पारंपरिक फाग गीत

श्याम बजा गयो बीना हो
एक दिन श्याम बजा गयो बीना
चैत भगती, बैस़ाख लगती, जेठ असाढ़ महीना
सावन में गोरी झूले हिंडोलना, भादो मस्त महीना हो
… एक दिन श्याम बजा गयो बीना।
कुंवार भागती, कातिक लगती अगहन पूस महीना
माघ में गोरी मकर नहावे, फ़ागुन मस्त महीना हो
… एक दिन श्याम बजा गयो बीना।
सुंदर सेज बिछे अंटा पर, पौढ़े नारी नगीना
चोली के बंद तड़ातड़ टूटे अंचरा पोछे पछीना हो
… एक दिन श्याम बजा गयो बीना।

पारंपरिक फाग गीत