भाखा के महमहई बगरावत छत्तीसगढ़ी पत्रिका : बरछाबारी

छत्तीसगढ़ी भाखा के साहित्य ला चारो खूंट बगराए खातिर नवा प्रदेस म छत्तीसगढ़ी के मान रखइया संगी मन अपन अपन डहर ले सुघ्घर उदीम करत हांवय. अइसनेहे चौमासा पतरिका ‘बरछाबारी’ ला सरलग निकाल के भाई चंद्रशेखर ‘चकोर’ ह हमर भाखा के असल सेवा करत हांवय. ‘बरछाबारी’ के अंक मोला चकोर जी ह भाई जयंत साहू जी के रसदा देखाए के पाछू सरलग भेजत हांवय. ‘बरछाबारी’ के अंक डाक ले मिलतेच जम्मो ला लउहे पढ़ डारत रेहेंव अउ मन म रहय के ये पतरिका म संघराए रचना मन के उप्पर दू…

Read More

परम्परा : छत्तीसगढ़ी म महामाई के आरती

छत्तीसगढ़ सक्ति उपासक राज ये, इंहा के जम्‍मों गांव म देवी आदि शक्ति के रूप महामाई के मंदिर हावय. गांव केमहामाई म दूनों नवरात म जोत जलाये जाथे अउ जेंवारा बोये जाथे. जम्‍मों गांव म नवराती के समय बिहनिया अउ संझा आरती होथे. छत्‍तीसगढ़ के जम्‍मों गांव म ये आरती हिन्दी के देवी आरती के रूप म होथे नइ तो कोनों कोनो जघा मंदिर म उंहा के देवी के हिन्‍दी नइ तो संस्‍कृत म गुनगान करत आरती गाये जाथे. छत्‍तीसगढ़ के एक गांव म छत्‍तीसगढ़ी भाषा म महामाई के आरती…

Read More

छत्‍तीसगढ़ी नाचा के जनक : दाउ दुलारसिंह मंदराजी

राजनांदगांव ले सात किलोमीटर दूरिहा रवेली गांव हे। रवेली गांव के दाउ बाड़ा के बड़का अंगना म बड़े पेट वाला नान्‍हे लईका दुलार खेलत रहय, उही समे मा लइका ने नाना सगा के रूप म आइस। नाना ह देखिस बाड़ा के अंगना म तुलसी चौंरा म माढ़े उडगुड़हा पथरा के मद्रासी भगवान कस अंगना म खेलत पेटला लइका हर दिखत हे। त ओ बबा ह नाती ला मजाक म ‘मद्रासी’ कहि दीस। लइका दुलारसिंह ला घर के मन मजाक म मद्रासी कहे लागिन। गांव म मद्रासी सब्‍द ह बिगड़त बिगड़त…

Read More

चिनहा

कईसे करलाई जथे मोर अंतस हा बारूद के समरथ ले उडाय चारो मुडा छरियाय बोकरा के टूसा कस दिखत मईनखे के लाश ला देख के माछी भिनकत लाश के कूटा मन चारो मुडा सकलाय मईनखे के दुरगति ला देखत मनखे मन ला कहिथे झिन आव झिन आव आज नही त काल तुहूं ला मईनखे बर मईनखे के दुश्मनी के खतिर बनाये बारूद के समरथ ले उडाई जाना हे हाथ मलत अउ सिर धुनत माछी कस भनकत पुलिस घलो कहिथे झिन आव झिन आव अपराधी के पनही के चिनहा मेटर जाही…

Read More

छत्तीसगढ़ी के उपन्यास : मोर बिचार

मानुस समाज म हजारों साल ले डोकरी दाई के मुह ले कहिनी कहे के परम्परा रहे हे. हमर पारंपरिक कहिनी मन म देबी-देंवता, जादू-मंतर, विरह-परेम के अचरज मिंझरा किस्सा रहय. वो समें म हमर सियान मन ये कहिनी मन के सहारा लेके समाज ला सीख देहे के उदीम करंय. समें के अनुसार कहिनी के ये रूप के बिकास होइस, सियान मन हा कहिनी के ये रूप के रोचकता ला बनाए खातिर नवा उदीम करत कहिनी के बिसय ला समें के संग जोरे खातिर येखर पद्य रूप ल धीरे धीरे समाज…

