान के करजा।मितान के करजा। दुकान के करजा। हंफरासी लागगे करजा के गोठ सुनके।दू साल पहिली एक झन हवई जहाज वाला ह करजा खाके बिदेस भागे हे ते लहुटे के नांव नी लेवत हे।एक झन तगडा चौकीदार तको बैठे हे।फेर को जनी का मंतर जानथे वो करजा खानेवाला मन कि वो कतका बेर बुचकथे कोनो थाहा नी पाय।एती चौकीदार…
Read Moreव्यंग्य-हनुमान के जात
बैकुण्ठ धाम म भगवान राम ह माता सीता संग सुंदर सिंघासन म बिराजमान होके इहलोक के संबंध म चरचा करत रहय वतकी बेरा म हनुमानजी उंहा पहुंचथे अउ पैलगी करथे।हनुमान जी ल उदुपहा बैकुण्ठ धाम म आय देखके श्री रामचंद्र ल बड अचरित लागथे।ओहा हनुमानजी ल पूछथे-कैसे पवनपुत्र!आज उदुप ले इंहा कैसे!कलजुग सिरागे का? हनुमानजी ह भगवान श्री राम जी ल बताथे-आप तो बैकुंठ म बिराजे हव परभु!!मे ह कलजुग म तुंहर भजन गाए के लालच अउ कलजुग म अवतार के अगोरा के सेती पिरथी म रूके हंव।फेर मोर ऊपर…
Read Moreलघुकथा-किसान
एक झन साहब अउ ओकर लइका ह गांव घूमे बर आइन।एक ठ खेत म पसीना ले तरबतर अउ मइलाहा कपडा पहिर के बुता म रमे मनखे ल देखके ओकर लइका पूछथे-ये कोन हरे पापा? ये किसान हरे बेटा!!-वो साहब ह अपन बेटा ल बताइस। ‘ये काम काबर करत हे पापा?’ “ये अन्न उपजाय बर काम करत हे बेटा!” ‘ये मइलाहा कपडा काबर पहिरे हे पापा?’ “ये गरीब हे ते पाय के अइसन कपडा पहिरे हे बेटा!” ‘अच्छा!!त किसान ह गरीब होथे का पापा?’ “हहो!हमर देस के जादातर किसान गरीब हे…
Read Moreका होही?
बाढत नोनी के संसो म ददा के नींद भगा जाथे। कतको चतुरा रहिथे तेनो ह रिश्ता-नत्ता म ठगा जाथे। दू बीता के पेट म को जनी!! कतेक बड दाहरा खना जाथे। रात-दिन के कमई ह नी पूरय जतेक रहिथे जम्मो समा जाथे। दुब्बर बर दू असाढ करके मालिक ल घलो मजा आथे। लटपट-लटपट हमरे बर पूरथे तउनो म रोज सगा आथे। बइमान सब मउज करत हे साव मनखे ह सजा पाथे। आंखी मूंदके बैठे हे सब हंसा तभे करिया कउंवा जघा पाथे। रीझे यादव टेंगनाबासा(छुरा)
Read Moreनान्हे कहिनी- बेटी अउ बहू
एक झन दूधवाला ह अपन गिराहिक कना दूध लेके जाथे त एकझन माइलोगिन ह दूध ल झोंकाथे। पहिली दिन- ‘उपराहा दूध कोन मंगाय हे गा! काबर अतेक दूध देवत हस?’ वो माइलोगिन ह पूछिस। “भऊजी ह देबर केहे हे दाई!” दूध वाला ह बताइस। ‘का करही वोहा अतेक दूध ल!!’ “दाई! भउजी ह बतावत रिहिसे ओला डॉक्टर ह दूध संग म दवाई पीये बर केहे हे। ते पाय के आधा किलो उपराहा दूध मंगाय हे।” ‘अउ ओकर पैसा ल का ओकर बाप ह दिही! झन दे उपराहा दूध। हमर घर…
Read Moreनान्हे कहिनी – सवाल
‘बबा!ये दिया काबर बरत हे?’ ‘अंजोर करे खातिर बरत हे बेटा!!’ बबा ह अपन नाती ल समझावत बताइस। ताहने ओकर नाती ह फेर एक ठ सवाल पूछथे- ‘ये अंजोर काकर बर हरे बबा?’ ‘जेन ह ओकर अंजोर के फयदा उठाही तेकर बर!!’ ‘एमा दिया के का फयदा हे बबा?’ ‘एमा दिया के कोनो फयदा नीहे बेटा!’ ‘एमा दिया के फयदा नीहे त काबर बरत हे? बबा!’ ‘दिया के बुता हरे बेटा! अपन फयदा-नुकसान के चिंता ल छोडके ओहा सरलग बरत रहिथे।’ ‘जब नानकुन दिया ह अपन स्वारथ के चिंता ल…
Read Moreचुनई के बेरा मे आफर के बरसात हे।
चुनई के बेरा मे आफर के बरसात हे। बोरे बासी खवईया बर भात ताते तात हे। बच्छर भर ले राज करे बर दू दिन हमला भरमाही। अभी माथ नवाही पाछू मेछराही अउ टुंहू देखाही। अभी मंदरस घोरे बोली फेर पाछू लात हे। चुनई के बेरा मे आफर के बरसात हे।। आनी-बानी के सपना देखाही,जम्मोझन रिझाहीं। नून-चटनी के खवईया ल सोंहारी तसमही म दंताही। चुनाव के झरती म उहीच पेट अउ पाट हे। चुनई के बेरा मे आफर के बरसात हे। लेठवा अउ अलाल मन के दिन बादरआही। रंग-बिरंगा गमछाधारी मन…
Read Moreबरसा ह आवत हे!
डोंगरी गुंगवावत हावय,कोरिया फूल महमहावय। छन-छन पैरी बजावत बरखा रानी आवत हावय। भुंईया पहिरे हरियर लुगरा बादर दिखय करिया करिया। मन मतंग होके बेंगवा छत्तीस राग गावत हावय। छन-छन पैरी बजावत बरखा रानी आवत हावय। किसनहा के मन हरसागे। धनहा डोली म धान बोवागे। रोपा,बियासी के बुता म रमके लइहा मतावत हावय। छन-छन पैरी बजावत बरखा रानी आवत हावय। गली -खोर सब चिखला माते। नान्हे नान्हे जम्मो लइका नाचे। नदिया-नरवा,ढोंडगा म बइहा धार बोहावत हावय। छन-छन पैरी बजावत बरखा रानी आवत हावय। रीझे यादव टेंगनाबासा(छुरा)
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