छत्तीसगढ़ी भूल भूलैया

समर्पन धमधा के हेडमास्टर पं. भीषमलाल जी मिसिर महराज के सेवा मा :- लवनी तुहंला है भूलभुलैया नींचट प्यारा। लेवा महराजा येला अब स्वीकारा।। भगवान भगत के पूजा फूल के साही। भीलनी भील के कंद मूल के साही।। निरधनी सुदामा के ओ चाउर साही। सबरी के पक्का 2 बोइर साही।। कुछ उना गुना झन हाथ अपन पसारां लेवा महराजा, येला अब स्वीकारा।। जावलपुर, दिनांक 12. 04. 1918 तुहंर दया के भिखारी, शुकलाल प्रसाद पांड़े भूमका ये बात ला सब जानथें कि आदमीमन धरम-करम, नीत-प्रीत, बुद्धू-बिबेक, चतुराई कहां ले कहों, भगवान…

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पंडित शुकलाल पाण्डेय : छत्तीसगढ़ गौरव

हमर देस ये हमर देस छत्‍तीसगढ़ आगू रहिस जगत सिरमौर। दक्खिन कौसल नांव रहिस है मुलुक मुलुक मां सोर। रामचंद सीता अउ लछिमन, पिता हुकुम से बिहरिन बन बन। हमर देस मां आ तीनों झन, रतनपुर के रामटेकरी मां करे रहिन है ठौर।। घुमिन इहां औ ऐती ओती, फैलिय पद रज चारो कोती। यही हमर बढ़िया है बपौती, आ देवता इहां औ रज ला आंजे नैन निटोर।। राम के महतारी कौसिल्या, इहें के राजा के है बिटिया। हमर भाग कैसन है बढ़िया, इहें हमर भगवान राम के कभू रहिस ममिओर।।…

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पितर पाख मा साहित्यिक पुरखा के सुरता : शुकलाल प्रसाद पांडेय

हाट्स एप ग्रुप साहित्‍यकार में श्री अरूण कुमार निगम भईया ह पितर पाख मा पुरखा मन के सुरता कड़ी म हमर पुरखा साहित्‍यकार मन के रचना प्रस्‍तुत करे रहिन हे जेला गुरतुर गोठ के पाठक मन बर सादर प्रस्‍तुत करत हन – छत्तीसगढ़ी सूक्तियाँ जेहर पर के प्रान बचाथे। तेकर ले इसवर सुख पाथे।। बुद्धमंता मन सिरतो कहथें। बनिजेच मां लछिमी जी बसथें।। मनखे मनखे होथे अंतर। कोनो हीरा कोनो कंकर।। दुनोंदीन ले बिनसिन पांड़े। हलुआ मिलिस, मिलिस नइ मांड़े।। दू कौंरा जाथे जब भीतर। तभे सूझथे देंवता-पीतर।। मनखे ला…

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