Read More

गम्‍मतिहा : मदन निषाद

छत्‍तीसगढ़ के नाचा के मान ला देस बिदेस म फैलइया कलाकार मन म रवेली अउ रिंगनी साज के कलाकार मन के बड़ नाम हे। दाउ मदराजी के पंदोली अउ हबीब तनवीर के संगत म हमर पारंपरिक खढ़े साज नाचा के कलाकार मन अपन अभिनय के बल म हमर धरोहर लोक नाट्य नाचा के प्रसिद्धी ला चारो मूड़ा बगराईन हे। हमर कलाकार मन के अभिनय ल देख के बड़का बड़का नाट्य निदेसक मन ह चकरा जावय अउ छत्‍तीसगढ़ के गोदरी के लाल मन के बारंबार बड़ई करय। हमर पारंपरिक नाचा के…

Read More

नाचा के पहिली महिला कलाकार : फिदाबाई मरकाम

फिदा बाई छत्‍तीसगढ़ के नाच-गान म पारंगत देवार जात के बेटी रहिस। देवार डेरा म जनम के खातिर फिदा बाई बचपन ले अपन डेरा संग गांव-गांव घूम-घूम के नचई अउ गवइ करय, ओखर संग ड़ेरा के बड़े महिला मन तको नाचय-गावंय। देवार डेरा के पुरूष मन बाजा बजावंय अउ महिला मन नाचय, दाउ-गौंटिया अउ बड़े किसान के घर म नाच-गा के इनाम मांगय। फिदा बाई अपन डेरा म सबले सुन्‍दर अउ कोइली जइसे कंठ वाली रहिस ओखर सोर चारो मूड़ा बगरे लागे रहिस। इही समे मा नाचा के पुरोधा दाउ…

Read More

लोक रंजनी लोक नाट्य : नाचा

कोनो भी प्रदेश के लोक नाट्य म हमर बीच के बोली अउ अपन बीच के कलाकार संग सिंगार के सहजता अउ सामाजिक संदेस होथे, जेखर भीतरी गीत-संगीत, नाच अउ अभिनय होथे। लोक नाट्य बर कोनो पोथी पतरा, किताब सिताब के नित-नियम के बंधेज नई रहय काबर कि लोकनाट्य ह हमर पुरखा मन मेर ले पीढ़ी उप्‍पर पीढ़ी होवत आघू बढ़थे। लोक नाट्य ह हमर जम्‍मो समाज के उमंग उछाह के संघरा रूप होथे। लोकनाट्य अपन-अपन जघा म अलग-अलग होथे अलग-अलग प्रदेस म अलग अलग नाम के लोकनाट्य प्रचलित हावय। बिहार…

Read More

सत के अमरित धार बोहवईया : देवदास बंजारे

छत्‍तीसगढ़ के पारंपरिक पंथी के बारे म जब-जब बात होही, देवदास बंजारे के नाव ला कभू भुलाए नइ जा सकय। गुरू बाबा घसीदास के अमर संदेसा ला जन-जन मेर पहुचईया अउ पूरा दुनिया म फैइलईया देवदास बंजारे हमर देश के बड़का लोक कलाकार रहिस। हमर प्रदेश के पारंपरिक लोकनृत्‍य अउ गीत पंथी ल देवदास जी ह न केवल सहरी लोक मंच मन म आघू लाइन भलुक ओला सात समुदर पार देस-बिदेस तक म बगरा दीन। पंथी के महमहई बगरईया देवदास जी के जनम एक जनवरी 1947 म धमतरी के जिला…

Read More