- सुमिरव तोर जवानी ल
- तयं काबर रिसाये रे बादर
- मोरो बिहा कर दे
- फाग गीत - होली हे
- रीतु बसंत के अवई ह अंतस में मदरस घोरथे
- सुन तो भईरी
- अईसने चुनई आथे का
- मोर गाँव के सुरता आथे
- छत्तीसगढ़िया जागव जी
- नोनी मन के खेलई कुदई ह हिरदे में मदरस घोलय
- आल्हा छंद : झाँसी के रानी
- चलनी में गाय खुदे दुहत हन
- भक्ति करय भगत के जेन
- पंचू अऊ भकला के गोठ : चुनई ह कब ले तिहार बनगे
- झाड़ फूंक करलौ जी लोकतंत्र के
- आल्हा छंद : भागजानी घर बेटी होथे
- महतारी भासा
- सेल्फी ह घर परवार समाज ल बिलहोरत हाबय
- संबंध मिठास के नांव ताय मड़ई ह
- ईंहा के मनखे नोहय
- अगुवा बनव
- कँपकँपाई डारे रे
- हंडा पाय हे किथे सिरतोन ये ते लबारी
- कभू तो गुंगवाही
- नान्हे कहिनी : बदना
- बड़का तिहार
- मया के अंजोर
- गदहा के सियानी गोठ
- समे समे के गोठ ये
- हाय रे मोर गुरतुर बोली
- हमर भाग मानी ये तोर जईसन हितवा हे
- का पुरवाही में अईसने जहर घुरे हे
- घाम तो घाम मनखे होवई ह बियापत हे
- कईसन राज ये कका
- मया के होरी
- बेटी की हत्या : संस्मरण
- चिरई चिरगुन अतका तको नईये, वाह रे मनखे
- बेटी ल झन मारव : विजेंद्र वर्मा अनजान
- अपन सुवारथ रईही त मोहलो मोहलो
- अड़हा रईतिस तेने बने ददा
- छत्तीसगढ़ के माटी अंव
- देवारी तिहार मनाबों
- बेटी अंव, तेकरे पीरा ह बड़ जियानथे
- तीजा के अगोरा
- झंडा फहराबो
- नान्हें बियंग कहिनी: मोला कुकुर बना देबे
- भोरहा में झन रईहूँ
- मर जबे गा संगवारी
- मोर भुईयां के भगवान
- जोहत हाबन गा अउ झन भुलाबे
- गाँव लुकागे
- विजेंद्र कुमार वर्मा के कविता
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