उम्मर असन उम्मर नही अउ “लब” फरमावत हव बगइचा कोनटा म मुड़ी जोरे आशिकी गोठियावत हव अरे कुछ तो फिकर करव दाई- ददा के मरजाद के काबर बिदेशी बेलेंटाइन ला अकारथ मनावत हव चार दिन पाछु ले मौसम बनावत हव कोनो लाली गुलाब,कोनो आनी-बानी गिफ्ट बिसावत हव मोबाइल-व्हाट्सप के जमाना में छिन नइ लगत हे कोन मेर मिलना हे ते ठउर ल बतावत हव मुहु-कान बांधे टुरा-टुरी लॉन्ग डराइव म जावत हव दाई-ददा ल फोन करके एस्टरा किलास बतावत हव पंदरहि होगे कापी-किताब ल अलमारी म धराय का बिलवा ,का…
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- Suneel Sharma
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