CG High Court: ST कर्मचारी को प्रमोशन प्रक्रिया से बाहर करना पड़ा भारी, हाईकोर्ट ने 90 दिन में DPC दोबारा करने का दिया आदेश

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पदोन्नति से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि अनारक्षित पद किसी एक सामान्य वर्ग के लिए तय नहीं होता। यदि अनुसूचित जनजाति वर्ग का कोई कर्मचारी वरिष्ठता और योग्यता के आधार पर अनारक्षित पद के लिए पात्र है, तो उसके नाम पर भी पदोन्नति के दौरान विचार किया जाना चाहिए।मामला रायपुर के काशीराम नगर निवासी 53 वर्षीय अलख राम ध्रुव से जुड़ा है। वे स्कूल शिक्षा विभाग के लोक शिक्षण संचालनालय में सहायक ग्रेड-1 के पद पर कार्यरत रहे हैं और अनुसूचित जनजाति वर्ग से आते हैं।

2016 की DPC में नहीं किया गया था नाम पर विचार

वर्ष 2016 में सहायक अधीक्षक पद पर पदोन्नति के लिए विभागीय पदोन्नति समिति यानी DPC की बैठक हुई थी। उस समय दो पद उपलब्ध थे। इनमें एक पद अनारक्षित और दूसरा अनुसूचित जाति वर्ग के लिए था।अलख राम ध्रुव का आरोप था कि वरिष्ठ होने के बावजूद उन्हें केवल इस आधार पर पदोन्नति की प्रक्रिया से बाहर कर दिया गया कि अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए कोई रिक्त पद उपलब्ध नहीं था। वहीं उनसे कनिष्ठ कर्मचारियों के नामों पर पदोन्नति के लिए विचार किया गया।

वरिष्ठ होने के बावजूद कनिष्ठ कर्मचारियों के नाम पर विचार

वरिष्ठता सूची के अनुसार अलख राम ध्रुव, सुनील कुमार भूमरकर और शैलेश शर्मा से वरिष्ठ थे। इसके बावजूद 2016 की DPC में सहायक अधीक्षक पद के लिए दोनों कनिष्ठ कर्मचारियों के नाम पर विचार किया गया।इसी कार्रवाई को चुनौती देते हुए अलख राम ध्रुव ने हाईकोर्ट का रुख किया और पदोन्नति प्रक्रिया में अपने नाम पर भी विचार किए जाने की मांग की।

राज्य सरकार ने कोर्ट में क्या दलील दी?

राज्य सरकार की ओर से सरकारी अधिवक्ता अखिलेश कुमार ने याचिका का विरोध किया। सरकार की ओर से तर्क दिया गया कि उस समय अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए कोई पद उपलब्ध नहीं था।सरकार के मुताबिक वर्ष 2016 में उपलब्ध दोनों पद आरक्षण रोस्टर के अनुसार भरे गए थे और विभागीय पदोन्नति की प्रक्रिया संबंधित नियमों के तहत ही पूरी की गई थी।

हाईकोर्ट ने अनारक्षित पद को लेकर क्या कहा?

मामले की सुनवाई जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की पीठ ने की। अदालत ने स्पष्ट किया कि अनारक्षित पद किसी विशेष सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित नहीं माना जा सकता।यदि आरक्षित वर्ग का कर्मचारी वरिष्ठता और योग्यता के आधार पर अनारक्षित पद के लिए पात्रता रखता है, तो उसके नाम पर भी पदोन्नति के लिए विचार किया जाना जरूरी है। इसी आधार पर अदालत ने अलख राम ध्रुव के मामले में दोबारा विभागीय समीक्षा का निर्देश दिया।

90 दिन के भीतर दोबारा होगी DPC

हाईकोर्ट ने विभागीय पदोन्नति समिति की समीक्षा बैठक आयोजित करने का आदेश दिया है। इसमें अलख राम ध्रुव के नाम पर सहायक अधीक्षक पद पर पदोन्नति के लिए नए सिरे से विचार किया जाएगा।अदालत ने विभाग को यह पूरी प्रक्रिया 90 दिनों के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद अब संबंधित विभाग को नियमों के अनुसार अलख राम ध्रुव की वरिष्ठता और योग्यता को ध्यान में रखते हुए उनके पदोन्नति दावे पर दोबारा निर्णय लेना होगा।

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