घाम घरी आगे रूख-राई अइलागे। तरिया, नदिया सुखागे अउ कुंआ बोरिंग थर्रागे॥का बतावंव संगी,घाम के कहर।गांव-गांव, शहर-शहरहोवत हे हाहाकार॥भूख-पियास म मनखे के मुंहु चोपियागे।घाम घरी आगे, रूख-राई अइलागे।धू-धू जरत हवय,धरती दाई के कोरा।आगी अंगरा बरोबर घाम बरसावत हवय बेरा॥कोन जनि काबर इंद्र देवता रिसागे।घाम घरी आगे रूख-राई अइलागे॥सब जीव-जन्तु,हवय बड़ परसान रे।अपन परान ल हम,कइसे? बचान रे॥पानी-पानी सब गोहराथें, बइसन बिपत आगे?घाम घरी आगे रूख-राई अइलागे।तरिया, नदिया सुखागे अउ कुंआ बोरिंग थर्रागे। शेरसिंह गोडियामुकाम- कोलियारी, पो.-गैंदाटोलातह. छुरिया, जिला-राजनांदगांव
Read MoreTag: Sher Singh Godiya
मनखे बन के बता : कबिता
नगरा लुच्चा बनना सरल हे, तंय मनखे बन के बता।मनखे-मनखे एक समान कोनहो गरीब ल झन सता॥धन अऊ बल रावन जइसे के घलो काम नई आइस,तंय अलोक्खन ले बहिर, अपन आप ल झन जता।भारत साधु, संत, रिसि, मुनि, संस्कार के देस आय,झन धर तंय अनियांव, अतियाचार के रसता।कखरो मन म भेदभाव, नफरत के जहर झन घोर,बना सकथस त बना परेम के नत्ता।चारों डहर हाहाकर हे मनखे, मनखे ल काटत-बोंगत हे,का भांटा-मुरई कस मनखे होगे हे ससता?धौंस झन दे चरदुनिया राजनीति अऊ सत्ता के,कतको आइन अऊ गेइन जेखर नई हे अता-पता।नगरा…
Read Moreअबिरथा जनम झन गंवा
अबिरथा जनम झन गंवा रे, मानुस तन ल पाके। भगवान ल दोस झन दे रे, कुछु नई दे हे कहिके॥ भगवान दे हे सुग्घर दु हाथ, दु गोड़। मिहनत ले तंय रे, मुहु झन मोड़। सोन ह कुन्दन बनथे, आगी म तपके। अबिरथा जनम झन गंवा रे, मानुस तन ल पाके॥ तोला अऊ देहे बढ़िया, दु ठन आंखी, दु ठन कान। अइसन पाके अनमोल रतन काबर बने हस अनजान? फोकटे झन घूमत र, दूसर के बात म आके। अबिरथा जनम झन गंवा रे, मानुस तन ल पाके॥ भूल के तंय…
Read More