पारंपरिक बांस-गीत

छेरी ल बेचों मेढ़ ल बेचौं,
बेचों भंसी बगार।
बनी भूती मा हम जी जाबो
सोबोन गोड़ लमाय॥
छरी न बेचों, मेढ़ी न बेचौं
न बेचौं भैंसी बगार।
मोले मही मां हम जी जाबो,
अउ बेचौं तोही ल घलाय॥
कोन तोरे करही राम रसोई,
कोन करे जेवनार।
कोन तोरे करही पलंग बिछौना,
कोन जोहे तोरे बाट॥
दाई करिहै रामे रसोई,
बहिनी करे जेवनार।
सुलखी चेरया पलंग बिछाही,
अउ मुरली जोहे मोर बाट॥
सास डोकरिया मरहर जाही
नंनद पढठोहूं ससुरार।
सुलखी चेरिया हाटन बिकाही,
अउ मुरली नदी माँ बोहाय॥
दाई ल रखहूं अमर खतरा के,
बहिनी रखहूं छे मास।
सुलखी चेरिया बांधि छांदि रखहूं
अउ मुरली ल रखहूं जी मां डार॥

पारंपरिक छत्‍तीसगढ़ी बांस-गीत