संपादकीय: टमड़ ले पहिली अपनेच कान

पाछू पंद्रही ले छत्तीसगढ़ म अफवाह फइले हवय के गांव गांव म लईका चोर मन के दल के दल आये हें। ये अफवाह व्हाट्स एप के सहारा ले जादा फइलिस। नवा नवा मनखे मन टचस्क्रीन मोबाईल लीन अउ वोमा इंटरनेट पेक भरवईन, तहां ले वोमा व्हाट्स एप चलईन, अइसे लागे लगथे के जमा बिस्व के गियान अउ सूचना हमर हाथ म आ गे। कोन सूचना सहीं ये अउ कोन सूचना गलत आए तेखर निरवार करे के पहिली लोगन म ये होड़ सुरू हो जथे के ये सूचना ल जल्दी ले…

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संपादकीय : करिया तसमा म आंखी के उतियईल अउ उल्टा लटके के डर ले मुक्ति

करिया तस्मा पहिर के प्रधानमंत्री के सुवागत करई के किस्सा चार दिन मीडिया म छाईस। अपन डहर ले बुद्धिजीवी मन ओखर उपर अपन प्रतिक्रया घलो दीन। कोनो करिया तस्मा के संग खड़े रहिन त कोनों सरकार के कांसड़ा तिरई ल बने कहिन। छत्तीसगढ़ म तस्मा खपई ल, टेस मारे के उदीम कहे जाथे, काबर के छत्तीसगढ़ बर ये सहरी संस्कृ‍ति के लक्छन आए। फेर गांव अब सहर लहुटत हवय, अइसन समें म अब गावों म तस्मा खापे मनखे के दरसन होवत हे। ते पाके अब जमो तस्मा वाले मन के…

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लोक भाखा के सामरथ : छत्तीासगढ़ी म प्रेमचंद के कहिनी

हिन्दी कहिनी के दुनियां म प्रेमचंद ल ‘कथा सम्राट’ कहे जाथे, हम सब प्रेमचंद ल ओखर कहिनी ले जानथन। पंच परमेश्विर, बूढ़ी काकी, नमक के दरोगा जइसे कइयोन कहिनी मन हमला जीवन म सत के संस्कादर अउ समाज ल समझे के विवेक देहे हे। हमर अंतस के कोनो कोना म प्रेमचंद के कहिनी के पात्र मन आज तक ले जीयत हे। उंखर सुरता भले धुंधरा गए होही फेर जब भी प्रेमचंद के कहिनी ल दूबारा पढ़थन त उमन प्रेचंद के सबद संग उठ खड़े होथें। विचार म, सोंच म, जे…

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संपादकीय : का तैं मोला मोहनी डार दिये

संगी हो देखते देखत हमर साहित्य के भण्डार बाढ़त जावत हे। हमर सियान अउ हमर भाखा के परेमी गुनीक मन छत्तीसगढ़ी भाखा ल संविधान के आठवीं अनुसूची म लाए खातिर अपन-अपन डहर ले उदीम म लगे हन। सांसा ले आसा हवय, आज नहीं त काली हमर गोहार ल संसद ह सुनही अउ हमर भाखा संविधान के आठवीं अनुसुची म दरज होही। छत्तीसगढ़ी पद्य साहित्य म छंद बंधना म कसे रचना बीच के समे म कमती हो गए रहिसे। ये कमी ल जन कवि कोदूराम दलित जी के बेटा अरूण कुमार…

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सबद के धार : पीरा ल कईसे बतावंव संगी

छत्‍तीसगढ़ी साहित्‍य म अब साहित्‍य के जमो विधा उपर रचना रचे जात हवय. ये बात हमर भाखा के समृद्धि बर बहुत सुघ्‍घर आरो आय. गद्य जइसे पद्य म घलव कविता, गीत, हाईकू के संगें संग उर्दू साहित्‍य के विधा गजल तको ल हमर सामरथ साहित्‍यकार मन छत्‍तीसगढ़ी म रचत हांवय. अइसनेहे साहित्‍यकार जितेन्‍द्र ‘सुकुमार’ जी के छत्‍तीसगढ़ी गजल संग्रह ‘पीरा ल कईसे बतावंव संगी’ पढ़े ल मिलिस. गजल के कसौटी म पद्य कइसे कसाथे अउ काला असल म गजल कहे जाथे ये बात बर मैं जादा जानकार नइ हंव. फेर…

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महंगइ के चिंता

तइहा के बात ला बईहा लेगे, समे ह बदल गे अउ नवा जमाना देस म अपन रंग जमा डारे हे। एकअन्नी-दूअन्नी संग अब चरन्नी नंदा गे हे। सुने हन सरकार ह अब पांच रूपिया ला घलो बंद करईया हे, अब हमर रूपिया दस ले सुरू होही। पहिली हमर सियान मन खीसा भर पईसा म झोला भर जिनिस बिसा डारत रहिन, अब झोला भर रूपिया म खीसा भर जिनिस मिलत हावय। मंहगई के अहा तरा मुह फरई ला देख के नेता अउ मीडिया वाले मन अड़बड़ चिंता करत दिखथें, उंखर चिंता…

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बूढ़ी दाई

पितर मन के पियास बर अंजरी भर जल साध बर, बरा-बबरा, सोंहारी संग हूम रंधनी खोली के खपरा ले उड़ावत धुंगिया बरा के बगरत महमहई लिपाये-चंउक पुराये ओरवाती म बगरे फूल ओखरे संग भुखाए लइका दूनो मन, अगोरत हावय कोन झकोरा संग, मोर बूढ़ी दाई आही. अउ बरा बबरा खवाही. संजीव तिवारी

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पितर पाख

पितर पाख भर बिहनिया नदिया म कनिहा भर पानी म खड़े सोंचथंव ललियावत-करियावत जल ह कब उजराही. यहा तरा बाढ़त परदूसन ले आघू जब बजबजावत गंगा ह गंगा, अउ नदिया ह नदिया नइ रहि पाही. त कोन बेटा पानी देहे बर नदिया अउ गया जी म पिंडा, नैनी उतर के हाड़ा सरोए बर गंगा जाही. अइसन म तो मोर लहकत पुरखा पितर पाख म घलव पियासे, बरा के आसे, ओरवाती ले लहुट जाही. तेखरे सेती चेत करे के इही समें हे पितर पाख ला अब तो हमला जल देबी के…

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नाचा के सियान : भुलवाराम यादव

भुलवाराम दुर्ग के तीर रिंगनी गांव के अहीर रहिस। भुलवाराम लइकई ले अपन गांव म मालगुजार, गौंटिया मन के गरूवा चरइ अउ गोबर-कोठा के काम करय। जब लइका भुलवा गरूवा चराये बर निकलय त बंसरी संग करमा-ददरिया के गीत गावय अउ सिम-साम देखके बिधुन होके नाचय। भुलवा के नचई अउ गवइ ला देख के नामी पंडवानी गायक पूनाराम निषाद के पिताजी लक्ष्‍मण निषाद अउ नामी गम्‍मतिहा ठाकुरराम के पिताजी गोविन्‍दराम मन ओला खड़े साज नाचा म परी बना के नचवाये लागिन। ओ समय भुलवा के उमर आठ साल के रहिस।…

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छत्तीसगढ़ी लोक म हनुमान

हनुमान जी ह हमर छत्तीसगढ़ के बड़का देंवता आय. हमर छत्तीसगढिया मनखे मन के हिरदे म हनुमान जती के अड़बड़ सरधा अउ मान सन्नमान हावय. हनुमान जी ह अकेल्ला अइसे देंवता आंय जउन ह अपन बल के खातिर अनार्य मन बर पूजित रहे हें अउ बुद्धि, विवेक संग राम जी के भगति के खातिर आर्य मन के घलव बड़का देंवता के रूप म प्रतिष्ठा पाये हें. राम ले जादा राम के भगत के महत्ता के सेती हनुमान जी ह हिन्दू मन के आराध्य देव के रूप म जन मन म…

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